उत्तर प्रदेश

गढ़ाकासदा गांव में बुखार का प्रकोप, दो बच्चों की मौत; एक दर्जन बीमार

Kavita2
22 Aug 2026 3:56 PM IST
गढ़ाकासदा गांव में बुखार का प्रकोप, दो बच्चों की मौत; एक दर्जन बीमार
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चकरनगर। चकरनगर तहसील के ग्राम गढ़ाकासदा में पिछले कुछ दिनों से बुखार के प्रकोप ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। गांव में दो दिनों के भीतर दो बच्चों की मौत होने की सूचना से हड़कंप मच गया है। वहीं करीब एक दर्जन बच्चे बीमार बताए जा रहे हैं। कई बीमार बच्चों का इलाज औरैया जनपद के बाबरपुर कस्बे स्थित निजी अस्पतालों में कराया जा रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार, गांव में अचानक कई बच्चों के बीमार पड़ने से स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि अब तक स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में नहीं पहुंची थी। हालांकि, मामले की जानकारी मिलने के बाद जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजने की बात कही है।

दो दिनों में दो बच्चों की मौत

गांव में बुखार से जिन दो बच्चों की मौत हुई है, उनमें महानंद दोहरे का पुत्र सतेंद्र शामिल है। बताया गया कि उसकी तबीयत खराब होने के बाद उपचार कराया जा रहा था, लेकिन गुरुवार रात उसकी मौत हो गई।

इसके बाद शुक्रवार को मुकेश की पुत्री गुनगुन की भी मौत हो गई। लगातार दो बच्चों की मौत से गांव में भय का माहौल बन गया है। ग्रामीणों को आशंका है कि कहीं बुखार का प्रकोप अन्य बच्चों और ग्रामीणों को भी अपनी चपेट में न ले ले।

हालांकि, बच्चों की मौत का वास्तविक चिकित्सकीय कारण अभी स्पष्ट नहीं है। दोनों बच्चों की मौत बुखार के दौरान हुई है, लेकिन इसकी पुष्टि चिकित्सकीय जांच के बाद ही हो सकेगी कि मौत किस बीमारी या संक्रमण की वजह से हुई।

एक दर्जन बच्चे बीमार

ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में करीब एक दर्जन बच्चे बुखार से पीड़ित हैं। बच्चों में बीमारी फैलने के बाद परिजन उन्हें स्थानीय स्तर पर इलाज के लिए ले जा रहे हैं। कई परिवार अपने बच्चों को इलाज के लिए औरैया जिले के बाबरपुर कस्बे के निजी अस्पतालों में ले गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि एक साथ बड़ी संख्या में बच्चों के बीमार पड़ने के बावजूद गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम नहीं पहुंची थी। इससे लोगों में नाराजगी भी है।

परिजनों को आशंका है कि यदि बीमारी का समय रहते पता नहीं लगाया गया और आवश्यक दवाइयां उपलब्ध नहीं कराई गईं तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।

स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजने के निर्देश

मामले की जानकारी जिला प्रशासन तक पहुंचने के बाद जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल ने स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव भेजने की बात कही है। जिलाधिकारी के अनुसार, गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम भेजी जा रही है।

उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराई जाएंगी और जरूरत के अनुसार टीकाकरण भी किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंचकर बीमार बच्चों की जांच करेगी और बीमारी के कारणों का पता लगाने का प्रयास करेगी।

जांच के बाद स्पष्ट होगी बीमारी की स्थिति

गांव में बुखार फैलने के पीछे क्या कारण है, इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। बरसात के मौसम में ग्रामीण इलाकों में जलभराव, दूषित पानी और मच्छरों के बढ़ते प्रकोप के कारण विभिन्न प्रकार की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की ओर से बीमारी की वास्तविक वजह की जांच किया जाना महत्वपूर्ण होगा।

स्वास्थ्य टीम के गांव पहुंचने के बाद बीमार बच्चों की जांच, आवश्यक नमूनों की जांच और आसपास के क्षेत्र की स्थिति का आकलन किया जा सकता है। साथ ही ग्रामीणों को बीमारी से बचाव के उपायों के बारे में जानकारी भी दी जाएगी।

ग्रामीणों में बढ़ी चिंता

दो बच्चों की मौत और कई अन्य बच्चों के बीमार होने से गढ़ाकासदा के ग्रामीणों में चिंता का माहौल है। ग्रामीणों की मांग है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में पहुंचकर सभी प्रभावित बच्चों की जांच करे और आवश्यक दवाइयां उपलब्ध कराए।

लोगों का कहना है कि यदि बीमारी का प्रकोप बढ़ रहा है तो गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाकर घर-घर जांच कराई जानी चाहिए। इससे बीमारी से प्रभावित लोगों की जल्द पहचान हो सकेगी और समय पर उपचार शुरू किया जा सकेगा।

ग्रामीणों की यह भी मांग है कि गांव में साफ-सफाई और पेयजल व्यवस्था की जांच कराई जाए। यदि कहीं जलभराव या दूषित पानी की समस्या है तो उसे तत्काल दूर किया जाए।

प्रशासन ने लिया संज्ञान

मामले के सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने स्वास्थ्य विभाग को सक्रिय किया है। जिलाधिकारी की ओर से टीम भेजने और आवश्यक दवाइयां व टीकाकरण की व्यवस्था करने की जानकारी दी गई है।

अब स्वास्थ्य विभाग की टीम की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि गांव में बच्चों के बीमार पड़ने का कारण क्या है और बीमारी कितने क्षेत्र में फैली है। फिलहाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी प्राथमिकता बीमार बच्चों को उपचार उपलब्ध कराना और संक्रमण या बीमारी के संभावित प्रसार को रोकना है।

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