उत्तर प्रदेश

बेटे की मौत के मामले में दर्ज FIR पर बोले पूर्व DGP

SHIDDHANT
22 Oct 2025 11:09 PM IST
बेटे की मौत के मामले में दर्ज FIR पर बोले पूर्व DGP
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Uttar Pradesh. उत्तर प्रदेश। बेटे की मौत के मामले में दर्ज एफआईआर पर पूर्व डीजीपी मोहम्मद मुस्तफा ने कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी से डर नहीं है और अगर वह दोषी पाए जाते हैं, तो उन्हें फांसी दे दी जाए। मोहम्मद मुस्तफा, उनकी पत्नी, बेटी और बहू के खिलाफ हाल ही में बेटे की मौत के संबंध में एफआईआर दर्ज की गई थी। पूर्व डीजीपी ने इस मामले में कहा, “जिस व्यक्ति (शम्सुद्दीन चौधरी) ने शिकायत दी है, वह एक राजनेता का मोहरा बन चुका है। मुझे किसी का डर नहीं है। अगर आप किसी थाने में शिकायत लेकर जाते हैं, तो पुलिस की जिम्मेदारी होती है कि वह रिपोर्ट दर्ज करे। जिस एक पैराग्राफ की शिकायत उसने दी, उसे पुलिस ने एफआईआर में बदल दिया। मैं इसका स्वागत करता हूं और जांच में पूरी तरह सहयोग करूंगा।”
उन्होंने कहा कि यह मामला सियासी साजिश का हिस्सा है और कुछ लोग इस दर्दनाक घटना को राजनीति से जोड़कर उनका और उनके परिवार का नाम बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। मुस्तफा ने कहा, “एक पिता के लिए अपने बेटे को खोना सबसे बड़ा दुख होता है। लेकिन कुछ लोग इस त्रासदी का राजनीतिक फायदा उठाने में लगे हैं। मैं साफ कहता हूं—अगर मैं दोषी हूं, तो मुझे फांसी दे दी जाए। पूर्व डीजीपी ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक ताकतें उन्हें निशाना बना रही हैं क्योंकि वह हमेशा ईमानदारी और सच्चाई के पक्ष में खड़े रहे हैं। उन्होंने कहा कि बेटे की मौत की जांच निष्पक्ष रूप से होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।
बता दें कि हाल ही में उनके बेटे की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने प्रारंभिक जांच के बाद मुस्तफा और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच में जुटी है और बयान दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। इस बीच, स्थानीय राजनीतिक हलकों में भी यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। कई नेताओं ने इस घटनाक्रम को लेकर बयान दिए हैं। वहीं, मोहम्मद मुस्तफा ने दोहराया कि वह न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग करेंगे और सच्चाई को सामने आने देंगे।
मुस्तफा ने कहा, “मैंने हमेशा कानून का सम्मान किया है। अब मैं चाहता हूं कि वही कानून निष्पक्ष रूप से काम करे। जो निर्दोष हैं, उन्हें न्याय मिले और जो दोषी हैं, उन्हें सजा। इस पूरे मामले ने सहारनपुर की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है, वहीं पुलिस प्रशासन पर निष्पक्ष जांच की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई है।
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