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गढ़मुक्तेश्वर में गंगा का जलस्तर बढ़ा, पांच दिन में 40 सेंटीमीटर उछाल; गांवों में घुसा पानी

गढ़मुक्तेश्वर। पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश और हरिद्वार तथा बिजनौर बैराज से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण गंगा नदी के जलस्तर में तेजी से वृद्धि हो रही है। पिछले पांच दिनों में गंगा का जलस्तर करीब 40 सेंटीमीटर बढ़ गया है। जलस्तर बढ़ने से गंगा खादर क्षेत्र में जलभराव की स्थिति बन गई है और तटवर्ती गांवों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर खेतों और ग्रामीण संपर्क मार्गों पर भी दिखाई देने लगा है। कई स्थानों पर पानी आबादी के नजदीक पहुंच गया है, जबकि चक लठीरा समेत कुछ गांवों में सड़क पर गंगा का पानी बहने लगा है। प्रशासन और सिंचाई विभाग की ओर से जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
पांच दिन में 40 सेंटीमीटर बढ़ा जलस्तर
गढ़मुक्तेश्वर में पांच दिन पहले गंगा का जलस्तर करीब 198.50 मीटर के आसपास था। इसके बाद पहाड़ों पर लगातार बारिश और बैराजों से पानी छोड़े जाने के कारण नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता गया।
जलस्तर बढ़ने के साथ ही गंगा किनारे स्थित खादर क्षेत्र की हजारों बीघा जमीन में पानी भर गया। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। खादर क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान खेती करते हैं और नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि होने पर खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान की आशंका रहती है।
ग्रामीणों के मुताबिक, नदी का पानी तेजी से आसपास के क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है। यदि जलस्तर में इसी तरह वृद्धि जारी रही तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
येलो अलर्ट का निशान पार
शुक्रवार को गंगा का जलस्तर येलो अलर्ट के निशान 198.75 मीटर को पार कर गया। इसके बाद शनिवार को भी नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता रहा।
शनिवार को गंगा खतरे के निशान 199.00 मीटर से महज आठ सेंटीमीटर नीचे बह रही थी। इस स्थिति ने तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
जलस्तर में लगातार वृद्धि को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासन की निगरानी बढ़ाई गई है। नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
चक लठीरा में सड़क पर बह रहा पानी
गंगा का पानी कई गांवों के आसपास पहुंच चुका है। चक लठीरा गांव में पानी सड़क पर बहने लगा है। इससे ग्रामीणों के आवागमन में परेशानी शुरू हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी का स्तर और बढ़ा तो गांवों के संपर्क मार्ग प्रभावित हो सकते हैं। खेतों में पहले से पानी जमा होने के कारण कृषि कार्य भी प्रभावित हो रहा है।
खादर क्षेत्र में जलभराव बढ़ने से ग्रामीणों को पशुओं के लिए चारे और आवागमन की चिंता भी सताने लगी है। निचले इलाकों में रहने वाले परिवार नदी के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
बैराजों से छोड़े जा रहे पानी का असर
गंगा के जलस्तर में वृद्धि के पीछे पहाड़ों में हो रही बारिश के साथ-साथ हरिद्वार और बिजनौर बैराज से छोड़ा जा रहा पानी भी प्रमुख कारण माना जा रहा है। ऊपरी क्षेत्रों से पानी आने के कारण नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
लगातार बारिश होने की स्थिति में आने वाले दिनों में गंगा के जलस्तर में और वृद्धि होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में तटवर्ती क्षेत्रों में प्रशासन को विशेष सतर्कता बरतनी पड़ रही है।
किसानों की बढ़ी चिंता
गंगा खादर क्षेत्र में हजारों बीघा कृषि भूमि जलमग्न होने से किसानों को फसल खराब होने का डर सताने लगा है। खेतों में पानी भरने से धान और अन्य फसलों पर असर पड़ सकता है।
किसानों का कहना है कि नदी के जलस्तर में अचानक हुई वृद्धि से उनकी मेहनत पर संकट खड़ा हो गया है। यदि पानी लंबे समय तक खेतों में जमा रहा तो फसलों को भारी नुकसान हो सकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से जलस्तर की स्थिति की लगातार जानकारी उपलब्ध कराने और जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों में राहत व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
प्रशासन की बढ़ी निगरानी
गंगा के जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए प्रशासन और संबंधित विभागों ने निगरानी बढ़ा दी है। नदी के किनारे और खादर क्षेत्र में स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
ग्रामीणों को नदी के नजदीक जाने से बचने और जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने की सलाह दी जा रही है। प्रशासन की ओर से निचले इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है।
खतरे के निशान के करीब पहुंची गंगा
शनिवार को गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से महज आठ सेंटीमीटर नीचे रह जाना स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। पांच दिनों में करीब 40 सेंटीमीटर की वृद्धि के बाद अब सभी की नजर नदी के अगले जलस्तर पर है।
यदि पहाड़ों में बारिश जारी रहती है और बैराजों से पानी छोड़े जाने का सिलसिला बना रहता है, तो गंगा का जलस्तर और बढ़ सकता है। ऐसे में तटवर्ती गांवों और खादर क्षेत्र के लोगों की मुश्किलें बढ़ने की आशंका है।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता जलस्तर पर लगातार नजर रखने, ग्रामीणों को सतर्क करने और संभावित बाढ़ की स्थिति में समय रहते आवश्यक कदम उठाने की है। गंगा के बढ़ते जलस्तर ने क्षेत्र में एक बार फिर बाढ़ की आशंका को लेकर चिंता बढ़ा दी है।





