उत्तर प्रदेश

Farrukhabad: 7 जुलाई को होगी सपा की मासिक बैठक

Admindelhi1
4 July 2025 7:44 PM IST
Farrukhabad: 7 जुलाई को होगी सपा की मासिक बैठक
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फर्रुखाबाद: समाजवादी पार्टी (SP) की मासिक बैठक (monthly meeting) 7 जुलाई को आयोजित की जाएगी। वहीं, शहर के दो मोहल्लों में विद्युत पोलों में आग लगने से बड़ा हादसा टल गया। दूसरी ओर, गंगा (Ganga)और रामगंगा नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु पर पहुंचने से तटवर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) के निर्देश पर सपा की मासिक बैठक रविवार, 7 जुलाई को प्रातः 10:00 बजे जिला कार्यालय, आवास विकास फर्रुखाबाद में आयोजित की जाएगी।

बैठक की अध्यक्षता सपा जिलाध्यक्ष चंद्रपाल सिंह यादव करेंगे। सपा जिला प्रवक्ता विवेक यादव ने बताया कि बैठक में वरिष्ठ नेतागण, जन प्रतिनिधि, पूर्व जिलाध्यक्ष, विधानसभा अध्यक्ष, ब्लॉक अध्यक्ष, नगर अध्यक्ष और सभी फ्रंटल संगठनों के जिला अध्यक्ष भाग लेंगे।

विद्युत पोलों में आग से बड़ी घटना टली, बिजली व्यवस्था चरमराई:

फर्रुखाबाद नगर के दो स्थानों – मोहल्ला खैराती खां और श्याम नगर – में देर रात विद्युत पोलों में आग लग गई। श्याम नगर में तो आग लगने के बाद बिजली लाइन टूटकर गिर पड़ी, जिससे घंटों तक आपूर्ति बाधित रही। आईटीआई विद्युत केंद्र की टीम ने सूचना मिलते ही दो घंटे की मशक्कत के बाद आपूर्ति बहाल की। स्थानीय निवासियों ने बताया कि गर्मी के चलते ओवरलोडिंग की समस्या लगातार बनी हुई है। पुराने तार और खंभे अब लोड नहीं झेल पा रहे हैं। कभी-कभी 5-10 मिनट के अंतराल पर बिजली आती-जाती रहती है, जिससे लोग रात भर जागने को मजबूर हैं। यदि यही घटना दिन में होती, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था।

बीते कुछ दिनों की भारी बारिश के चलते गंगा और रामगंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। दोनों नदियाँ चेतावनी बिंदु 136.60 सेमी तक पहुंच गई हैं, जबकि खतरे का निशान 137.10 सेमी है। प्रशासन के अनुसार यदि जलस्तर में थोड़ी और बढ़ोत्तरी होती है, तो गंगा पार क्षेत्र के दर्जनों गांवों में बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है। वर्तमान में तटवर्ती इलाकों में पानी भरना शुरू हो चुका है। हर वर्ष की तरह इस बार भी गंगा पार क्षेत्र के ग्रामीणों को बाढ़ की चिंता सताने लगी है। आज़ादी के 50 वर्ष बाद भी इस क्षेत्र में स्थायी बाढ़-नियंत्रण उपाय नहीं हो सके हैं, जिससे ग्रामीणों को हर साल सड़क किनारे शरण लेनी पड़ती है।

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