उत्तर प्रदेश

अदालत में गवाहों की निडर गवाही: संभल हिंसा मामले में कसेगा जफर अली पर शिकंजा

Saba Naaz
24 July 2026 4:56 PM IST
अदालत में गवाहों की निडर गवाही: संभल हिंसा मामले में कसेगा जफर अली पर शिकंजा
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उत्तर प्रदेश: संभल में हुई हिंसा के मामले में पुलिस और प्रशासन का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। हिंसा से जुड़े कुल 12 मुकदमों में साक्ष्यों के संकलन और गवाही की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) राहुल दीक्षित ने अभियोजन पक्ष की इस प्रगति की विस्तृत जानकारी देते हुए इसे प्रदेश सरकार की कानून-व्यवस्था की एक बड़ी उपलब्धि बताया है। उन्होंने कहा कि संभल हिंसा का कोई भी दोषी, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, कानून के शिकंजे से बच नहीं पाएगा।

डीजीसी राहुल दीक्षित ने बताया कि संभल हिंसा से संबंधित कुल 12 मुकदमे दर्ज किए गए थे, जिनमें से दो मामले थाना नखासा और शेष 10 मामले संभल कोतवाली में पंजीकृत हैं। इन मुकदमों में से चार पत्रावलियां दंगे के दौरान जान गंवाने वाले मृतकों से संबंधित हैं। अभियोजन पक्ष की ओर से लगभग सभी मुकदमों में साक्ष्य संकलन की कार्रवाई पूरी की जा चुकी है और अब केवल कुछ ही मामलों में विवेचकों की औपचारिक गवाही होना बाकी है, जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।

मामले की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए डीजीसी ने एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1936 से लेकर 2024 तक संभल में करीब 15 छोटे-बड़े दंगे हुए। इन सभी दंगों से जुड़े मुकदमों का इतिहास रहा है कि किसी भी न्यायालय में कोई भी गवाह दहशतगर्दों के डर के कारण साक्ष्य या बयान देने सामने नहीं आता था। पहले उपद्रवियों और अपराधियों का खौफ इस कदर हावी रहता था कि मुकदमों की पैरवी अधूरी रह जाती थी और दोषी बच निकलते थे। लेकिन वर्तमान योगी सरकार के शासनकाल में यह पहली बार देखा गया है जब वादी और गवाह बिना किसी डर या दबाव के बेखौफ होकर अदालत पहुंचे और निष्पक्षता से अपने बयान दर्ज कराए हैं।

कार्रवाई के विवरण को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि संभल हिंसा का मुख्य आरोपी शारिक साठा अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर यानी फरार चल रहा है, जिसके खिलाफ सघन विवेचना जारी है। वहीं, हिंसा भड़काने और इसकी साजिश में शामिल शारिक के गुर्गों वारिस और गुलाम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम यानी रासुका (NSA) लगाया गया है। इन दोनों के खिलाफ कानूनी साक्ष्य लगभग पूरे किए जा चुके हैं। डीजीसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि हिंसा की साजिश में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि चाहे मामला जामा मस्जिद के सदर जफर अली का हो या फिर सांसद जियाउर्रहमान बर्क का, अभियोजन पक्ष पूरी निष्पक्षता और चरणबद्ध तरीके से कानूनी कार्रवाई को आगे बढ़ा रहा है। चेतावनी भरे लहजे में उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति राजनीति का सहारा लेकर कानून से बचने की सोच रहा है, तो यह उसकी बहुत बड़ी भूल है। जिन्होंने भी संभल को हिंसा की आग में झोंकने की साजिश रची है, उनमें अगला नंबर जफर अली का ही होगा। सरकार और अभियोजन पक्ष का प्राथमिक लक्ष्य एक-एक करके सभी मुकदमों में ठोस साक्ष्य अदालत के सामने पेश कर सभी दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलाना है।

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