उत्तर प्रदेश

Farrukhabad: कविताओं के जरिए अभिव्यक्ति की कविगोष्ठी में समय का अनोखा प्रस्तुतीकरण

Admindelhi1
26 May 2025 8:19 PM IST
Farrukhabad: कविताओं के जरिए अभिव्यक्ति की कविगोष्ठी में समय का अनोखा प्रस्तुतीकरण
x
"कविगोष्ठी में कविताओं के माध्यम से समय का किया रेखांकन"

फर्रुखाबाद: साहित्यक सामाजिक एवं सांस्कृतिक संस्था अभिव्यक्ति के नियमित कार्यक्रम के तहत काव्य गोष्ठी का आयोजन संस्था के संरक्षक वरिष्ठ गजलकार नलिन श्रीवास्तव के श्याम नगर स्थित निवास पर कविवर प्रेम सागर चौहान के संयोजन में हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी इन्दिरा पाण्डेय ने की व संचालन नलिन श्रीवास्तव ने किया। मां बागीश्वरी पर पुष्पार्पण एवं कवियत्री डा0 गरिमा पाण्डेय की वाणी वंदना से प्रारंभ हुई। गोष्ठी को अपना स्वर प्रदान करते हुए नयी कविता की कवियत्री रत्नेश पाल ने महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों को अपनी रचनाओं में रेखांकित किया। वहीं वरिष्ठ वय कवि प्रेम सागर चौहान ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सभी को अतीत रहे रूबरू करा दिया।

विसंगतियों के बेबाक कवि कौशलेंद्र यादव बेबाक ने समय से जुड़ी रचनाओं के साथ ही स्वास्थ्य के दोहे सुनाकर प्रकृति के अनुरूप चलने की प्रेरणा दी। कवियत्री गीता भारद्वाज ने कश्मीर समस्या पर कविता पढक़र वर्तमान के आपरेशन सिंदूर को अपने उद्देश्य तक पहुंचाने का आवाह्न किया। संस्था के समन्वयक उपकार मणि उपकार ने ताज़ातरीन गज़़लों से वाह वाही अर्जित की। डा0 गरिमा पाण्डेय के फिल्म में चयनित हुए गीत ने धूम मचा दी। पांव के छाले ही मंजिल का पता देते हैं, दर्द ये देते हैं और ये ही दवा देते हैं।

संचालन कर रहे वरिष्ठ गजलकार नलिन श्रीवास्तव ने समय के परिवर्तन को कुछ यूं रेखांकित किया। खुशबू सी फैलती थी जिस शख्स के खतों से, अब उसके खत भरे हैं, शिकवे शिकायतों से। अध्यक्षता कर रहीं इंदिरा पांडेय ने सभी के स्वर्णिम भविष्य की कामना की ओर सरस्वती पूजा में लगे रहने की बात कही। उन्होंने कहा कि कम समसामयिक रचनाएं करते रहें छोटे से आवाज बड़े मंचों तक पहुंचेगी। कार्यक्रम को संयोजक प्रेम सागर चौहान ने आए हुए सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।

Next Story