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पूर्व IAS दिव्या मित्तल ने राजनीति में आने का किया ऐलान, यूपी में रहकर शुरू करेंगी नई पारी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश कैडर की पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने अपने अगले कदम को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लगा दिया है। प्रशासनिक सेवा से अचानक इस्तीफा देकर चर्चा में आईं दिव्या मित्तल ने मंगलवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो जारी कर राजनीति में आने की घोषणा की। उन्होंने साफ किया कि वह उत्तर प्रदेश में ही रहेंगी और यहीं से अपनी राजनीतिक पारी शुरू करेंगी। हालांकि वह किस राजनीतिक दल के साथ जाएंगी या स्वतंत्र राजनीतिक मंच बनाएंगी, इसे लेकर उन्होंने अभी अंतिम घोषणा नहीं की है।
दिव्या मित्तल ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वह 29 सितंबर की सुबह अपने भविष्य की योजना सार्वजनिक करेंगी। इसके बाद मंगलवार सुबह उन्होंने वीडियो जारी कर कहा कि उन्होंने उत्तर प्रदेश में रहकर लोगों के बीच काम करने और राजनीति के जरिए सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहने का फैसला किया है। उनके इस ऐलान के बाद पिछले कई सप्ताह से चल रही उन चर्चाओं पर काफी हद तक विराम लग गया, जिनमें उनके विदेश जाने, कॉरपोरेट नौकरी करने, कोचिंग शुरू करने या सक्रिय राजनीति में उतरने जैसी संभावनाएं जताई जा रही थीं।
दिव्या मित्तल ने वीडियो में कहा कि वह किसी दबाव से डरने वाली नहीं हैं। उन्होंने व्यवस्था, सरकारी जवाबदेही और आम लोगों की समस्याओं को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। उनके बयान में भाजपा से जुड़े कुछ लोगों की ओर से पहले लगाए गए आरोपों का भी जवाब दिखाई दिया। हालांकि उन्होंने किसी पार्टी में शामिल होने की आधिकारिक घोषणा नहीं की और न ही किसी खास दल को अपनी राजनीतिक मंजिल बताया।
इस्तीफे के बाद दिव्या मित्तल को लेकर एक बड़ा राजनीतिक दावा यह किया गया था कि उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की है और उसके बाद ही प्रशासनिक सेवा छोड़ने का फैसला लिया। यह दावा भाजपा से जुड़े अधिवक्ता और प्रवक्ता प्रशांत उमराव की सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए सामने आया था। उस समय इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई थी। दिव्या मित्तल ने अब इस चर्चा पर भी प्रतिक्रिया देते हुए संकेत दिया है कि उनके फैसले को किसी कथित राजनीतिक मुलाकात से जोड़कर देखना सही नहीं है।
दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को भारतीय प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा दिया था। उनका इस्तीफा बाद में स्वीकार कर लिया गया और 15 सितंबर से वह प्रशासनिक जिम्मेदारियों से पूरी तरह मुक्त हो गईं। इस्तीफे के समय उन्होंने निजी कारणों, पारिवारिक प्राथमिकताओं और जीवन के नए लक्ष्यों का उल्लेख किया था। उस समय उन्होंने तुरंत राजनीति में जाने की पुष्टि नहीं की थी।
उनके इस्तीफे के बाद से उत्तर प्रदेश की राजनीति में लगातार यह चर्चा चल रही थी कि वह 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले किसी बड़े राजनीतिक दल से जुड़ सकती हैं। सोशल मीडिया पर मिर्जापुर या देवरिया से चुनाव लड़ने तक की अटकलें लगाई गईं। खुद दिव्या मित्तल ने भी इन चर्चाओं का उल्लेख करते हुए कहा था कि लोग उनके भविष्य को लेकर तरह-तरह के अनुमान लगा रहे हैं।
दिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की आईएएस अधिकारी रही हैं। उन्होंने मिर्जापुर, देवरिया और संतकबीरनगर जैसे जिलों में जिलाधिकारी के रूप में जिम्मेदारी संभाली। प्रशासनिक सेवा के दौरान कई स्थानीय परियोजनाओं और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कामों के कारण वह चर्चा में रहीं। इस्तीफे से पहले वह उत्तर प्रदेश सरकार में राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात थीं।
अपनी नई राजनीतिक यात्रा को लेकर दिव्या मित्तल ने आम लोगों की समस्याओं को प्रमुखता देने की बात कही है। उन्होंने सरकारी दफ्तरों में जवाबदेही, ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, युवाओं के रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी समस्याओं जैसे मुद्दों का उल्लेख किया। उनका कहना है कि वह ऐसे लोगों की आवाज बनना चाहती हैं जिनकी बात व्यवस्था तक नहीं पहुंच पाती।
दिव्या मित्तल ने राजनीति में आने की घोषणा जरूर कर दी है, लेकिन अभी उन्होंने किसी मौजूदा राजनीतिक दल की सदस्यता नहीं ली है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक वह आम लोगों के साथ मिलकर एक नया राजनीतिक मंच तैयार करने के विकल्प पर भी विचार कर रही हैं। इसलिए भाजपा, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी या किसी अन्य दल से उनके जुड़ने को लेकर फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
उनकी राजनीति में एंट्री को लेकर सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि उन्होंने प्रशासनिक सेवा छोड़ने के कुछ ही सप्ताह बाद राजनीतिक रास्ता चुन लिया। दूसरी ओर, दिव्या मित्तल इसे अपने सार्वजनिक जीवन का अगला चरण बता रही हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि प्रशासनिक सेवा में रहते हुए जिन समस्याओं को उन्होंने नजदीक से देखा, अब उन्हें राजनीतिक मंच पर उठाने की कोशिश करेंगी।
भाजपा से जुड़े लोगों द्वारा उनके इस्तीफे और कथित कांग्रेस कनेक्शन को लेकर किए गए दावों पर भी अब उनका रुख सामने आ गया है। उन्होंने किसी भी तरह के दबाव से पीछे न हटने और स्वतंत्र रूप से अपनी राजनीतिक राह तय करने का संदेश दिया है। हालांकि उनके बयानों को लेकर विभिन्न राजनीतिक दल अलग-अलग प्रतिक्रिया दे सकते हैं और राजनीतिक अर्थ निकाल सकते हैं।
फिलहाल इतना साफ है कि दिव्या मित्तल ने उत्तर प्रदेश छोड़ने या किसी कॉरपोरेट नौकरी में वापस जाने के बजाय सक्रिय राजनीति का रास्ता चुना है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि वह किसी स्थापित राजनीतिक दल का हिस्सा बनेंगी या अपना अलग मंच तैयार करेंगी। इस पर उन्होंने अभी पत्ते नहीं खोले हैं। आने वाले दिनों में उनके संगठन, राजनीतिक एजेंडे और चुनावी भूमिका को लेकर तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।





