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उत्तर प्रदेश
पब्जी वाली दोस्ती पड़ी भारी, फर्जी आधार बनवाकर भारत में रह रहा था सज्जाद
nidhi
7 Oct 2026 9:02 AM IST

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बांग्लादेशी सज्जाद के संपर्कों की पड़ताल
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पकड़े गए बांग्लादेशी नागरिक मोहम्मद सज्जाद हुसैन के मामले में कई जानकारियां सामने आई हैं। ऑनलाइन गेम पब्जी के जरिए भारतीय महिला से दोस्ती, फिर प्रेम संबंध और शादी के बाद फर्जी भारतीय पहचान पत्र बनवाने के आरोपों ने मामले को गंभीर बना दिया है। सज्जाद के दो विदेशी मोबाइल नंबरों के जरिए बाहरी लोगों से संपर्क में होने की बात भी सामने आई है। हालांकि इन संपर्कों का उद्देश्य और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका अभी स्पष्ट नहीं है।
पुलिस के अनुसार, 28 वर्षीय मोहम्मद सज्जाद हुसैन मूल रूप से बांग्लादेश के चटगांव का रहने वाला है। वह वर्ष 2023 में पर्यटक वीजा पर भारत आया था। वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद भी उसके लखनऊ में रहने और भारतीय पहचान से जुड़े दस्तावेज हासिल करने का मामला सामने आया। इस सिलसिले में बाजारखाला पुलिस ने सज्जाद और एक जनसेवा केंद्र संचालक को गिरफ्तार किया है। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि सज्जाद की पहचान वर्ष 2018 में लखनऊ की एक महिला से हुई थी। दोनों पब्जी गेम खेलते थे और इसी दौरान बातचीत शुरू हुई। धीरे-धीरे दोस्ती प्रेम संबंध में बदल गई। इसके बाद सज्जाद ने भारत आने का फैसला किया।
जानकारी के अनुसार, सज्जाद 18 अगस्त 2023 को सऊदी अरब से भारत पहुंचा। यहां आने के बाद उसने लखनऊ की महिला से शादी कर ली। दोनों ने 28 अगस्त 2023 को फैजाबाद में कोर्ट मैरिज की थी। भारत में रहने के दौरान सज्जाद ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज बनवाने के लिए स्थानीय जनसेवा केंद्र संचालक मोहम्मद तलहा से संपर्क किया। आरोप है कि तलहा ने उसके लिए भारतीय निवास प्रमाणपत्र और अन्य पहचान संबंधी दस्तावेज तैयार कराने में मदद की।
जांच में एक महत्वपूर्ण विसंगति सामने आई। सज्जाद के निवास प्रमाणपत्र पर 10 अगस्त 2023 की तारीख दर्ज थी, जबकि पासपोर्ट रिकॉर्ड के अनुसार वह पहली बार 18 अगस्त 2023 को भारत आया था। इस अंतर ने दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े कर दिए।
पुलिस के मुताबिक, फर्जी दस्तावेज तैयार कराने के बदले सज्जाद ने कुल 2,900 रुपये दिए थे। इसमें 900 रुपये ऑनलाइन और 2,000 रुपये नकद भुगतान किए गए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उसका बैंक खाता भी खुलवाया गया था। मामले में दो विदेशी नंबरों से संपर्क होने की बात भी सामने आई है। हालांकि उपलब्ध पुष्ट रिपोर्टों में इन नंबरों के मालिकों, बातचीत की प्रकृति और किसी गैरकानूनी गतिविधि से उनके संबंध की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए केवल विदेशी संपर्क होने के आधार पर किसी आपराधिक नेटवर्क से जुड़े होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। पुलिस ने सज्जाद के पास से दो बांग्लादेशी पासपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और मोबाइल फोन बरामद किए हैं। इसके अलावा जनसेवा केंद्र से कंप्यूटर और दस्तावेजों की प्रतियां भी जब्त की गई हैं। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों के जरिए यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि कथित फर्जीवाड़े में अन्य लोगों की भूमिका थी या नहीं।
इस मामले में पुलिस ने सज्जाद और मोहम्मद तलहा के खिलाफ संबंधित कानूनी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। जांच एजेंसियों ने भी मामले से जुड़ी जानकारियां जुटाई हैं। फर्जी पहचान पत्र के मामले ने सरकारी दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। विशेष रूप से निवास प्रमाणपत्र के आधार पर दूसरे पहचान पत्र हासिल करने के आरोपों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
फिलहाल पुलिस के सामने सबसे अहम सवाल यह है कि सज्जाद ने भारतीय दस्तावेज किस प्रक्रिया से हासिल किए और इसमें किन लोगों ने उसकी मदद की। मामले की जांच जारी है। आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही निकलेगा।
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