उत्तर प्रदेश

मिलावटखोरों पर FSDA का शिकंजा, 54 क्विंटल सामान जब्त, 27 लाइसेंस सस्पेंड

Rajeshwari Nishad
3 Nov 2026 9:50 PM IST
मिलावटखोरों पर FSDA का शिकंजा, 54 क्विंटल सामान जब्त, 27 लाइसेंस सस्पेंड
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लखनऊ। दीपावली और भाई दूज के त्योहार से पहले उत्तर प्रदेश में खाद्य पदार्थों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने मिलावटखोरों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है। प्रदेशभर में चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत अब तक 1,133 खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया है। इस दौरान 935 खाद्य नमूने एकत्र किए गए, जबकि करीब 54 क्विंटल खाद्य पदार्थ जब्त किए गए हैं। जब्त सामग्री की अनुमानित कीमत 1.32 करोड़ रुपये बताई गई है। इसके अलावा गंभीर अनियमितताएं मिलने पर 27 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं। विभाग की इस कार्रवाई से खाद्य कारोबारियों में हलचल मच गई है।
त्योहारी सीजन में मिठाई, खोया, पनीर, दूध, घी, तेल और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग तेजी से बढ़ जाती है। इसी बढ़ती मांग के बीच मिलावटी और घटिया खाद्य सामग्री बाजार में पहुंचने की आशंका भी बढ़ जाती है। इसे देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने और संदिग्ध प्रतिष्ठानों की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
एफएसडीए ने इस अभियान को 'शुद्ध ही शुभ है' नाम दिया है। इसका मुख्य उद्देश्य दीपावली और भाई दूज के दौरान आम जनता को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है। विभाग ने 26 अक्टूबर से 3 नवंबर के बीच प्रदेश के विभिन्न जिलों में निरीक्षण और नमूना संग्रह की कार्रवाई की है।अभियान के तहत मिठाई की दुकानों, खाद्य निर्माण इकाइयों, गोदामों और खाद्य सामग्री बेचने वाले अन्य प्रतिष्ठानों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का विशेष ध्यान उन स्थानों पर है, जहां बड़ी मात्रा में मिठाइयां तैयार की जाती हैं या त्योहार के मद्देनजर खाद्य पदार्थों का भंडारण किया जाता है।
विभाग की कार्रवाई के दौरान कई प्रतिष्ठानों में खाद्य सुरक्षा मानकों से जुड़ी अनियमितताएं सामने आई हैं। कहीं साफ-सफाई की व्यवस्था संतोषजनक नहीं मिली, तो कहीं खाद्य सामग्री के रखरखाव और निर्माण की परिस्थितियों पर सवाल उठे। गंभीर कमियों के मामलों में विभाग ने संबंधित प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई की है।अधिकारियों के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य केवल मिलावटी खाद्य पदार्थों को जब्त करना नहीं, बल्कि खाद्य कारोबारियों को निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करने के लिए जवाबदेह बनाना भी है। विभाग चाहता है कि त्योहारों के दौरान ग्राहकों को मिलने वाली मिठाइयां और अन्य खाद्य सामग्री स्वास्थ्य के लिहाज से सुरक्षित हों।
विशेष अभियान के दौरान खाद्य सुरक्षा टीमों ने विभिन्न प्रतिष्ठानों से 935 नमूने एकत्र किए हैं। इन नमूनों की प्रयोगशाला जांच से यह स्पष्ट होगा कि संबंधित खाद्य पदार्थ निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरते हैं या नहीं।नमूने लेना और किसी खाद्य पदार्थ में मिलावट साबित होना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। इसलिए जिन प्रतिष्ठानों से नमूने लिए गए हैं, उन्हें जांच रिपोर्ट आने से पहले दोषी नहीं माना जा सकता। प्रयोगशाला रिपोर्ट में मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कारोबारियों के खिलाफ नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
इस बीच, खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमों ने उन अस्थायी इकाइयों की भी जांच तेज की है, जो त्योहार के दौरान अतिरिक्त मांग पूरी करने के लिए मिठाइयां तैयार करती हैं। ऐसी इकाइयों में पर्याप्त साफ-सफाई, सुरक्षित पानी, खाद्य सामग्री का उचित भंडारण और आवश्यक लाइसेंस की उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है।दो नवंबर को भी एफएसडीए ने प्रदेशभर में विशेष निरीक्षण अभियान चलाया था। इस दौरान करीब 49 क्विंटल संदिग्ध खाद्य सामग्री जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी। विभाग की लगातार जारी कार्रवाई से स्पष्ट है कि त्योहार नजदीक आने के साथ निरीक्षण की रफ्तार बढ़ाई गई है।
इससे पहले प्रदेश के कई जिलों में मिठाई निर्माण इकाइयों और दुकानों की जांच के दौरान गंदगी तथा खाद्य सामग्री के अनुचित रखरखाव जैसे मामले सामने आए थे। विभाग ने ऐसे मामलों में खाद्य सामग्री नष्ट कराने और लाइसेंस संबंधी कार्रवाई भी की है।त्योहारी बाजार में सबसे अधिक मांग दूध से बनी मिठाइयों की रहती है। रसगुल्ला, बर्फी, पेड़ा, कलाकंद, गुलाब जामुन और खोये से तैयार अन्य मिठाइयां बड़ी मात्रा में खरीदी जाती हैं। ऐसे में इन उत्पादों को बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले दूध, खोया, पनीर और घी की गुणवत्ता बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, गलत तरीके से तैयार या लंबे समय तक असुरक्षित परिस्थितियों में रखे गए खाद्य पदार्थ स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। विशेष रूप से दूध और खोये से बने उत्पादों को उचित तापमान पर रखना जरूरी है। खराब गुणवत्ता वाली मिठाइयों के सेवन से उल्टी, दस्त, पेट दर्द और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं।इसलिए ग्राहकों को भी मिठाई और अन्य खाद्य सामग्री खरीदते समय सावधानी बरतनी चाहिए। अत्यधिक चमकीले रंग वाली मिठाइयों, असामान्य गंध वाले उत्पादों और खुले में अस्वच्छ परिस्थितियों में रखे खाद्य पदार्थों को खरीदने से बचना चाहिए।
पैकिंग वाले खाद्य पदार्थ खरीदते समय निर्माण तिथि, उपयोग की अंतिम तिथि, सामग्री का विवरण और आवश्यक लाइसेंस संबंधी जानकारी देखना भी उपयोगी है। ग्राहकों को खरीदारी की रसीद सुरक्षित रखनी चाहिए, ताकि किसी प्रकार की शिकायत होने पर आवश्यक विवरण उपलब्ध कराया जा सके।दूसरी ओर, खाद्य कारोबारियों के लिए भी त्योहार का समय बड़ी जिम्मेदारी लेकर आता है। अधिक बिक्री के दबाव में गुणवत्ता से समझौता करना उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। खाद्य पदार्थ तैयार करने वाले कर्मचारियों की स्वच्छता, निर्माण स्थल की साफ-सफाई और कच्चे माल की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है।
एफएसडीए की कार्रवाई से उन कारोबारियों को भी संदेश मिला है, जो बिना आवश्यक अनुमति या सुरक्षा मानकों की अनदेखी करते हुए खाद्य पदार्थ तैयार और बेचते हैं। विभाग की सख्ती का उद्देश्य ऐसी गतिविधियों पर रोक लगाना है।उत्तर प्रदेश में दीपावली से पहले सामने आए ये आंकड़े खाद्य सुरक्षा अभियान के व्यापक स्तर को दर्शाते हैं। एक सप्ताह के भीतर 1,133 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण, 935 नमूनों का संग्रह और 27 लाइसेंस निलंबित किए जाना बताता है कि विभाग त्योहारों के दौरान खाद्य गुणवत्ता को लेकर विशेष निगरानी कर रहा है।अब निगाहें एकत्र किए गए नमूनों की जांच रिपोर्ट पर रहेंगी। इनसे यह स्पष्ट होगा कि कितने खाद्य पदार्थ निर्धारित मानकों के अनुरूप हैं और किन मामलों में आगे कार्रवाई की आवश्यकता है।
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