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वाराणसी में गंगा का जलस्तर 63.76 मीटर पर स्थिर, निचले इलाकों में बढ़ी चिंता

वाराणसी। गंगा नदी के जलस्तर को लेकर वाराणसी में सोमवार को स्थिति स्थिर बनी रही। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 10 अगस्त की सुबह आठ बजे तक वाराणसी में गंगा का जलस्तर 63.76 मीटर दर्ज किया गया। पिछले 24 घंटे के दौरान जलस्तर में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि, जलस्तर का स्थिर रहना पूरी तरह राहत की स्थिति नहीं माना जा रहा है, क्योंकि नदी में पीछे से पानी का प्रवाह बना हुआ है और निचले इलाकों में पानी भरने का असर जलस्तर पर पड़ रहा है।
गंगा के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से तटवर्ती और निचले क्षेत्रों में स्थिति की निगरानी की जा रही है। जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी की स्थिति को देखते हुए संवेदनशील इलाकों में सतर्कता बरतने की जरूरत बनी हुई है।
63.76 मीटर पर स्थिर रहा जलस्तर
केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक सोमवार सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 63.76 मीटर दर्ज किया गया। बीते 24 घंटे में जलस्तर स्थिर रहा। सामान्य तौर पर नदी का जलस्तर स्थिर होना राहत की बात मानी जा सकती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में इसे पूरी तरह सामान्य स्थिति नहीं माना जा रहा है।
जानकारों के मुताबिक पीछे से लगातार पानी आने के बावजूद यदि नदी का जलस्तर तेजी से नहीं बढ़ रहा है तो इसका एक कारण निचले क्षेत्रों में पानी का फैलाव भी हो सकता है। इससे नदी का जलस्तर कुछ समय के लिए स्थिर दिखाई दे सकता है।
निचले इलाकों में पानी भरने से बढ़ी चिंता
गंगा के आसपास के निचले क्षेत्रों में पानी का फैलाव स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। जलस्तर बढ़ने पर सबसे पहले नदी के किनारे बसे निचले इलाकों और घाटों के आसपास प्रभाव दिखाई देता है।
पानी का फैलाव बढ़ने से ग्रामीण और तटवर्ती क्षेत्रों में आवागमन प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा खेतों में पानी पहुंचने से फसलों पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।
स्थानीय स्तर पर लोगों को नदी के किनारे जाने से सावधान रहने और जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी जा सकती है।
लगातार निगरानी जरूरी
गंगा के जलस्तर में फिलहाल स्थिरता जरूर है, लेकिन पीछे से पानी आने की स्थिति को देखते हुए प्रशासन के सामने निगरानी बनाए रखने की चुनौती है। नदी का जलस्तर मौसम और ऊपरी क्षेत्रों में होने वाली बारिश के आधार पर तेजी से बदल सकता है।
ऐसे में केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के साथ स्थानीय प्रशासन की ओर से भी नदी के जलस्तर पर नजर रखी जा रही है। संवेदनशील क्षेत्रों में किसी भी संभावित बदलाव की स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए प्रशासन को तैयार रहना होगा।
घाटों पर भी असर
गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी होने पर वाराणसी के घाटों पर भी इसका असर देखने को मिलता है। निचले हिस्से के कई घाटों पर पानी पहुंचने से सीढ़ियों का बड़ा हिस्सा जलमग्न हो सकता है। इससे घाटों पर होने वाली नियमित गतिविधियां प्रभावित होती हैं।
नदी का पानी बढ़ने के साथ नाव संचालन और स्नान जैसी गतिविधियों में भी सावधानी बरतने की जरूरत होती है। जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी होने पर नाविकों और श्रद्धालुओं के लिए जोखिम बढ़ सकता है।
जलस्तर स्थिर, लेकिन खतरा टला नहीं
सोमवार को गंगा का जलस्तर 63.76 मीटर पर स्थिर रहने से फिलहाल तेजी से बढ़ते जलस्तर वाली स्थिति नहीं है। हालांकि, पीछे से पानी आने और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति को देखते हुए खतरा पूरी तरह टला नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार नदी के जलस्तर की वास्तविक स्थिति को समझने के लिए केवल एक समय के आंकड़े को देखना पर्याप्त नहीं है। जलस्तर में लगातार हो रहे बदलाव, ऊपर से आने वाले पानी और स्थानीय जलभराव की स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
नदी के किनारे रहने वाले लोगों के लिए इस समय सतर्क रहना जरूरी है। प्रशासन की ओर से लोगों को जलभराव वाले क्षेत्रों और तेज बहाव वाले स्थानों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।
खासकर बच्चों को नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों के पास नहीं जाने देना चाहिए। ग्रामीण इलाकों में पशुओं को भी नदी के किनारे ले जाने से बचना जरूरी है।
प्रशासन के सामने चुनौती
वाराणसी में गंगा का जलस्तर स्थिर रहने के बावजूद प्रशासन के सामने चुनौती बनी हुई है कि निचले इलाकों में पानी के फैलाव पर नजर रखी जाए और जरूरत पड़ने पर राहत एवं बचाव व्यवस्था सक्रिय की जाए।
फिलहाल केंद्रीय जल आयोग के अनुसार 10 अगस्त की सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 63.76 मीटर है और पिछले 24 घंटे में इसमें बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। आने वाले घंटों में जलस्तर किस दिशा में जाता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। यदि पीछे से पानी का प्रवाह बढ़ता है तो वाराणसी के तटवर्ती और निचले क्षेत्रों में स्थिति बदल सकती है।
ऐसे में फिलहाल स्थिर जलस्तर से राहत जरूर है, लेकिन इसे खतरे के पूरी तरह टल जाने का संकेत नहीं माना जा सकता। प्रशासन और स्थानीय लोगों को लगातार सतर्क रहने की जरूरत है।





