उत्तर प्रदेश

स्कूल के गेट पर सांड़ों की लड़ाई में फंसे पिता-पुत्री, छात्रा का हाथ टूटा और पिता गंभीर घायल

Kavita2
12 Sept 2026 3:08 PM IST
स्कूल के गेट पर सांड़ों की लड़ाई में फंसे पिता-पुत्री, छात्रा का हाथ टूटा और पिता गंभीर घायल
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मेरठ : गंगानगर क्षेत्र में शुक्रवार सुबह स्कूल जा रही छात्रा और उसके पिता दो छुट्टा सांड़ों की लड़ाई की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो गए। गार्गी स्कूल के सामने हुई इस घटना में सांड़ों ने उनकी बाइक और पिता-पुत्री को बुरी तरह रौंद दिया। छात्रा का बायां हाथ टूट गया, जबकि बेटी को बचाने का प्रयास कर रहे पिता के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्कूल के प्रवेश द्वार के पास हुए हादसे ने बच्चों और अभिभावकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

गंगानगर के आई पॉकेट निवासी भारत शर्मा का क्षेत्र में फ्लेयर पब्लिकेशन है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, उनकी बेटी मनस्वी शर्मा गार्गी स्कूल में पढ़ती है। शुक्रवार सुबह भारत शर्मा रोज की तरह बाइक से बेटी को स्कूल छोड़ने जा रहे थे। वह स्कूल के गेट के सामने पहुंचे ही थे कि दो सांड़ आपस में लड़ते हुए अचानक सड़क पर आ गए। पिता-पुत्री को वहां से सुरक्षित निकलने का अवसर नहीं मिला और उनकी बाइक सांड़ों की भिड़ंत के बीच फंस गई।

सांड़ों की लड़ाई की चपेट में आने से भारत शर्मा और मनस्वी बाइक समेत सड़क पर गिर पड़े। इसके बाद दोनों पशुओं ने उन्हें रौंद दिया। बेटी को चोट लगते देख भारत शर्मा ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन वह भी गंभीर रूप से घायल हो गए। स्कूल पहुंचने का सामान्य सफर कुछ ही पलों में दर्दनाक हादसे में बदल गया। पिता और बेटी, दोनों को अस्पताल में उपचार की जरूरत पड़ी। घटना में छात्रा के हाथ की हड्डी टूटने की जानकारी सामने आई है।

हादसे के बाद विद्यालय प्रशासन ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने में मदद की। सूचना मिलते ही स्कूल के प्रशासनिक और परिवहन विभाग के प्रतिनिधि तथा शिक्षिकाएं मौके पर पहुंचीं। उन्होंने पिता-पुत्री को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराने की व्यवस्था की। विद्यालय के प्रतिनिधि प्राथमिक उपचार और आवश्यक चिकित्सकीय जांच के दौरान भी अस्पताल में मौजूद रहे। रिपोर्ट में स्थानीय लोगों और अभिभावकों के बीच घटना को लेकर नाराजगी का भी उल्लेख है।

विद्यालय की प्रधानाचार्या डॉ. वाग्मिता त्यागी ने घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए नगर निगम और स्थानीय प्रशासन से ठोस कदम उठाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि छुट्टा पशुओं की समस्या विद्यार्थियों और आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन रही है। प्रधानाचार्या ने घायल पिता-पुत्री के जल्द स्वस्थ होने की कामना की और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में नगर निगम की जिम्मेदारी पर भी जोर दिया।

यह घटना स्कूलों के आसपास सड़क सुरक्षा की व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत सामने लाती है। सुबह स्कूल खुलने और दोपहर में छुट्टी के समय प्रवेश द्वार के आसपास बच्चों, अभिभावकों और वाहनों की आवाजाही रहती है। ऐसे स्थान पर बड़े पशुओं की मौजूदगी जोखिम बढ़ा सकती है। आपस में लड़ते पशुओं की गतिविधि अचानक बदलती है, जिससे आसपास मौजूद लोगों के लिए बचकर निकलना मुश्किल हो सकता है। गंगानगर में पिता-पुत्री के साथ हुआ हादसा इसी जोखिम का गंभीर उदाहरण है।

स्कूल के गेट तक पहुंचने के बावजूद छात्रा सुरक्षित परिसर में प्रवेश नहीं कर सकी। इससे स्पष्ट होता है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए विद्यालय के भीतर की व्यवस्था के साथ बाहर के रास्ते पर भी ध्यान देना आवश्यक है। प्रवेश द्वार, आसपास की सड़क और बच्चों के आने-जाने वाले मार्गों पर छुट्टा पशुओं की मौजूदगी की सूचना मिलने पर समय रहते कार्रवाई की व्यवस्था होनी चाहिए। स्कूल प्रशासन और संबंधित विभागों के बीच नियमित संपर्क इस तरह के खतरे की पहचान करने में उपयोगी हो सकता है।

घटना के बाद ध्यान घायल पिता-पुत्री के उपचार और सड़क पर ऐसे जोखिम रोकने के उपायों पर है। उपलब्ध जानकारी में भारत शर्मा की चोटों को गंभीर बताया गया है, लेकिन उनकी वर्तमान चिकित्सकीय स्थिति का विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है। इसी तरह मनस्वी के उपचार और अस्पताल से छुट्टी मिलने के बारे में भी पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। नगर निगम की ओर से घटनास्थल के आसपास पशुओं को पकड़ने के लिए किसी विशेष अभियान या कार्रवाई की पुष्टि भी अभी सामने नहीं आई है।

गंगानगर का यह हादसा छुट्टा गोवंश की समस्या से जुड़े मानवीय नुकसान को सामने लाता है। स्कूल छोड़ने जा रहे एक पिता और पढ़ने जा रही बेटी का गंभीर रूप से घायल होना सार्वजनिक रास्तों को सुरक्षित रखने की आवश्यकता रेखांकित करता है। विद्यालय प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों से कदम उठाने की मांग की है। अब आवश्यक है कि स्कूलों के आसपास ऐसे खतरों की पहचान हो और उन्हें दूर करने के लिए प्रभावी व्यवस्था बने, ताकि बच्चों तथा अभिभावकों का रोजाना का आवागमन सुरक्षित रह सके।

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