उत्तर प्रदेश

डॉक्टर के बाद दी जिदंगी को उड़ान

Admin Delhi 1
11 Sep 2023 5:47 AM GMT
डॉक्टर के बाद दी जिदंगी को उड़ान
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मिसाल बने फिजियोथेरेपिस्ट

मुरादाबाद: फिजियोथेरेपी अब काफी कारगर तकनीक के तौर पर सामने आने लगी है. ऐसे अनगिनत मामले हैं, जहां फिजियोथेरेपिस्टों ने सेवा की मिसाल पेश की.

टीएमयू हॉस्पीटल में फिजियोथेरेपी की हेड ऑफ डिपार्टमेंट डॉ. शिवानी कौल ने बताया कि न्यूरोलॉजी, स्ट्रोक और पैरालिसिस के मामलों में फिजियोथेरेपी ने काफी बेहतर रिजल्ट दिया है. कुछ दिनों पहले नितीश शर्मा नाम के एक मरीज पैरालिसिस के अटैक से बुरी तरह प्रभावित हो गए थे. इस केस में डॉक्टरों ने तीमारदारों से कह दिया था कि एक साल तक शरीर में कोई मूवमेंट नहीं हो सकता है. फिजियोथेरेपी की मदद से उन्हें बेहतर करने का प्रयास किया गया. सिर्फ तीन महीने में नितीश अपने पैरों पर चलने लगे. जिला अस्पताल में फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. मोहम्मद इलियास ने बताया कि ऑर्थराइटिस, स्पांडिलाइटिस से पीड़ित मरीजों में समस्या से राहत पाने के लिए फिजियोथेरेपी का रुझान तेजी से बढ़ा है. सभी प्रकार के स्पांडिलाइटिस, घुटनों, जोड़ों के दर्द में फिजियोथेरेपी मरीजों को राहत दे रही है. इसके अलावा पोस्ट ऑपरेटिव केस में भी ये थेरेपी काफी कारगर है. जिला अस्पताल में अनअमता रोजाना फिजियोथेरेपी करा रही है. हादसे में उनके टिविया एवं फ्यूबला दोनों ब्रेक हो गई थी. रॉड डालने के बाद नी ज्वाइंट स्टफ हो गया. फिजियोथेरेपी से अब 70 फीसदी राहत उन्हें मिल गई है. इसके अलावा नार्मल डिलीवरी का रुझान रखने वाली गर्भवती महिलाओं में फिजियोथेरेपी का रुझान बढ़ा है. पेलविस एक्सरसाइज गर्भवती महिलाओं के लिए कारगर है. गर्भावस्था के दौरान सीटिंग पोजीशन के साथ बटरफ्लाई एक्सरसाइज काफी कारगर है. डॉ. इलियास ने बताया कि गर्भवती में यूट्रस के सख्त होने की समस्या पर भी फिजियोथेरेपी कारगर बन रही है.

गर्भावस्था के दौरान फिजियोथेरेपी से शरीर में होने वाले बदलाव जैसे वजन बढ़ना, हारमोंस का बदलना, मांसपेशियों का ढीला पड़ना इत्यादि को सहन करने की ताकत मिलती है. व्यायाम से पीठ दर्द और पाचन जैसी शिकायतों से भी राहत मिलती है. इसके अलावा नार्मल डिलीवरी की संभावनाएं बढ़ जाती हैं. फिजियोथेरेपी से केवल गर्भवती महिला ही नहीं गर्भस्थ शिशु को भी फायदा मिलता है.

- डॉ. नीतू वर्मा, स्त्रत्त्ी एवं प्रसूति रोग व बांझपन रोग विशेषज्ञ, जिला महिला चिकित्सालय

फिजियोथेरेपी का बड़ा और अहम रोल है. बोन फैक्चर में मशल्स स्ट्रेंथ विक हो जाती हैं. प्रोलांग्ड इमोबोलाइजेशन की वजह से मशल्स स्ट्रेंथ रिगेन करने के लिए फिजियोथेरेपी जरूरी है. आज के समय में एक्सीडेंटल केस में 100 प्रतिशत मामले फिजियोथेरेपिस्ट के पास भेजे जा रहे हैं. मशल्थ स्ट्रेंथ रिगेन करने के साथ ही स्टिफनेस अवाइड करने के लिए भी फिजियोथेरेपी जरूरी है. फिजियोथेरेपिस्ट रोजाना मोटीवेट कर एक सकारात्मक रिजल्ट भी देता है. - डॉ. शोभित, एमएस आर्थो, जिला अस्पताल

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