उत्तर प्रदेश

गोरखपुर में वानिकी विश्वविद्यालय का शिलान्यास टला

nidhi
5 Nov 2026 11:57 AM IST
गोरखपुर में वानिकी विश्वविद्यालय का शिलान्यास टला
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गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के पहले वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय के शिलान्यास का कार्यक्रम फिलहाल टल गया है। गोरखपुर के कैंपियरगंज क्षेत्र में प्रस्तावित इस विश्वविद्यालय का शिलान्यास 2 नवंबर 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों कराए जाने की तैयारी थी। हालांकि, निर्धारित तारीख पर कार्यक्रम आयोजित नहीं हो सका। अब मुख्यमंत्री का समय मिलने के बाद शिलान्यास की नई तारीख तय होने की उम्मीद है।
यह विश्वविद्यालय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में शामिल है। इसे गोरखपुर के कैंपियरगंज क्षेत्र के भारी बैसी में स्थापित किया जाएगा। परियोजना के निर्माण पर करीब 491 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है। विश्वविद्यालय के लिए लगभग 50 हेक्टेयर यानी 124 एकड़ जमीन प्रस्तावित की गई है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य प्रदेश में वानिकी, बागवानी, पर्यावरण संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन से जुड़ी उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना है। यहां विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक और शोध के माध्यम से वन संरक्षण तथा कृषि आधारित क्षेत्रों में विशेषज्ञता हासिल करने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 6 सितंबर 2024 को कैंपियरगंज क्षेत्र में जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र के लोकार्पण के दौरान प्रदेश के पहले वानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना की घोषणा की थी। इसके बाद परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए शासन स्तर पर प्रक्रिया शुरू की गई।
राज्य सरकार ने 7 अप्रैल 2026 को हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में उत्तर प्रदेश वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय अध्यादेश-2026 के प्रारूप को मंजूरी दी थी। सरकार के मुताबिक, विश्वविद्यालय की स्थापना से वन्यजीव संरक्षण, वृक्षारोपण, बागवानी और पर्यावरण संबंधी अनुसंधान को नई दिशा मिलेगी। प्रस्तावित विश्वविद्यालय में वानिकी एवं औद्यानिकी, वन्यजीव संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, कृषि वानिकी और बागवानी जैसे विषयों की पढ़ाई कराई जाएगी। यहां स्नातक, स्नातकोत्तर, पीएचडी और डिप्लोमा स्तर के पाठ्यक्रम संचालित करने की योजना है। इस विश्वविद्यालय से गोरखपुर के साथ-साथ पूरे पूर्वांचल के विद्यार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। अभी इन विशेष क्षेत्रों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए कई विद्यार्थियों को दूसरे राज्यों या बड़े शिक्षण संस्थानों का रुख करना पड़ता है। विश्वविद्यालय बनने के बाद उन्हें अपने क्षेत्र में ही पढ़ाई और शोध की सुविधा मिल सकेगी।
इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय की स्थापना से किसानों को भी फायदा होने की संभावना है। बागवानी, पौधों की नई किस्मों, कृषि वानिकी और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग से संबंधित अनुसंधान का लाभ स्थानीय कृषि क्षेत्र को मिल सकता है। पहले इस परियोजना को लगभग दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य बताया गया था। हालांकि, निर्माण शुरू होने की वास्तविक तारीख के आधार पर आगे की समयसीमा स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल प्रशासन की नजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आगामी कार्यक्रम पर टिकी है। नई तारीख घोषित होने के बाद शिलान्यास समारोह की तैयारियां फिर तेज होने की संभावना है।
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