उत्तर प्रदेश

Farrukhabad: माफिया पर कड़ी कार्रवाई, केएम इंडिया पर नरमी से खफ़ा लोग

Admindelhi1
12 March 2026 7:47 PM IST
Farrukhabad: माफिया पर कड़ी कार्रवाई, केएम इंडिया पर नरमी से खफ़ा लोग
x

फर्रुखाबाद: जनपद में अवैध कब्जों और निर्माणों के खिलाफ प्रशासन की कार्रवाई को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ठंडी सड़क स्थित केएम इंडिया, और होटल केएम हाउस की अवैध बिल्डिंग को लेकर प्रशासन की ढिलाई से स्थानीय लोगों में गहरा असंतोष बढ़ता जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, तत्कालीन नगर मजिस्ट्रेट दीपाली भार्गव ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से केएम इंडिया की बिल्डिंग और केएम हाउस को अवैध घोषित किया था। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि यह निर्माण तालाब की भूमि पर किया गया है, जो कि राजस्व अभिलेखों में दर्ज सार्वजनिक भूमि है। जबकि इसी नंबर की सटी भूमि पर माफिया अनुपम दुबे के आलीशान होटल श्री गुरु शरण पर प्रशासन का दो वर्ष पूर्व ही बुलडोजर गरज चुका है और कम इंडिया की फाइल को लगातार सुनवाई के नाम पर दबाया जा रहा है। उस समय प्रशासन ने सख्त कार्रवाई का संदेश दिया था।

लेकिन हैरानी की बात यह है कि उसी प्रकरण से जुड़े केएम हाउस और केएम इंडिया की बिल्डिंग पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जबकि राजस्व अभिलेखों और प्रशासनिक आदेशों में इसे अवैध बताया जा चुका है। स्थानीय लोगों और अनुपम दुबे के सजातियों और समर्थकों के बड़े समूह का कहना है कि प्रशासन एक ही मामले में अलग-अलग मानक अपना रहा है।

एक तरफ होटल श्री गुरु शरण को तत्काल ध्वस्त कर दिया गया, वहीं दूसरी तरफ केएम हाउस और के एम इंडिया पर अब तक बुलडोजर नहीं चलाया गया। जबकि तत्कालीन नगर मजिस्ट्रेट दीपाली भार्गव अपने 51 पेज के विस्तृत आदेश में इन भावनाओं को भी अवैध करार दे चुकी हैं उनके आदेश के मुताबिक ही होटल गुरु शरण पर समूल ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हो चुकी है।

आम जनता और कई प्रभावी लोगों का आरोप है कि यदि भूमि तालाब की है और निर्माण अवैध है तो फिर कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है। इसको लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि यदि केएम इंडिया की बिल्डिंग और केएम हाउस वास्तव में तालाब की भूमि पर अवैध रूप से बने हैं तो उन पर भी समान रूप से कार्रवाई की जाए।

लोगों का कहना है कि कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए। यदि अवैध निर्माण हटाने का अभियान चल रहा है तो उसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है, लेकिन बढ़ते जनाक्रोश के बीच यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है।

Next Story