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वाराणसी में फिर उफान पर गंगा, जलस्तर 68.25 मीटर पहुंचा, नाव संचालन पर रोक

वाराणसी। गंगा एक बार फिर उफान पर है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 29 सितंबर को दोपहर 12 बजे तक गंगा का जलस्तर 68.25 मीटर दर्ज किया गया। नदी में प्रति घंटे करीब तीन सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ाव जारी है। तेजी से बढ़ते पानी के कारण घाटों पर एक बार फिर बाढ़ जैसी स्थिति बनने लगी है और प्रशासन ने पहले से लागू नाव संचालन पर रोक को जारी रखा है।
गंगा का जलस्तर कुछ दिन पहले कम हुआ था, जिससे घाटों पर जमा पानी धीरे-धीरे पीछे हटने लगा था। दशाश्वमेध घाट स्थित जल पुलिस चौकी से भी पानी निकल चुका था। लेकिन अब नदी में दोबारा बढ़ाव शुरू होने के बाद हालात तेजी से बदल रहे हैं।
गंगा का पानी एक बार फिर जल पुलिस चौकी की दीवार तक पहुंच गया है। इससे स्पष्ट है कि जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और घाटों के निचले हिस्से फिर से जलमग्न होने लगे हैं।
शीतला माता मंदिर में भी गंगा का पानी प्रवेश कर गया है। घाटों के आसपास रहने वाले लोगों और दुकानदारों में बढ़ते जलस्तर को लेकर चिंता बढ़ गई है। नदी का पानी जैसे-जैसे ऊपर चढ़ रहा है, वैसे-वैसे घाटों पर लोगों की आवाजाही भी सीमित होती जा रही है।
प्रशासन ने बाढ़ की आशंका को देखते हुए एनडीआरएफ और जल पुलिस को अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए हैं। संबंधित टीमों को घाटों और नदी किनारे के इलाकों पर लगातार नजर रखने को कहा गया है।
नाव संचालन पर पहले से ही रोक लगी हुई है। बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव को देखते हुए यह पाबंदी फिलहाल जारी रखी गई है। प्रशासन का मानना है कि ऐसे समय में नाव संचालन यात्रियों और नाविकों दोनों के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। लोगों को गंगा के किनारे अधिक नीचे जाने से बचने की सलाह दी जा रही है। खासकर उन घाटों पर सतर्कता बढ़ाई गई है जहां पानी तेजी से सीढ़ियों को पार करता हुआ ऊपर आ रहा है।
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर धार्मिक गतिविधियों पर भी दिखाई देने लगा है। वाराणसी के घाटों पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्नान, पूजा और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए पहुंचते हैं। लेकिन पानी बढ़ने से कई स्थानों पर सुरक्षित पहुंच मुश्किल हो रही है।
शीतला माता मंदिर में पानी प्रवेश करने से आसपास के क्षेत्र में भी बाढ़ का असर स्पष्ट दिखाई देने लगा है। मंदिर और घाट से जुड़े लोगों को अब जलस्तर पर लगातार नजर रखनी पड़ रही है।
दशाश्वमेध घाट वाराणसी के सबसे प्रमुख घाटों में से एक है। यहां जल पुलिस की चौकी भी नदी की गतिविधियों और नाव संचालन की निगरानी के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। चौकी की दीवार तक पानी पहुंचना जलस्तर में तेज बढ़ोतरी का संकेत माना जा रहा है।
केंद्रीय जल आयोग गंगा के जलस्तर की लगातार निगरानी कर रहा है। दोपहर 12 बजे तक 68.25 मीटर के स्तर पर पहुंची गंगा में प्रति घंटे तीन सेंटीमीटर का बढ़ाव दर्ज किया गया है। यदि यही रफ्तार बनी रहती है तो आने वाले घंटों में घाटों पर पानी और ऊपर जा सकता है।
हालांकि जलस्तर आगे कितनी तेजी से बढ़ेगा, यह ऊपरी क्षेत्रों में बारिश और नदी में आने वाले पानी पर निर्भर करेगा। प्रशासन ने इसी वजह से किसी भी स्थिति से निपटने के लिए संबंधित एजेंसियों को तैयार रहने को कहा है।
एनडीआरएफ की टीमों को संभावित आपात स्थिति के लिए सतर्क रखा गया है। जरूरत पड़ने पर नदी किनारे के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मदद, बचाव और सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम किया जा सकता है।
जल पुलिस को भी घाटों पर नियमित निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। नाव संचालन पर लगी रोक का पालन कराने और श्रद्धालुओं को खतरनाक स्थानों से दूर रखने की जिम्मेदारी भी जल पुलिस पर है।
गंगा के बढ़ते पानी के कारण छोटे घाटों और निचली सीढ़ियों पर सबसे पहले असर दिखाई देता है। पानी बढ़ने पर कई घाटों का संपर्क भी आपस में टूटने लगता है और लोगों को ऊपरी मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ता है।
घाटों के आसपास छोटे दुकानदारों और पूजा सामग्री बेचने वालों पर भी इसका असर पड़ सकता है। जलस्तर बढ़ने के साथ उन्हें अपने सामान को ऊंचे स्थानों पर ले जाना पड़ता है।
वाराणसी में गंगा का बढ़ाव केवल धार्मिक गतिविधियों को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि नदी किनारे रहने वाले लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी सीधा असर डालता है। कई परिवार घाटों और निचले इलाकों के आसपास रहते हैं, जिन्हें हर बढ़ते जलस्तर के साथ सतर्क रहना पड़ता है।
प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि वे नदी के बढ़ते पानी को देखने के लिए खतरनाक स्थानों पर न जाएं। तेज धारा और जलस्तर में लगातार बदलाव के कारण घाटों की सीढ़ियां फिसलन भरी हो सकती हैं।
नाविकों को भी बिना अनुमति नाव चलाने से बचने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ की स्थिति में तेज बहाव के कारण नावों को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है।
गंगा में बढ़ाव की खबर के बाद स्थानीय प्रशासन ने नदी किनारे के संवेदनशील इलाकों की निगरानी तेज कर दी है। जलस्तर में होने वाले प्रत्येक बदलाव की जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जा रही है।
घाटों के साथ-साथ उन क्षेत्रों पर भी नजर रखी जा रही है जहां पिछले दिनों पानी उतरने के बाद स्थिति सामान्य होने लगी थी। अब दोबारा बढ़ाव से इन इलाकों में फिर पानी पहुंचने का खतरा बढ़ गया है।
फिलहाल गंगा 68.25 मीटर के स्तर पर बह रही है और प्रति घंटे तीन सेंटीमीटर की रफ्तार से बढ़ रही है। अगर यह बढ़ाव जारी रहा तो घाटों के और हिस्से पानी में डूब सकते हैं।
प्रशासन ने एनडीआरएफ और जल पुलिस को अलर्ट मोड में रखते हुए किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने को कहा है। नाव संचालन पर रोक जारी है और घाटों पर लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जा रही है।
वाराणसी में गंगा के दोबारा उफान पर आने से साफ है कि बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। जलस्तर की रफ्तार को देखते हुए अगले कुछ घंटे महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं और प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।





