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Kanwar यात्रा में किसान दंपती ने बेटियों को दिया सम्मान, लोग हुए भावुक

हापुड़ : उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले से कांवड़ यात्रा के दौरान आस्था और सामाजिक संदेश की एक बेहद भावुक तस्वीर सामने आई है। सावन के पवित्र महीने में जहां लाखों श्रद्धालु हरिद्वार और अन्य तीर्थ स्थानों से गंगाजल लेकर भगवान शिव का जलाभिषेक करने के लिए अपने घरों की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं अलीगढ़ के रहने वाले एक किसान दंपती ने अपनी कांवड़ यात्रा को बेटियों के सम्मान और समाज में जागरूकता फैलाने का माध्यम बना दिया।
इस अनोखी कांवड़ यात्रा ने लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। किसान दंपती ने अपनी कांवड़ के एक पलड़े में पवित्र गंगाजल रखा तो दूसरे पलड़े में अपनी बेटी और भांजी को बैठाया। कंधे पर कांवड़ उठाकर जब यह दंपती हापुड़ के रास्ते से गुजर रहा था, तो लोगों की नजरें इस अनोखे दृश्य पर टिक गईं। कई लोग भावुक हो गए और उन्होंने इसे आधुनिक समय का श्रवण कुमार जैसा उदाहरण बताया।
आमतौर पर कांवड़ यात्रा में श्रद्धालु कंधों पर गंगाजल लेकर लंबी दूरी तय करते हैं। लेकिन इस किसान दंपती ने अपनी यात्रा को केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसके जरिए समाज को एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की। उनका कहना है कि बेटियां परिवार की खुशहाली और समाज की ताकत होती हैं। बेटियों को सम्मान, शिक्षा और समान अवसर देना हर माता-पिता की जिम्मेदारी है।
किसान दंपती ने संदेश दिया कि "बेटी बचेगी, तभी देश आगे बढ़ेगा।" उन्होंने कहा कि आज के समय में बेटियों को बोझ नहीं बल्कि परिवार का गौरव समझने की जरूरत है। जिस तरह लोग भगवान शिव की भक्ति में गंगाजल को पवित्र मानकर सम्मान देते हैं, उसी तरह बेटियों का भी सम्मान होना चाहिए।
हापुड़ में कांवड़ मार्ग से गुजरते समय इस अनोखी कांवड़ को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे। राहगीरों ने रुककर किसान दंपती और उनकी बेटियों को देखा। कई लोगों ने इस पल को अपने मोबाइल कैमरे में कैद किया। देखते ही देखते इस यात्रा के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी वायरल होने लगीं।
लोगों ने किसान दंपती के इस प्रयास की जमकर सराहना की। सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे आस्था के साथ सामाजिक जिम्मेदारी का बेहतरीन उदाहरण बताया। कई लोगों का कहना है कि धार्मिक यात्राएं केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इनके जरिए समाज में अच्छे संदेश भी पहुंचाए जा सकते हैं।
कांवड़ यात्रा के दौरान इस तरह का संदेश देना खास माना जा रहा है, क्योंकि सावन के महीने में बड़ी संख्या में लोग धार्मिक आयोजनों से जुड़े रहते हैं। ऐसे समय में बेटियों के सम्मान का संदेश समाज के हर वर्ग तक आसानी से पहुंच सकता है।
किसान दंपती का कहना है कि उन्होंने यह कदम किसी दिखावे के लिए नहीं बल्कि बेटियों के प्रति अपने प्रेम और सम्मान को व्यक्त करने के लिए उठाया है। उनका उद्देश्य लोगों को यह बताना है कि बेटियां परिवार की जिम्मेदारी नहीं बल्कि परिवार की पहचान होती हैं।
इस अनोखी कांवड़ यात्रा ने जहां धार्मिक आस्था को दर्शाया, वहीं समाज में बेटियों के महत्व को लेकर एक सकारात्मक संदेश भी दिया। कांवड़ यात्रा के बीच सामने आई यह तस्वीर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है और कई लोग इसे सावन की सबसे खास तस्वीरों में से एक बता रहे हैं।





