उत्तर प्रदेश

गोरखनाथ थाने का फर्जीवाड़ा उजागर, संदिग्ध पासपोर्टों की जांच तेज

Ratna Netam
1 Aug 2026 8:16 PM IST
गोरखनाथ थाने का फर्जीवाड़ा उजागर, संदिग्ध पासपोर्टों की जांच तेज
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उत्तर प्रदेश : गोरखपुर में फर्जी सत्यापन के जरिए पासपोर्ट जारी कराने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए निलंबित सिपाही शशिकांत यादव को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी सिपाही को शनिवार को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। जांच में सामने आया है कि गोरखनाथ थाने में तैनाती के दौरान सिपाही ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए कई लोगों के पासपोर्ट का फर्जी सत्यापन किया। पुलिस के मुताबिक, उसकी करीब दो साल की तैनाती के दौरान 22 लोगों के पासपोर्ट फर्जी पते और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर जारी कराए गए।

मामले की जांच में पुलिस और पासपोर्ट विभाग को अब तक 30 से अधिक संदिग्ध पासपोर्ट मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है। अधिकारियों को आशंका है कि जांच का दायरा बढ़ने पर फर्जीवाड़े से जुड़े कई और मामले सामने आ सकते हैं। पुलिस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस फर्जीवाड़े में और कितने लोग शामिल थे।

गिरफ्तार आरोपी सिपाही शशिकांत यादव मूल रूप से नुनहरा थाना क्षेत्र के नसिरपुरसिंह कुसुम गांव का रहने वाला है। वर्तमान में उसकी तैनाती जीआरपी में थी। पुलिस जांच के अनुसार, गोरखनाथ थाने में तैनाती के दौरान उसने पासपोर्ट सत्यापन की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं कीं। आरोप है कि उसने आवेदकों के वास्तविक निवास स्थान की जांच किए बिना ही रिपोर्ट को सही बताकर आगे भेज दिया। इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर पासपोर्ट जारी हो गए।

जांच में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें आवेदकों का दिए गए पते से कोई संबंध नहीं था। कुछ मामलों में तो सत्यापन के दौरान दिए गए पते पूरी तरह फर्जी पाए गए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पासपोर्ट जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में फर्जी सत्यापन सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर मामला है।

इस मामले का सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ, जब पंजाब के कुख्यात गैंगस्टर बिल्ला का पासपोर्ट भी गोरखनाथ क्षेत्र के एक पते पर बना पाया गया। जांच में पता चला कि गैंगस्टर बिल्ला उस पते का निवासी ही नहीं था। इसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरे प्रकरण की जांच शुरू की और कई अन्य संदिग्ध पासपोर्ट भी जांच के दायरे में आ गए।

फर्जी पासपोर्ट गिरोह का खुलासा होने के बाद पुलिस पहले ही तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। उसी दौरान तत्कालीन सिपाही शशिकांत यादव को निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई थी। अब जांच में पर्याप्त सबूत मिलने के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया है।

पूछताछ के दौरान पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फर्जी सत्यापन के बदले कितनी रकम ली जाती थी और इस पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे। पुलिस को शक है कि यह केवल कुछ लोगों का काम नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह हो सकता है। जांच एजेंसियां दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच कर रही हैं।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जिन पासपोर्टों का सत्यापन संदिग्ध पाया गया है, उनकी दोबारा जांच कराई जा रही है। यदि जांच में किसी अन्य पुलिसकर्मी, विभागीय कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बता दें कि 9 मार्च 2025 को गोरखनाथ थाना पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए पासपोर्ट बनवाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया था। पुलिस ने उस समय विशाल सिंह और हरेंद्र प्रताप को गिरफ्तार किया था। उनके कब्जे से फर्जी आधार कार्ड, बैंक दस्तावेज और मोबाइल फोन बरामद किए गए थे। जांच में सामने आया था कि आरोपी पासपोर्ट कार्यालय के आसपास सक्रिय रहकर फर्जी दस्तावेज तैयार कर लोगों के पासपोर्ट बनवाते थे। अब निलंबित सिपाही की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे मामले में नए खुलासे होने की उम्मीद है।

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