उत्तर प्रदेश

नौ साल की बेटी की हत्या के मामले में पिता समेत पांच को उम्रकैद

Kavita2
25 Aug 2026 12:49 PM IST
नौ साल की बेटी की हत्या के मामले में पिता समेत पांच को उम्रकैद
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उत्तरप्रदेश। एक अदालत ने 2022 में नौ साल की बच्ची की बेरहमी से हत्या करने के मामले में उसके पिता समेत पांच लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने इस अपराध को बेहद क्रूर और अक्षम्य करार देते हुए सभी दोषियों पर 22-22 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, बच्ची की हत्या एक ग्रामीण को हत्या के झूठे मामले में फंसाने की कथित साजिश का हिस्सा थी।

एडिशनल सेशन जज विजय कुमार हिमांशु ने सोमवार को मामले में सभी पांच आरोपियों को दोषी ठहराने के बाद सजा सुनाई। दोषियों में बच्ची का पिता अनीस और उसके चार कथित साथी शादाब, नसीम, सलीम और शहज़ादे शामिल हैं।

अदालत ने अनीस को उसकी शेष जिंदगी तक कठोर कारावास की सजा सुनाई। उसके साथियों को भी उम्रकैद की सजा दी गई। अदालत का फैसला सामने आने के बाद मामले की भयावहता और साजिश का पहलू एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

झूठे हत्या मामले में फंसाने की साजिश

अभियोजन पक्ष के अधिकारी देवेंद्र कुमार के मुताबिक, मामले की शुरुआत एक अन्य कानूनी विवाद से हुई थी। शकील नाम के एक ग्रामीण ने अनीस और उसके भाई शादाब के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था।

अभियोजन के अनुसार, इस मामले में आरोपियों के खिलाफ वारंट जारी हो चुका था। इसके बाद अनीस और उसके साथियों ने कथित तौर पर शकील पर मामला वापस लेने के लिए दबाव बनाया। हालांकि, शकील ने केस वापस लेने से इनकार कर दिया।

अभियोजन पक्ष का कहना है कि इसके बाद आरोपियों ने शकील को एक गंभीर आपराधिक मामले में फंसाने की योजना बनाई। इसी कथित साजिश के तहत अनीस की नौ वर्षीय बेटी को निशाना बनाया गया।

बच्ची को बनाया गया कथित तौर पर मोहरा

अभियोजन के अनुसार, आरोपियों ने ग्रामीण शकील को हत्या के मामले में फंसाने के लिए बच्ची की हत्या की साजिश रची। इस साजिश में बच्ची को कथित तौर पर मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया गया।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने आरोपियों की भूमिका और घटनाक्रम से जुड़े साक्ष्य पेश किए। इन साक्ष्यों और गवाहियों पर विचार करने के बाद अदालत ने सभी पांच आरोपियों को दोषी पाया।

अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए दोषियों को कठोर सजा दी। खास तौर पर बच्ची के पिता की भूमिका को लेकर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया।

पिता की भूमिका पर अदालत सख्त

नौ साल की बच्ची की हत्या के मामले में उसके पिता का आरोपी होना इस मामले का सबसे गंभीर पहलू रहा। अदालत ने अनीस को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए उसकी शेष जिंदगी तक कठोर कारावास में रखने का आदेश दिया।

अदालत ने अपराध को बेहद क्रूर और अक्षम्य बताया। बच्ची की हत्या को एक अन्य व्यक्ति को झूठे हत्या के मामले में फंसाने की कथित योजना से जोड़कर देखा गया, जिसने मामले को और गंभीर बना दिया।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर अपने खिलाफ चल रहे दुष्कर्म मामले से बचने और शिकायतकर्ता पर दबाव बनाने के लिए यह साजिश रची थी।

केस वापस लेने से इनकार के बाद बढ़ा विवाद

अभियोजन के अनुसार, शकील द्वारा मामला वापस लेने से इनकार करने के बाद आरोपियों और उसके बीच विवाद बढ़ गया। आरोपियों पर आरोप है कि उन्होंने शकील को डराने और दबाव में लेने की कोशिश की।

जब कथित तौर पर दबाव काम नहीं आया तो उसे हत्या जैसे गंभीर अपराध में फंसाने की योजना बनाई गई। अभियोजन ने अदालत को बताया कि इसी योजना के तहत नौ वर्षीय बच्ची की हत्या की गई।

हालांकि, अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दोषी ठहराया गया और सभी पांचों को समान रूप से उम्रकैद की सजा दी गई।

प्रत्येक दोषी पर 22 हजार रुपये जुर्माना

अदालत ने सिर्फ जेल की सजा ही नहीं सुनाई, बल्कि सभी पांचों दोषियों पर 22,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। इस तरह पांचों आरोपियों पर कुल 1.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

अदालत का यह फैसला मामले में न्यायिक प्रक्रिया के महत्वपूर्ण चरण के तौर पर देखा जा रहा है। अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को गंभीर बताते हुए उनके लिए कड़ी सजा की मांग की थी।

2022 की घटना का अब आया फैसला

यह मामला वर्ष 2022 का है। घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी और मामले में कई लोगों को आरोपी बनाया गया था। जांच के दौरान कथित साजिश, बच्ची की हत्या और एक ग्रामीण को फंसाने की कोशिश से जुड़े पहलुओं की पड़ताल की गई।

मामला अदालत तक पहुंचने के बाद अभियोजन पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्य और गवाहों के बयान पेश किए। लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद सोमवार को अदालत ने अपना फैसला सुनाया।

अपराध की गंभीरता पर अदालत का संदेश

अदालत की ओर से अपराध को बेहद क्रूर और अक्षम्य बताए जाने से यह स्पष्ट है कि बच्ची की हत्या को सामान्य हत्या के मामले के तौर पर नहीं देखा गया। खास तौर पर कथित तौर पर एक अन्य व्यक्ति को झूठे मामले में फंसाने के लिए बच्ची की हत्या किए जाने के आरोप ने मामले की गंभीरता बढ़ा दी।

फैसले के बाद अब पांचों दोषियों को उम्रकैद की सजा भुगतनी होगी। मामले में अदालत ने कानून के तहत दोषियों की भूमिका और अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए सजा निर्धारित की।

नौ वर्षीय बच्ची की हत्या का यह मामला इस बात को भी रेखांकित करता है कि व्यक्तिगत विवाद या कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए किसी निर्दोष व्यक्ति को नुकसान पहुंचाना कितना गंभीर अपराध है। अदालत का फैसला ऐसे मामलों में कानून के सख्त रुख का संकेत देता है, जहां किसी बच्चे को कथित आपराधिक साजिश का हिस्सा बनाया गया हो।

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