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Farrukhabad: IGRS पोर्टल के दुरुपयोग का आरोप, अवधेश पर उठे सवाल

फर्रुखाबाद: जनपद में आईजीआरएस और अन्य शिकायत मंचों के जरिए लगातार उच्चाधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाने वाले शातिर अपराधी अवधेश मिश्रा की गतिविधियां अब खुद कठघरे में हैं। प्रशासनिक और कानूनी हलकों में चर्चा है कि शिकायतों की आड़ में न केवल पुलिस अधीक्षक और पुलिस कर्मियों की छवि बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है, बल्कि अधिवक्ता समुदाय और पत्रकारों को भी निशाने पर लिया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, अवधेश के विरुद्ध जनपद और आसपास के क्षेत्रों में करीब 10 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं। इन मुकदमों में गंभीर धाराओं का उल्लेख होने की भी चर्चा है। हालांकि आधिकारिक रिकॉर्ड की पुष्टि संबंधित विभाग ही कर सकता है, लेकिन प्रशासनिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि जिस व्यक्ति पर खुद इतने प्रकरण दर्ज हों, वह किस नैतिक आधार पर लगातार दूसरों की छवि पर प्रहार कर रहा है?
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि अवधेश मिश्रा का नाम चर्चित माफिया अनुपम दुबे के करीबी सहयोगियों में लिया जाता रहा है। आरोप है कि वह कथित रूप से माफिया तंत्र के हितों की रक्षा के लिए शिकायतों और आरोपों का इस्तेमाल दबाव की रणनीति के तौर पर करता है।
यदि इन चर्चाओं में तथ्य हैं तो यह बेहद गंभीर विषय है, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि जन शिकायत प्रणाली का दुरुपयोग कर प्रशासनिक अधिकारियों को अस्थिर करने की कोशिश की जा सकती है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या खंडन अभी तक सामने नहीं आया है।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि पुलिस अधीक्षक और अन्य अधिकारियों के खिलाफ बार-बार शिकायतें भेजना एक पैटर्न का हिस्सा होता है। हर शिकायत की जांच के बाद कई मामलों में आरोप निराधार पाए जाने की बात कही जा रही है।
अधिवक्ता समुदाय के कुछ सदस्यों का कहना है कि बिना ठोस प्रमाण सार्वजनिक आरोप लगाना न केवल व्यक्तिगत प्रतिष्ठा पर आघात है, बल्कि न्याय व्यवस्था की गरिमा को भी प्रभावित करता है। पत्रकार संगठनों से जुड़े लोगों का भी मत है कि मीडिया कर्मियों को अनावश्यक रूप से विवादों में घसीटना प्रेस की स्वतंत्रता पर अप्रत्यक्ष दबाव का संकेत हो सकता है।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर झूठी शिकायतें करता है और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत करता है, तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई संभव है। भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराएं और आईटी एक्ट के प्रावधान ऐसे मामलों में लागू हो सकते हैं।





