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साइबर ठगी का विदेशी कनेक्शन उजागर, 8.37 करोड़ का लेनदेन सामने

Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश: साइबर अपराध के जरिए ठगी गई रकम को क्रिप्टो करेंसी में बदलकर चीन, लाओस और कंबोडिया जैसे देशों में भेजने वाले एक गिरोह का खुलासा हुआ है। पुलिस मुख्यालय से मिली सूचना के आधार पर गोरखपुर की रामगढ़ताल पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी ने म्यूल बैंक खातों के जरिए करीब 8 करोड़ 37 लाख रुपये के संदिग्ध लेनदेन किए हैं।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पहचान रामगढ़ताल क्षेत्र के झरवा गांव निवासी शिवम साहनी के रूप में हुई है। आरोपी पर आरोप है कि वह साइबर ठगी करने वाले गिरोह के लिए बैंक खाते उपलब्ध कराने और ठगी की रकम को आगे पहुंचाने का काम करता था।
पुलिस जांच में पता चला कि शिवम साहनी अपने साथियों के साथ मिलकर लोगों को अच्छी नौकरी और आर्थिक मदद का झांसा देता था। इसके बाद उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे और मोबाइल सिम कार्ड लिए जाते थे। इन बैंक खातों का इस्तेमाल देशभर में होने वाली साइबर ठगी की रकम जमा करने के लिए किया जाता था।
साइबर अपराध की भाषा में ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। इन खातों के जरिए ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया जाता है, जिससे असली अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आरोपी और उसके साथियों ने साइबर ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग माध्यमों से ट्रांसफर किया। इसके बाद इस पैसे को क्रिप्टो करेंसी में बदला गया और विदेशी नेटवर्क के जरिए चीन, लाओस और कंबोडिया भेजा गया।
गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है। मामले में आरोपी के दो साथियों दुर्गेश साहनी और एक अन्य व्यक्ति की तलाश की जा रही है।
पुलिस टीम विदेशी कनेक्शन की भी जांच कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि साइबर ठगी का यह नेटवर्क केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोहों से जुड़े हो सकते हैं।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपियों ने कितने बैंक खातों का इस्तेमाल किया और देशभर में कितने लोगों को इस नेटवर्क के जरिए निशाना बनाया गया।
पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधी अब ठगी की रकम को छिपाने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। पहले जहां रकम सीधे बैंक खातों में भेजी जाती थी, वहीं अब अपराधी क्रिप्टो करेंसी और डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे लेनदेन को ट्रैक करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
रामगढ़ताल पुलिस और साइबर सेल की टीम ने आरोपी के बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह भी पता कर रही है कि आरोपी ने किन-किन लोगों के नाम पर खाते खुलवाए थे और इन खातों में कितनी रकम का लेनदेन हुआ।
साइबर अपराधों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस लगातार ऐसे नेटवर्क के खिलाफ अभियान चला रही है। अधिकारियों का कहना है कि लोगों को नौकरी, लोन या आर्थिक सहायता का लालच देकर बैंक खाते खुलवाने वाले लोगों से सावधान रहना चाहिए, क्योंकि ऐसे खाते साइबर अपराध में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।
पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, मोबाइल नंबर या सिम कार्ड की जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साइबर हेल्पलाइन या नजदीकी पुलिस स्टेशन को दें।
फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ कर रही है और गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने के लिए लगातार छापेमारी कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।





