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गंगा उफान पर, चार सेंटीमीटर प्रति घंटे बढ़ रहा जलस्तर; तटवर्ती इलाकों में बढ़ी चिंता

वाराणसी। पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश का असर अब गंगा नदी के जलस्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। बारिश के कारण गंगा की लहरों में तेजी आई है और कई इलाकों में नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। कुछ स्थानों पर गंगा चेतावनी बिंदु के करीब पहुंच गई है, जिससे तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
जलस्तर में लगातार हो रही वृद्धि को देखते हुए प्रशासन और स्थानीय लोग स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। आशंका जताई जा रही है कि यदि जलस्तर बढ़ने की यही रफ्तार जारी रही तो निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
चार सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा पानी
मौजूदा स्थिति के अनुसार गंगा का जलस्तर सामान्य जलस्तर 59.906 मीटर से ऊपर बह रहा है। हालांकि अभी यह चेतावनी बिंदु से नीचे है, लेकिन पिछले कुछ घंटों से नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है।
जानकारी के मुताबिक, गंगा का पानी करीब चार सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। अगर वृद्धि की यही गति बनी रही तो जल्द ही नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु के करीब पहुंच सकता है।
जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी ने प्रशासन को भी सतर्क कर दिया है। नदी किनारे बसे इलाकों में स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
पहाड़ों और मैदानों की बारिश का असर
गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने की मुख्य वजह पहाड़ी क्षेत्रों और मैदानी इलाकों में हो रही लगातार बारिश को माना जा रहा है।
ऊपरी क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण नदियों में पानी की आवक बढ़ जाती है, जिसका सीधा असर गंगा के जलस्तर पर पड़ता है। इसके अलावा मैदानी क्षेत्रों में हो रही बारिश से भी नदी में पानी बढ़ रहा है।
बारिश का सिलसिला जारी रहने पर आने वाले दिनों में गंगा के जलस्तर में और बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
तटवर्ती इलाकों में बढ़ी परेशानी
गंगा का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। खासकर निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को बाढ़ का खतरा सताने लगा है।
यदि पानी और बढ़ता है तो खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। इसके अलावा पशुओं के लिए हरे चारे की उपलब्धता पर भी असर पड़ने की आशंका है।
किसानों का कहना है कि अगर गंगा का पानी खेतों तक पहुंचा तो फसल खराब होने का खतरा बढ़ जाएगा और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
फसलों पर मंडराया खतरा
गंगा के बढ़ते जलस्तर का सबसे अधिक असर नदी किनारे स्थित कृषि क्षेत्रों पर पड़ता है। निचले इलाकों में पानी भरने से धान, सब्जियों और अन्य फसलों को नुकसान हो सकता है।
इसके अलावा पशुपालकों के सामने भी चारे की समस्या खड़ी हो सकती है। बाढ़ की स्थिति में हरे चारे वाले क्षेत्रों में पानी भर जाने से पशुओं के लिए भोजन की व्यवस्था करना मुश्किल हो जाता है।
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर निगरानी बढ़ा दी गई है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
अधिकारियों की ओर से जलस्तर की लगातार निगरानी की जा रही है और संभावित खतरे वाले क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है।
जरूरत पड़ने पर राहत और बचाव कार्य शुरू करने की तैयारी भी की जा रही है।
चेतावनी बिंदु के करीब पहुंचने की आशंका
फिलहाल गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से नीचे है, लेकिन बढ़ने की रफ्तार को देखते हुए खतरा बढ़ सकता है।
नदी विशेषज्ञों के अनुसार, जलस्तर में लगातार वृद्धि होने पर सबसे पहले नदी के आसपास के निचले इलाकों में प्रभाव दिखाई देता है।
इसलिए लोगों को नदी के किनारे जाने से बचने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
प्रशासन ने तटवर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन से संपर्क करें।
फिलहाल गंगा के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। आने वाले कुछ घंटों में नदी का रुख किस ओर जाता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।





