उत्तर प्रदेश

Farrukhabad: मकर संक्रांति पर गंगा तट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

Admindelhi1
15 Jan 2026 4:36 PM IST
Farrukhabad: मकर संक्रांति पर गंगा तट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
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फर्रुखाबाद: मकर संक्रांति के उपलक्ष्य में गुरुवार को भी श्रद्धा, भक्ति और आस्था और दान पुण्य का संगम देखने को मिलता रहा। गत दिवस एकादशी होने कारण खिचड़ी भोज नहीं हुए थे ।इस कारण से गुरुवार को जगह जगह खिचड़ी भोज के साथ सूर्य उत्तरायण पर्व मनाया गया।

इसी दौरान मिनी कुंभ के नाम से प्रसिद्ध इस मेला राम नगरिया में में जिले ही नहीं बल्कि आसपास के कई जनपदों एवं दूर-दराज क्षेत्रों से आए हजारों श्रद्धालुओं ने गंगा तट पर पहुंचकर पुण्य स्नान किया। ब्रह्म मुहूर्त से ही गंगा घाटों पर स्नानार्थियों की लंबी कतारें लग गईं और “हर-हर गंगे” व “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।

श्रद्धालुओं ने गंगा में डुबकी लगाने के उपरांत विधि-विधान से पूजन-अर्चन, हवन, तर्पण और दान-पुण्य किया। कई श्रद्धालुओं ने जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और दान-दक्षिणा देकर पुण्य लाभ अर्जित किया। सुबह से लेकर देर शाम तक गंगा तट पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही और स्नान का क्रम निरंतर चलता रहा। गंगा तट पर प्रशिक्षित गोताखोरों की तैनाती की गई , ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से समय रहते निपटा जा सके। प्रशासनिक अधिकारी लगातार घाटों का निरीक्षण करते रहे और सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए रखी। महिला श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अलग स्नान स्थल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी की गईं।

मेला रामनगरिया में चल रहे धार्मिक पर्व के तहत हजारों की संख्या में श्रद्धालु गंगा तट पर रहकर कल्पवास कर रहे हैं। मेला क्षेत्र में जगह-जगह सरकारी एवं गैर-सरकारी पंडाल लगाए गए हैं, जहां रामधुन, भजन-कीर्तन और धार्मिक कथाओं का आयोजन किया जा रहा है। संत-महात्माओं के प्रवचनों और कथाओं को सुनने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। पूरे मेला परिसर में धार्मिक कार्यक्रमों के चलते आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है।

मकर संक्रांति के महा स्नान के अवसर पर साधु-संतों और विभिन्न अखाड़ों द्वारा अलग-अलग समय पर शाही स्नान किया गया। संतों के शाही स्नान को देखने के लिए श्रद्धालु घंटों पहले ही गंगा घाटों पर जमा हो गए। ढोल-नगाड़ों, शंख-नाद और जयकारों के बीच साधु-संतों ने गंगा में स्नान कर धर्म और आस्था का संदेश दिया। संत समाज की उपस्थिति ने मेले की गरिमा को और बढ़ा दिया।

मेला रामनगरिया मकर संक्रांति के दिन वास्तव में मिनी कुंभ के स्वरूप में नजर आया। दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं, संतों और कल्पवासियों की भीड़, गंगा तट पर फैली आस्था और भक्ति की छटा ने इस पर्व को ऐतिहासिक बना दिया। श्रद्धालुओं का कहना था कि रामनगरिया मेला हर वर्ष उन्हें आध्यात्मिक शांति और पुण्य लाभ का अवसर प्रदान करता है।

कुल मिलाकर मकर संक्रांति का यह पर्व आस्था, अनुशासन और सुरक्षा के बीच शांतिपूर्वक संपन्न हुआ, जिसने एक बार फिर मेला रामनगरिया की धार्मिक महत्ता और परंपरा को जीवंत कर दिया।

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