उत्तर प्रदेश

Farrukhabad: किसानों की चिंता बढ़ी, सिंचाई ठप और खाद की कालाबाजारी

Admindelhi1
19 Nov 2025 12:44 PM IST
Farrukhabad: किसानों की चिंता बढ़ी, सिंचाई ठप और खाद की कालाबाजारी
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फर्रुखाबाद: क्षेत्र के किसानों के लिए निचली गंगा नहर (Ganga canal) की पानी आपूर्ति आजीविका का मुख्य सहारा है, लेकिन इस समय नहर में पानी (water) न आने से किसान बेहद परेशान हैं। एक ओर आलू, सरसों, मटर और सब्जियों की फसल तैयार अवस्था में है, वहीं दूसरी ओर गेहूँ बुवाई की तैयारियाँ भी पूरी रफ्तार पर हैं। ऐसे में सिंचाई के अभाव ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

नहर विभाग द्वारा सिल्ट सफाई का कार्य बरसात के बाद शुरू तो किया गया, पर लंबा समय बीत जाने के बावजूद भी कार्य अधूरा होने से पानी आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी। किसान इसे विभाग की घोर लापरवाही बता रहे हैं। नहर में पानी नहीं… फसलें सूखने के कगार पर स्थानीय किसानों राजेश कुमार, सियाराम, बबलू, संजीव कुमार, घनश्याम, उदयवीर, नितिन, रामवीर और रामप्रसाद सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि “निचली गंगा नहर ही हमारी फसलों के लिए जीवनरेखा है।”

परंतु पानी न आने से फसलें मुरझाने लगी हैं। नहर के आसपास अधिकतर क्षेत्रों में नलकूप नहीं हैं और प्राइवेट साधनों से सिंचाई बेहद महँगी पड़ रही है, जो गरीब किसानों की क्षमता से बाहर है। किसानों का कहना है कि संपन्न किसान महंगे ट्यूबवेल और डीजल पम्प के सहारे सिंचाई कर ले रहे हैं, लेकिन गरीब किसानों के खेत सूखते जा रहे हैं।

कायमगंज, झब्बूपुर, ममापुर, बरझाला, मीरपुर, पापड़ी, मिलकिया, रसीदपुर, किसरोली, फरीदपुर, सैदबाड़ा, अददूपुर, करनपुर, दललालगंज, हजियापुर, उलियापुर, परमनगर व शकरुल्लापुर सहित दर्जनों गांव निचली गंगा नहर के पानी पर निर्भर हैं। इन सभी क्षेत्रों के किसानों को सिंचाई की भीषण समस्या का सामना करना पड़ रहा है। किसानों के अनुसार बाजार में यूरिया और डीएपी की कालाबाजारी चरम पर है।

यूरिया की बोरी, जिसकी कीमत ₹270 होनी चाहिए, कई निजी खाद केंद्रों पर ₹350 में बेची जा रही है। दुकानदारों द्वारा मजबूरी में किसानों को कल्चर साथ में खरीदने के लिए भी दबाव बनाया जा रहा है। डीएपी खाद पर भी कालाबाजारी का असर देखा जा रहा है। किसानों का आरोप है कि विक्रेता “खास लोगों को खाद दे रहे हैं”, जबकि साधारण किसानों को या तो मना कर देते हैं या महंगे दामों पर खरीदने को मजबूर करते हैं।

जब इस संबंध में भारतीय किसान मजदूर यूनियन (भाकिमयू) के प्रदेश अध्यक्ष रामबहादुर राजपूत से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि बरसात के बाद नहर में सिल्ट सफाई का काम शुरू हुआ है और अभी जारी है। नहर विभाग से वार्ता की गई है और दिसंबर के आसपास पानी आने की संभावना बताई गई है।उन्होंने आश्वासन दिया कि आगामी जिला किसान दिवस कार्यक्रम में इन समस्याओं को प्रमुखता से उठाया जाएगा।

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