उत्तर प्रदेश

सड़क पर तीन दिन पड़ा रहा पिता का शव, चप्पल से बेटे ने पहचाना

Ashish verma
12 Oct 2026 9:48 PM IST
सड़क पर तीन दिन पड़ा रहा पिता का शव, चप्पल से बेटे ने पहचाना
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झांसी : उत्तर प्रदेश के झांसी में सड़क हादसे में एक किसान की मौत और तीन दिन बाद उनकी पहचान होने का मामला सामने आया है। पूंछ थाना क्षेत्र के महाराजगंज ढेरी गांव निवासी 56 वर्षीय जगमोहन तिवारी की झांसी-कानपुर हाईवे पर हादसे में जान चली गई। दी गई जानकारी के अनुसार, उनका शव तीन दिन तक सड़क पर पड़ा रहा और उसके ऊपर से वाहन गुजरते रहे। रविवार को पिता की तलाश में निकले बेटे ने हाईवे पर मिली चप्पल, तौलिया और कपड़ों के आधार पर पहचान की। पुलिस ने शव के अवशेष
पोस्टमार्टम
के लिए भेज दिए हैं।
जगमोहन तिवारी खेती करके अपने परिवार का गुजारा करते थे। उनके छोटे बेटे आयुष के मुताबिक, 9 अक्टूबर की सुबह करीब 11 बजे पिता घर से खेत जाने के लिए निकले थे। उस समय घर पर केवल उनकी पत्नी रागनी मौजूद थीं। परिवार के अन्य सदस्य बाहर गए हुए थे। बड़े बेटे सागर मथुरा में थे, जबकि आयुष अपनी दादी शोमा को लेने गुजरात गया था। रोजमर्रा के काम के लिए खेत निकले जगमोहन के घर नहीं लौटने का कारण परिवार को शुरुआत में समझ नहीं आया।
परिजनों के अनुसार, जगमोहन के पास मोबाइल फोन नहीं था। ऐसे में घर से निकलने के बाद उनसे फोन पर संपर्क करने की सुविधा नहीं थी। देर रात तक वह वापस नहीं आए तो पत्नी रागनी ने सोचा कि संभवतः खेत पर ही रुक गए होंगे। परिवार के मुताबिक, वह पहले भी कई बार खेत पर रात गुजार चुके थे। इसी वजह से उस रात उनके घर नहीं लौटने पर किसी अनहोनी का अंदेशा नहीं हुआ। परिजनों को यह जानकारी नहीं थी कि हाईवे पर हादसा हो चुका है।
पत्नी रागनी का शुरुआती अनुमान जगमोहन की पहले की दिनचर्या पर आधारित था। खेत में रात बिताना उनके लिए पूरी तरह असामान्य नहीं था। इसलिए देर होने को परिवार ने उसी आदत से जोड़कर देखा। दूसरी ओर, मोबाइल फोन नहीं होने के कारण उनकी स्थिति की तत्काल जानकारी नहीं मिल सकी। आयुष ने घर से निकलने के समय और परिवार के सदस्यों की मौजूदगी का जो विवरण दिया है, उससे स्पष्ट होता है कि 9 अक्टूबर की सुबह जगमोहन खेत जाने की बात कहकर निकले थे।
इसके बाद झांसी-कानपुर हाईवे पर सड़क हादसे में उनकी मौत हो गई। हालांकि, उपलब्ध विवरण में टक्कर मारने वाले वाहन, हादसे के सटीक समय या घटनास्थल के किसी विशेष बिंदु की जानकारी नहीं दी गई है। घटना के बाद शव सड़क पर पड़ा रहने और उसके ऊपर से वाहन गुजरने की बात सामने आई है। लगातार वाहनों की चपेट में आने से पहचान करना मुश्किल हो गया। परिजनों के मुताबिक, अंत में लगभग तीन किलो अवशेष बचे थे। यह विवरण परिवार की ओर से दिया गया है।
रविवार को जब बेटा पिता की तलाश में निकला, तब हाईवे पर उनकी पहचान से जुड़ी चीजें मिलीं। चप्पल, तौलिया और कपड़ों के आधार पर परिवार ने जगमोहन को पहचाना। इस तरह तलाश के दौरान मिली व्यक्तिगत वस्तुएं पहचान का आधार बनीं। उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पहचान करने वाला बेटा सागर था या आयुष। इसलिए किसी एक बेटे का नाम जोड़कर घटना का यह हिस्सा बताना उचित नहीं होगा। सामने आए विवरण में बेटे द्वारा पहचान किए जाने की बात कही गई है।
परिवार के लिए यह तलाश पिता का पता लगाने की कोशिश थी, लेकिन हाईवे पर मिले अवशेष और सामान से उनकी मौत की जानकारी सामने आई। 9 अक्टूबर को खेत के लिए घर से निकलने से लेकर रविवार को पहचान होने तक की घटनाएं इस मामले का मुख्य क्रम हैं। पहले घर नहीं लौटने को खेत पर रुकने से जोड़ा गया और बाद में तलाश के दौरान हादसे का पता चला। परिवार द्वारा बताई गई परिस्थितियों में मोबाइल फोन का नहीं होना भी संपर्क न हो पाने का एक महत्वपूर्ण तथ्य है।
तीन दिन तक शव सड़क पर पड़े रहने का विवरण इस घटना का गंभीर पहलू है। हालांकि, इस अवधि में किसी ने घटना की सूचना दी थी या नहीं और संबंधित एजेंसियों को कब जानकारी मिली, इसका ब्योरा उपलब्ध नहीं है। इसलिए किसी खास व्यक्ति या विभाग की जिम्मेदारी के बारे में अभी निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। शव की पहचान होने के बाद पुलिस ने अवशेषों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। आगे की जानकारी से हादसे और उसके बाद की परिस्थितियां अधिक स्पष्ट हो सकेंगी।
पुलिस की ओर से अवशेष पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने की कार्रवाई सामने आई है। फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट या किसी वाहन की पहचान का विवरण नहीं दिया गया है। मामले में किसी चालक के पकड़े जाने अथवा किसी प्रत्यक्षदर्शी के बयान का भी उल्लेख नहीं है। उपलब्ध तथ्यों के अनुसार, किसान की हाईवे पर हादसे में मौत हुई, परिवार को तत्काल जानकारी नहीं मिली और रविवार को सामान से पहचान हुई। इन तथ्यों से आगे की बातों के लिए पुष्टि आवश्यक है।
जगमोहन तिवारी के परिवार ने उनकी आखिरी बार घर से निकलने की जानकारी और तलाश के दौरान पहचान की परिस्थितियां साझा की हैं। पत्नी रागनी ने उनके खेत पर रुकने का अनुमान इसलिए लगाया था क्योंकि वह पहले भी ऐसा कर चुके थे। अब पुलिस ने अवशेष पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए हैं। हादसे का सटीक समय, संबंधित वाहन और तीन दिन तक शव सड़क पर पड़े रहने की परिस्थितियों का विस्तृत विवरण सामने आना बाकी है।
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