उत्तर प्रदेश

Farrukhabad: कार्रवाई की आहट पर ‘आत्मदाह’ की धमकी

Admindelhi1
28 Jan 2026 4:28 PM IST
Farrukhabad: कार्रवाई की आहट पर ‘आत्मदाह’ की धमकी
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फर्रुखाबाद: प्रशासनिक कार्रवाई की भनक लगते ही अवधेश मिश्रा द्वारा एक बार फिर परिवार सहित आत्मदाह की धमकी वाले प्रार्थना पत्र भेजे जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि यह तरीका वह हर बार अपनाता है जब भी उसके कथित काले कारनामों पर प्रशासन शिकंजा कसने की तैयारी करता है।

सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में संभावित कार्रवाई की खबर मिलते ही अवधेश मिश्रा ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों को रजिस्ट्री के माध्यम से प्रार्थना पत्र भेजना शुरू कर दिया। इन पत्रों में वह आत्मदाह की धमकी देकर अधिकारियों को भ्रमित करने की कोशिश करता रहा है।

बताया जाता है कि वर्ष 2020 में उसकी कथित फर्जी शिक्षण संस्थाओं पर प्रशासन ने कार्रवाई की थी। उस दौरान भी उसने परिवार सहित आत्मदाह की धमकियां देकर उच्चाधिकारियों को पत्र प्रेषित किए थे। प्रशासनिक रिकॉर्ड से जुड़े जानकारों का कहना है कि यह एक स्थापित पैटर्न है—कार्रवाई टालने या दबाव बनाने का।

शिक्षा संस्थान पर सवाल

आरोप है कि अवधेश मिश्रा और उसकी पत्नी रीता मिश्रा उर्फ रीता पाठक—जिन्हें एसकेएम इंटर कॉलेज की कथित फर्जी प्रधानाचार्य बताया जा रहा है—के खिलाफ समय-समय पर शिकायतें सामने आती रही हैं। प्रशासनिक कार्रवाई शुरू होते ही आत्मदाह की धमकी वाले पत्र भेजे जाते हैं, जिससे प्रक्रिया प्रभावित करने का प्रयास किया जाता है।

पुलिस रिकॉर्ड का हवाला देने वाले सूत्रों के अनुसार, अवधेश मिश्रा के खिलाफ करीब 10 आपराधिक मुकदमे दर्ज बताए जाते हैं। यह भी आरोप हैं कि वह जिले में कुख्यात अपराधी के रूप में सक्रिय रहा है और अन्य अपराधियों के साथ कथित सांठ-गांठ के जरिए नामी-बेनीामी संपत्तियां अर्जित कीं। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक निष्कर्षों पर निर्भर करती है।

कानूनविदों का कहना है कि आत्मदाह की धमकी देकर कार्रवाई रोकने का प्रयास दबाव की रणनीति हो सकता है, जिसे कानूनन अलग से देखा जाना चाहिए। प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा है कि ऐसे मामलों में धमकी और आरोप—दोनों की अलग-अलग निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि न तो किसी निर्दोष को नुकसान हो और न ही कानून का दुरुपयोग।

अब निगाहें प्रशासन पर हैं क्या वह प्रार्थना पत्रों के दबाव से परे रहकर तथ्याधारित कार्रवाई करेगा,

कथित फर्जीवाड़े/आपराधिक मामलों की समग्र जांच कराएगा,

और आत्मदाह की धमकी जैसे मामलों में कानूनी प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करेगा?

फिलहाल मामला जांच और रिकॉर्ड-सत्यापन के चरण में बताया जा रहा है। आधिकारिक बयान और दस्तावेज़ सामने आने पर तस्वीर और साफ होगी।

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