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Ganga कटान प्रभावित गांवों में खतरा, करोड़ों खर्च के बाद भी समाधान अधूरा

Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: गंगा नदी के कटान से प्रभावित गोपालपुर, दूबेछपरा, उदई छपरा सहित कई गांवों में स्थिति अब भी गंभीर बनी हुई है। पिछले एक दशक में इन गांवों को बचाने के लिए लगभग 75 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से कटानरोधी कार्य कराए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद करीब 1.2 किलोमीटर के दायरे में बाढ़ के दौरान कटान का खतरा अब भी बना हुआ है। इससे स्थानीय लोगों में लगातार चिंता और असुरक्षा की भावना बनी हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार हर वर्ष बाढ़ के समय गंगा का दबाव बढ़ने पर स्थिति और गंभीर हो जाती है। पानी का स्तर बढ़ते ही कटान तेज हो जाता है और कई बार गांवों के नजदीक तक पानी पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में लोग अपने घरों को खाली कर सड़क किनारे या सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हो जाते हैं।
वर्ष 2016 से लेकर अब तक इस क्षेत्र में कई चरणों में कटान रोकने के लिए परियोजनाएं चलाई गई हैं। प्रशासन और संबंधित विभागों द्वारा समय-समय पर तटबंध निर्माण, पत्थरबंदी और अन्य सुरक्षा उपाय किए गए, ताकि गंगा के बढ़ते दबाव को रोका जा सके। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि ये प्रयास अस्थायी साबित हो रहे हैं और हर साल समस्या दोबारा सामने आ जाती है।
गांवों के निवासियों का कहना है कि सरकार की ओर से हर वर्ष काम तो किया जाता है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है। कटान प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को हमेशा डर बना रहता है कि कब नदी का रुख बदल जाए और उनका घर या जमीन इसकी चपेट में आ जाए। कई परिवारों ने तो सुरक्षित स्थानों पर जाने की तैयारी भी पहले से कर रखी है।
विशेषज्ञों के अनुसार गंगा नदी का प्राकृतिक प्रवाह और बाढ़ के समय पानी का तेज बहाव इस क्षेत्र में कटान को और बढ़ा देता है। लगातार हो रहे भू-क्षरण के कारण नदी का किनारा कमजोर हो रहा है, जिससे हर साल नए हिस्से प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए, ताकि उन्हें हर वर्ष बाढ़ के समय विस्थापन का दर्द न झेलना पड़े। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि स्थिति जस की तस बनी रहती है, तो परियोजनाओं की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
स्थानीय प्रशासन की ओर से भी माना गया है कि यह क्षेत्र संवेदनशील है और यहां निरंतर निगरानी की आवश्यकता है। अधिकारियों का कहना है कि आगे की योजनाओं में अधिक मजबूत और दीर्घकालिक उपायों पर ध्यान दिया जाएगा, ताकि कटान को प्रभावी रूप से रोका जा सके।
इस प्रकार, गंगा कटान से प्रभावित गांवों में करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी है और स्थानीय लोग अब भी हर वर्ष बाढ़ के खतरे के बीच जीवन यापन करने को मजबूर हैं।





