उत्तर प्रदेश

लखीमपुर में बाढ़ का कहर जारी शारदा और घाघरा के बढ़े जलस्तर से 34 गांव प्रभावित

Kavita2
6 Sept 2026 8:57 AM IST
लखीमपुर में बाढ़ का कहर जारी शारदा और घाघरा के बढ़े जलस्तर से 34 गांव प्रभावित
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उत्तर प्रदेश : लखीमपुर खीरी जिले में शारदा और घाघरा नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का संकट लगातार बना हुआ है। नदियों में लगातार पानी छोड़े जाने के बाद किनारे बसे गांवों में पानी घुस गया है। शुक्रवार को 12 और गांव बाढ़ की चपेट में आ गए, जिसके बाद जिले में बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या बढ़कर 34 हो गई है। प्रशासन की ओर से लगातार हालात पर नजर रखी जा रही है और नदी के जलस्तर की निगरानी की जा रही है।

जिले के पलिया क्षेत्र में शारदा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। वहीं, अन्य स्थानों पर भी नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। लगातार बढ़ते पानी ने नदी किनारे रहने वाले ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। कई गांवों में खेतों और रास्तों पर पानी भरने से लोगों को आवागमन में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

प्रशासन के अनुसार, नदियों में पानी का दबाव लगातार बना हुआ है, लेकिन राहत की बात यह है कि कई क्षेत्रों में पानी तेजी से निकल भी रहा है। इसके बावजूद बाढ़ प्रभावित इलाकों में सतर्कता बरती जा रही है। राजस्व विभाग और प्रशासनिक टीमें गांवों में पहुंचकर स्थिति का जायजा ले रही हैं।

शारदा और घाघरा नदियों के बढ़ते जलस्तर का सबसे ज्यादा असर नदी के किनारे बसे गांवों पर पड़ा है। ग्रामीणों के सामने घरों से बाहर निकलने, पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था और दैनिक जरूरतों को पूरा करने की चुनौती खड़ी हो गई है। कई जगहों पर ग्रामीणों को ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने राहत और बचाव व्यवस्था को सक्रिय कर दिया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रभावित गांवों में लगातार संपर्क बनाए रखें और जरूरत पड़ने पर तत्काल मदद पहुंचाई जाए। स्वास्थ्य विभाग की टीमों को भी अलर्ट रहने को कहा गया है ताकि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या आने पर तुरंत उपचार उपलब्ध कराया जा सके।

अधिकारियों का कहना है कि नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव लगातार जारी है। इसलिए प्रशासन हर घंटे स्थिति पर नजर बनाए हुए है। बांधों और बैराजों से छोड़े जा रहे पानी की जानकारी भी लगातार जुटाई जा रही है, ताकि संभावित खतरे को देखते हुए समय रहते कदम उठाए जा सकें।

ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बरसात के मौसम में नदियों के बढ़ते जलस्तर से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस बार भी पानी बढ़ने के बाद खेतों में लगी फसलें प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। कई गांवों में ग्रामीण अपने पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने में जुटे हुए हैं।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करें। साथ ही लोगों को नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है।

फिलहाल राहत की बात यह है कि कई इलाकों में पानी का स्तर कम होना शुरू हो गया है। लेकिन शारदा नदी का पलिया में खतरे के निशान से ऊपर बहना प्रशासन के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। आने वाले दिनों में बारिश और नदियों में पानी छोड़े जाने की स्थिति के आधार पर बाढ़ का असर कम या ज्यादा हो सकता है।

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रभावित गांवों में राहत कार्य जारी रहेंगे और स्थिति सामान्य होने तक निगरानी व्यवस्था को मजबूत रखा जाएगा।

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