उत्तर प्रदेश

कानपुर में KDA प्लॉटों का खेल फर्जी दस्तावेज मामले में FIR

Ratna Netam
11 Aug 2026 3:35 PM IST
कानपुर में KDA प्लॉटों का खेल फर्जी दस्तावेज मामले में FIR
x
कानपुर : विकास प्राधिकरण (KDA) में प्लॉट से जुड़े फर्जीवाड़े का एक गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि प्राधिकरण के एक बाबू ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज और गलत तथ्यों के आधार पर सुजातगंज योजना के दो बेशकीमती भूखंडों की फ्री होल्ड डीड तैयार कराने में भूमिका निभाई। वर्ष 2022 में हुए इस मामले की जांच लंबे समय तक चलती रही और कार्रवाई में भी देरी हुई। अब केडीए की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर बाबू एजाज अंसारी के खिलाफ धोखाधड़ी और फर्जीवाड़े का मुकदमा दर्ज किया गया है। एफआईआर दर्ज होने के साथ ही उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई और निलंबन की संस्तुति भी की गई है।
केडीए की ओर से दी गई शिकायत के मुताबिक सुजातगंज योजना के ब्लॉक बी में स्थित भूखंड संख्या 293 की फ्री होल्ड डीड नन्कू पुत्र प्रहलाद के पक्ष में 1 जून 2022 को निष्पादित की गई थी। इसी योजना के ब्लॉक सी स्थित भूखंड संख्या 310 की फ्री होल्ड डीड दिनेश सिंह पुत्र जितेंद्र भान सिंह के पक्ष में 31 मई 2022 को कराई गई थी। आरोप है कि दोनों भूखंडों की फ्री होल्ड प्रक्रिया में मिथ्या तथ्यों और त्रुटिपूर्ण दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
मामला सामने आने के बाद इसकी जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई थी। इस कमेटी ने 21 मई 2025 को अपनी जांच रिपोर्ट प्राधिकरण को सौंप दी। रिपोर्ट में कथित अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए बताया गया कि दोनों भूखंडों से संबंधित रजिस्ट्री और फ्री होल्ड की कार्रवाई तत्कालीन पटल लिपिक एजाज अंसारी ने कराई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर अब केडीए ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।
स्वरूप नगर थाना प्रभारी देवेंद्र सिंह के मुताबिक केडीए के लिपिक के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब एफआईआर में लगाए गए आरोपों की जांच करेगी। जांच के दौरान फ्री होल्ड डीड से जुड़े दस्तावेज, कार्यालयी रिकॉर्ड, संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका तथा कथित तौर पर इस्तेमाल किए गए दस्तावेजों की पड़ताल की जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि फर्जीवाड़े में केवल एक कर्मचारी की भूमिका थी या किसी अन्य व्यक्ति की भी इसमें संलिप्तता रही।
2023 में भी शुरू हुई थी जांच
इस मामले में कार्रवाई की कहानी नई नहीं है। जानकारी के अनुसार तत्कालीन प्रमुख सचिव नितिन गोकर्ण के आदेश पर वर्ष 2023 में केडीए के चार भूखंडों से जुड़े कथित फर्जीवाड़े की जांच शुरू कराई गई थी। तत्कालीन केडीए उपाध्यक्ष अरविंद सिंह ने फरवरी 2023 में जांच कराई थी। उस समय जांच को गोपनीय रखा गया था और इसे 'ऑपरेशन क्लीन' नाम दिया गया था।
बताया गया कि इस कार्रवाई के दौरान तत्कालीन अनु सचिव के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई हुई थी और उन्हें निलंबित किया गया था। वहीं बाबू एजाज अंसारी की भूमिका को लेकर भी कार्रवाई शुरू की गई थी। हालांकि, इसके बावजूद मामला लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ सका।
2025 में भी दी गई थी तहरीर
इस मामले में वर्ष 2025 में भी पुलिस को तहरीर दिए जाने की बात सामने आई है, लेकिन उस समय एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी थी। अब जांच रिपोर्ट को आधार बनाकर केडीए की ओर से दोबारा तहरीर दी गई, जिसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया। इससे मामले में कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।
केडीए से जुड़े अन्य भूखंडों के मामलों में भी कर्मचारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। रिपोर्ट के अनुसार द्वितीय श्रेणी लिपिक प्रदीप सविता को भी निलंबित किया गया था। हालांकि बाद में हाईकोर्ट के आदेश के बाद उनकी बहाली हो गई थी। इससे स्पष्ट है कि केडीए में भूखंडों से जुड़े रिकॉर्ड और फ्री होल्ड प्रक्रिया को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
पहले भी सामने आया था 18 लाख की ठगी का मामला
कानपुर में केडीए के नाम पर प्लॉट से जुड़ी धोखाधड़ी का एक अन्य मामला भी हाल में सामने आया था। कल्याणपुर इलाके में कुछ लोगों पर केडीए का प्लॉट बताकर फर्जी आवंटन पत्र देने और एक व्यक्ति से 18 लाख रुपये हड़पने का आरोप लगा था। पुलिस कमिश्नर के आदेश के बाद इस मामले में एक दंपती समेत 12 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
शिकायतकर्ता विष्णु प्रसाद दुबे के अनुसार, गौरव शुक्ला और उसकी पत्नी जागृति ने उन्हें एक प्लॉट केडीए द्वारा आवंटित होने की बात बताकर बेचने का प्रस्ताव दिया था। सौदा तय होने के बाद पहले एक लाख रुपये बतौर बयाना लिया गया। इसके बाद डेढ़ लाख रुपये और लिए गए। बाद में शिकायतकर्ता को ग्वालटोली स्थित एक आवास पर बुलाया गया, जहां कथित तौर पर पांच लाख रुपये और 10 लाख रुपये अलग-अलग खातों में ऑनलाइन ट्रांसफर कराए गए। इस तरह कुल 18 लाख रुपये लिए गए। बाद में दस्तावेजों की जांच करने पर उनके फर्जी होने की जानकारी सामने आई।
अब सुजातगंज योजना के दो भूखंडों से जुड़े मामले में केडीए कर्मचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियों और पुलिस की भूमिका अहम हो गई है। जांच में सामने आने वाले तथ्यों से ही यह स्पष्ट होगा कि फर्जी दस्तावेज कैसे तैयार हुए, फ्री होल्ड प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका थी और इससे प्राधिकरण को कितना नुकसान हुआ। फिलहाल पुलिस ने मामले को दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
Next Story