उत्तर प्रदेश

Farrukhabad: आरती सिंह के एक साल में अपराधियों पर कसा शिकंजा

Admindelhi1
24 April 2026 1:58 PM IST
Farrukhabad: आरती सिंह के एक साल में अपराधियों पर कसा शिकंजा
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फर्रुखाबाद: कानून-व्यवस्था को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहने वाले फर्रुखाबाद में पिछले एक साल में पुलिसिंग का स्वरूप बदलता नजर आया है। पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने 24 अप्रैल को अपने कार्यकाल का एक वर्ष पूरा किया और इस दौरान “जीरो टॉलरेंस” नीति के साथ सख्त, जवाबदेह और परिणामोन्मुख पुलिसिंग का मॉडल स्थापित करने का दावा मजबूत किया है।

पदभार संभालते ही एसपी ने विभाग के भीतर साफ संदेश दिया था,लापरवाही, भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी। इसी का असर रहा कि रिश्वतखोरी में लिप्त कई पुलिसकर्मियों पर सीधे कार्रवाई हुई। निलंबन से लेकर मुकदमा दर्ज कर जेल भेजने तक की कार्रवाई ने विभाग में स्पष्ट संदेश दिया कि अब ढिलाई की कोई गुंजाइश नहीं है। क़ायमगंज मे तो खाकी जीएसटी विभाग पर भी भारी है, तम्बाकू व्यापार पर घोटालेवाजों को खुद वादी बनकर मुक़दमे लिख राजस्व की चोरी पर अंकुश लगाए है, जिससे अब जीएसटी विभाग के सुस्त रवैये की पोल खुलने लगी है।

अपराध नियंत्रण के मोर्चे पर भी पुलिस ने कई हाई-प्रोफाइल मामलों में तेजी दिखाई। मोहम्मदाबाद क्षेत्र में जघन्य घटना के आरोपी को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराने की कार्रवाई ने अपराधियों के बीच सख्त संदेश पहुंचाया। वहीं कायमगंज में बुजुर्ग दंपति हत्याकांड का खुलासा कर अभियुक्तों की गिरफ्तारी और जहानगंज क्षेत्र में बीएससी छात्रा हत्या प्रकरण का अनावरण, दोनों मामलों में त्वरित कार्रवाई को पुलिस की बड़ी सफलता माना गया।

इस पूरे कार्यकाल में सबसे अलग और प्रभावी पहल रही जनसुनवाई प्रणाली। एसपी आरती सिंह ने न केवल कार्यालय में बल्कि कई बार फील्ड में जाकर भी फरियादियों की समस्याएं सुनीं। दिव्यांग, बुजुर्ग और दूर-दराज से आए लोगों के मामलों को प्राथमिकता देकर मौके पर ही निस्तारण के निर्देश दिए गए। थाना स्तर पर शिकायतों के त्वरित और निष्पक्ष समाधान पर जोर दिया गया, जिससे आम जनता के बीच पुलिस की छवि में सुधार देखने को मिला।

न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए ‘ऑपरेशन कनविक्शन’ के तहत अभियोजन की पैरवी को धार दी गई। इसके परिणामस्वरूप कई मामलों में अपराधियों को सजा दिलाई गई, जिससे पीड़ितों को न्याय मिला और कानून का भय भी स्थापित हुआ। साथ ही साइबर अपराधों पर नियंत्रण के लिए विशेष अभियान चलाकर जागरूकता बढ़ाई गई और कई मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी कर पीड़ितों को राहत दिलाई गई।

महिला सुरक्षा, रात्रि गश्त, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की सक्रियता और त्योहारों के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी रणनीतिक स्तर पर काम किया गया। सामुदायिक पुलिसिंग के जरिए जनता और पुलिस के बीच संवाद बढ़ाने का प्रयास किया गया, जिससे विश्वास की खाई कम होती दिखी।

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