उत्तर प्रदेश

यूपी में बाढ़ का खतरा 500 से ज्यादा गांवों पर संकट

nidhi
18 Aug 2026 7:38 AM IST
यूपी में बाढ़ का खतरा 500 से ज्यादा गांवों पर संकट
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यूपी में उफान पर नदियां 500 से अधिक गांवों पर खतरा
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मानसून की बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से आ रहे पानी के कारण बाढ़ का खतरा एक बार फिर बढ़ गया है। प्रदेश की कई प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और कुछ स्थानों पर नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। हालात को देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। 500 से अधिक गांव बाढ़ के खतरे की जद में बताए जा रहे हैं।
पहाड़ों पर लगातार हो रही बारिश के साथ बैराजों से पानी छोड़े जाने का असर मैदानी इलाकों में दिखाई दे रहा है। गंगा, यमुना, सरयू और अन्य नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कई जिलों में चिंता बढ़ा दी है। नदी किनारे बसे गांवों में खेतों तक पानी पहुंचने लगा है और प्रशासन लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहा है। प्रयागराज में गंगा और यमुना के जलस्तर में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। इससे संगम क्षेत्र के साथ निचले और बाढ़ संभावित इलाकों में प्रशासन की निगरानी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों में स्थिति पर लगातार नजर रखने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखने को कहा गया है।
गोंडा में भी बाढ़ ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। ऐली परसौली समेत 23 गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने की खबर है। कई स्थानों पर तीन से चार फीट तक पानी भरने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खेतों और फसलों के जलमग्न होने से किसानों की चिंता भी बढ़ गई है। प्रभावित क्षेत्रों से कुछ लोगों को ऊंचे और सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ रहा है। बाराबंकी में सरयू नदी का जलस्तर भी चिंता बढ़ा रहा है। हाल के दिनों में नदी खतरे के निशान से ऊपर पहुंची और कई गांव पानी से घिर गए। नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क किया गया है और प्रशासन की टीमें स्थिति की निगरानी में लगी हैं।
बाढ़ के खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन को राहत और बचाव से जुड़ी तैयारियां मजबूत रखने के निर्देश दिए गए हैं। नावों, राहत सामग्री और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ संवेदनशील तटबंधों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी पहले अधिकारियों को नदियों और तटबंधों की चौबीस घंटे निगरानी तथा प्रभावित लोगों तक तेजी से सहायता पहुंचाने के निर्देश दे चुके हैं। बाढ़ की स्थिति का सबसे अधिक असर नदी किनारे बसे ग्रामीण क्षेत्रों में देखने को मिलता है। पानी बढ़ने से संपर्क मार्ग प्रभावित होने, खेतों में पानी भरने और पशुओं के लिए चारे की समस्या पैदा होने का खतरा रहता है। ऐसे में प्रशासन की प्राथमिकता लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और भोजन, पेयजल तथा स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
मौसम की स्थिति को देखते हुए आने वाले दिनों में भी नदी के जलस्तर पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। अगर पहाड़ी क्षेत्रों और उत्तर प्रदेश में तेज बारिश जारी रहती है तो नदियों में पानी और बढ़ सकता है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे उफनती नदियों, नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों के पास जाने से बचें तथा स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करें। प्रदेश में फिलहाल बाढ़ को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। 500 से अधिक गांवों पर मंडरा रहे खतरे के बीच राहत और बचाव तंत्र को तैयार रखा गया है। नदियों के जलस्तर में आगे होने वाला बदलाव ही तय करेगा कि आने वाले दिनों में स्थिति सामान्य होती है या प्रभावित क्षेत्रों में बाढ़ का संकट और गहराता है।
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