उत्तर प्रदेश

ग्राम पंचायत में फर्जीवाड़े का खुलासा प्रधान और सचिव को लौटानी होगी रकम

Ratna Netam
8 Sept 2026 9:27 PM IST
ग्राम पंचायत में फर्जीवाड़े का खुलासा प्रधान और सचिव को लौटानी होगी रकम
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों में अनियमितता का एक मामला सामने आया है। आरोप है कि ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव ने बिना वास्तविक काम कराए केवल कागजों में कार्य पूरा दिखाकर सरकारी धन निकाल लिया। मामले की जांच के बाद जिलाधिकारी ने सख्त रुख अपनाते हुए संबंधित लोगों से धन की **रिकवरी के आदेश** जारी कर दिए हैं।
प्रशासन की कार्रवाई के बाद गांव स्तर पर विकास कार्यों में पारदर्शिता और जिम्मेदारी को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी धन का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कदम उठाए जाएंगे।
कागजों में पूरे दिखाए गए विकास कार्य
मामला एक ग्राम पंचायत से जुड़ा है, जहां ग्रामीणों ने विकास कार्यों में गड़बड़ी की शिकायत प्रशासन से की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि ग्राम प्रधान और सचिव ने कई ऐसे कार्यों को पूरा दिखा दिया, जो जमीन पर या तो हुए ही नहीं थे या फिर अधूरे पड़े थे।
आरोप है कि सरकारी रिकॉर्ड में काम पूरा दिखाकर भुगतान निकाल लिया गया। ग्रामीणों ने इसकी जांच की मांग की थी, जिसके बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया।
जांच में सामने आई अनियमितता
शिकायत के बाद अधिकारियों की टीम ने मौके पर पहुंचकर विकास कार्यों का सत्यापन किया। जांच के दौरान कई कार्यों में गड़बड़ी सामने आने की बात कही गई।
जांच टीम ने रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान किया। इसमें पाया गया कि कुछ कार्यों के लिए जारी धनराशि और वास्तविक स्थिति में अंतर था।
इसके बाद जांच रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी गई।
डीएम ने दिए रिकवरी के आदेश
जांच रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी ने संबंधित ग्राम प्रधान और सचिव के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
प्रशासन ने सरकारी धन की वसूली यानी रिकवरी करने का आदेश जारी किया है। इसके साथ ही जिम्मेदार लोगों से जवाब भी मांगा गया है।
अधिकारियों का कहना है कि सरकारी योजनाओं के पैसे का गलत इस्तेमाल किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पंचायतों में पारदर्शिता पर जोर
गांवों के विकास के लिए सरकार की ओर से हर साल बड़ी मात्रा में धनराशि जारी की जाती है। इसमें सड़क, नाली, आवास, पेयजल, स्वच्छता और अन्य विकास कार्य शामिल होते हैं।
इन योजनाओं का लाभ ग्रामीणों तक पहुंचाने के लिए ग्राम पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में अगर पंचायत स्तर पर ही गड़बड़ी होती है तो इसका सीधा असर ग्रामीण विकास पर पड़ता है।
ग्रामीणों की शिकायत बनी कार्रवाई का आधार
कई बार सरकारी योजनाओं में अनियमितताओं का खुलासा ग्रामीणों की शिकायतों के बाद ही होता है। इस मामले में भी ग्रामीणों ने अधिकारियों को जानकारी देकर जांच की मांग की थी।
प्रशासन का कहना है कि शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा और जांच में दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई होगी।
पहले भी सामने आते रहे हैं ऐसे मामले
ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के नाम पर फर्जी भुगतान और अनियमितताओं के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं।
कई मामलों में जांच के बाद प्रधान, सचिव और अन्य जिम्मेदार कर्मचारियों से सरकारी धन की वसूली की गई है। कुछ मामलों में विभागीय कार्रवाई भी की जाती है।
डिजिटल व्यवस्था से रोकने की कोशिश
सरकार अब पंचायतों में होने वाले विकास कार्यों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर रही है।
ऑनलाइन भुगतान, कार्यों की निगरानी और रिकॉर्ड को डिजिटल करने जैसी व्यवस्थाओं से गड़बड़ी रोकने की कोशिश की जा रही है।
हालांकि, जमीनी स्तर पर निगरानी और समय-समय पर जांच को भी जरूरी माना जाता है।
दोषियों पर होगी आगे की कार्रवाई
प्रशासन ने साफ किया है कि जांच में दोषी पाए गए लोगों को किसी भी स्थिति में राहत नहीं दी जाएगी।
अगर जांच के दौरान और भी अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ अतिरिक्त कार्रवाई की जा सकती है।
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