उत्तर प्रदेश

कल्याणपुर में फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश, तीन गिरफ्तार

Kavita2
17 July 2026 3:33 PM IST
कल्याणपुर में फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश, तीन गिरफ्तार
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कल्याणपुर: कानपुर के कल्याणपुर क्षेत्र में क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपितों के पास से विधायक की मोहर, बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज, कंप्यूटर उपकरण, प्रिंटर और नकदी समेत कई महत्वपूर्ण सामान बरामद किए हैं।

पुलिस के अनुसार, आरोपित एक कैफे की आड़ में ऑनलाइन माध्यम से लोगों के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे। गिरोह आय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड समेत अन्य सरकारी दस्तावेजों में हेरफेर कर लोगों को उपलब्ध कराता था। इसके बदले आरोपित लोगों से मोटी रकम वसूलते थे।

क्राइम ब्रांच और पुलिस को काफी समय से क्षेत्र में फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह के सक्रिय होने की जानकारी मिल रही थी। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने जांच शुरू की और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी। जांच के दौरान पता चला कि कल्याणपुर क्षेत्र में संचालित एक कैफे से फर्जी दस्तावेज बनाने का काम किया जा रहा है।

इसके बाद पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए कैफे पर छापा मारा और तीन आरोपितों को मौके से गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान पुलिस को कई चौंकाने वाली चीजें मिलीं। आरोपितों के पास से विधायक की मोहर के अलावा सैकड़ों की संख्या में दस्तावेज, फर्जी प्रमाण पत्र बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण और नकदी बरामद की गई।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपित ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया और डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग कर फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करते थे। वे सरकारी वेबसाइटों और दस्तावेजों की प्रक्रिया की जानकारी का गलत इस्तेमाल करते हुए नकली दस्तावेज तैयार कर लोगों को उपलब्ध कराते थे।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह लंबे समय से इस काम में सक्रिय था। आरोपितों ने कितने लोगों को फर्जी दस्तावेज उपलब्ध कराए हैं और इससे कितनी रकम की ठगी की गई है, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।

पुलिस अब आरोपितों से पूछताछ कर गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश में जुट गई है। अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क में और भी लोग शामिल हो सकते हैं, जिनकी भूमिका की जांच की जा रही है।

बरामद की गई विधायक की मोहर को लेकर भी पुलिस गंभीरता से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि मोहर असली थी या उसकी नकल तैयार की गई थी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या किसी जनप्रतिनिधि के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को धोखा दिया गया।

अधिकारियों ने बताया कि फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कई सरकारी योजनाओं, नौकरी, प्रवेश और अन्य जरूरी कामों में किया जा सकता है। ऐसे में इस तरह के गिरोहों पर कार्रवाई करना बेहद जरूरी है।

पुलिस ने लोगों से भी अपील की है कि वे प्रमाण पत्र और अन्य सरकारी दस्तावेज बनवाने के लिए अधिकृत माध्यमों का ही इस्तेमाल करें। किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या संस्था के माध्यम से दस्तावेज बनवाने से बचें, क्योंकि इससे कानूनी परेशानी हो सकती है।

गिरफ्तार आरोपितों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस आरोपितों के पुराने रिकॉर्ड और उनके संपर्कों की भी जांच कर रही है।

यह कार्रवाई साइबर अपराध और दस्तावेजों की जालसाजी के खिलाफ पुलिस की बड़ी सफलता मानी जा रही है। ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह भी सक्रिय हो रहे हैं, जिसके चलते पुलिस ऐसे मामलों में निगरानी बढ़ा रही है।

फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और उम्मीद है कि पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके नेटवर्क से जुड़े कई अहम खुलासे हो सकते हैं।

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