उत्तर प्रदेश

Farrukhabad: शहरी क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों का ‘सुनियोजित नेटवर्क’

Admindelhi1
26 April 2026 1:59 PM IST
Farrukhabad: शहरी क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों का ‘सुनियोजित नेटवर्क’
x

फर्रुखाबाद: शहरीय क्षेत्र समेत कायमगंज बाईपास के जसमई क्षेत्र, गुरसहायगंज कानपुर बघार और इटावा बरेली हाईवे बघार के इलाकों में में बिना लेआउट पास कराए अवैध कॉलोनियों का जाल तेजी से फैल रहा है। जमीन को टुकड़ों में काटकर प्लॉट बेचे जा रहे हैं, लेकिन न तो किसी तरह की स्वीकृत योजना है और न ही बुनियादी मानकों का पालन। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन कॉलोनियों को कागजों में “अवैध” होना चाहिए, वहां तक नगर पालिका, नगर पंचायत और अन्य विकास संस्थाओं की सुविधाएं पहुंच रही हैं जो सीधे-सीधे नियमों के खिलाफ है।

जमीनी पड़ताल में सामने आया है कि जसमई बाईपास के आसपास पिछले 2–3 वर्षों में 25 से अधिक कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं, जिनमें से अधिकांश का कोई वैध लेआउट पास नहीं है। अनुमानित तौर पर 150–200 बीघा कृषि भूमि को प्लॉटिंग में बदला गया और करीब 1500 से अधिक प्लॉट काटकर बेचे गए। प्रति प्लॉट कीमत 30 से 80 लाख रुपये तक बताई जा रही है, जिससे करोड़ों रुपये का खेल खड़ा हो चुका है।

नियमों के मुताबिक किसी भी कॉलोनी को विकसित करने से पहले नक्शा (लेआउट) पास कराना अनिवार्य है, जिसमें सड़क की चौड़ाई, नाली, पार्क, जल निकासी, बिजली व्यवस्था जैसी सुविधाओं का प्रावधान तय होता है। लेकिन यहां न तो 30 फीट की सड़कें हैं, न जल निकासी का सिस्टम और न ही सार्वजनिक स्थल साफ है कि भविष्य में यहां रहने वाले लोग बुनियादी समस्याओं से जूझने को मजबूर होंगे।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कॉलोनी अवैध है, तो फिर बिजली कनेक्शन, पानी की लाइन, कूड़ा उठान जैसी सुविधाएं कैसे मिल रही हैं? सूत्रों के अनुसार, स्थानीय स्तर पर मिलीभगत के चलते इन कॉलोनियों को “धीरे-धीरे वैध” जैसा रूप दिया जा रहा है। यही वजह है कि बिल्डर बेखौफ होकर नए प्लॉट काट रहे हैं।

राजस्व और विकास विभाग की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। न तो समय पर रोक लगाई गई और न ही अब तक बड़े स्तर पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई हुई। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि सिस्टम की निगरानी कमजोर है या फिर कहीं न कहीं संरक्षण मिल रहा है।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि आज सस्ते प्लॉट के लालच में लोग खरीद तो रहे हैं, लेकिन भविष्य में सड़क, नाली, पानी और कानूनी विवाद जैसी समस्याएं उनके लिए बड़ी मुसीबत बनेंगी। कई जगहों पर पहले से ही जलभराव और रास्ते को लेकर विवाद शुरू हो चुके हैं।

कानूनी स्थिति क्या कहती है?

उत्तर प्रदेश नगर नियोजन और विकास अधिनियम के तहत बिना स्वीकृत लेआउट कॉलोनी विकसित करना दंडनीय अपराध है। इसमें जुर्माना, एफआईआर और निर्माण ध्वस्त करने तक की कार्रवाई का प्रावधान है। इसके बावजूद जमीन पर कार्रवाई नगण्य दिख रही है।

कायमगंज बाईपास जसमई क्षेत्र, इटावा बरेली हाईवे, कानपुर गुरसहायगंज बघार इलाके में चल रहा यह अवैध कॉलोनी का खेल सिर्फ जमीन की खरीद-फरोख्त नहीं, बल्कि आने वाले समय का बड़ा शहरी संकट है। अगर अभी सख्ती नहीं हुई, तो यह इलाका अनियोजित बस्तियों में बदल जाएगा जहां न सुविधाएं होंगी, न सुरक्षा और न ही कोई जवाबदेही। अब देखना होगा कि प्रशासन इस “प्लॉटिंग माफिया” पर कब तक नकेल कसता है।

Next Story