उत्तर प्रदेश

सम्मान पाकर भावुक हुए विभाजन पीड़ित परिवार

Ratna Netam
14 Aug 2026 8:50 PM IST
सम्मान पाकर भावुक हुए विभाजन पीड़ित परिवार
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बिजनौर। उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में शुक्रवार 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर भावपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किया गया। विकास भवन सभागार में हुए समारोह के दौरान वर्ष 1947 के विभाजन की त्रासदी झेलने वाले परिवारों के संघर्ष साहस और त्याग को याद किया गया। कार्यक्रम में जिले के 35 विभाजन पीड़ित परिवारों के सदस्यों को शॉल ओढ़ाकर और माला पहनाकर सम्मानित किया गया।
मुख्य समारोह से पहले विभाजन प्रभावित परिवारों और जिले के गणमान्य लोगों ने सिविल लाइंस स्थित गुरुद्वारे से विकास भवन तक मौन जुलूस निकाला। जुलूस में शामिल लोगों ने विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले नागरिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। हाथों में स्मृति संदेश लेकर चल रहे लोगों ने सामाजिक एकता आपसी भाईचारे और देश की अखंडता बनाए रखने का संदेश दिया। मौन जुलूस विकास भवन पहुंचने के बाद सभागार में मुख्य कार्यक्रम शुरू हुआ।
समारोह में विधान परिषद सदस्य मोहित बेनीवाल पूर्व सांसद कुमार भारतेंदु पूर्व विधायक कमलेश सैनी जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र प्रताप सिंह भाजपा जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौहान और जिलाधिकारी जसजीत कौर सहित कई जनप्रतिनिधि अधिकारी तथा सामाजिक संगठनों के लोग मौजूद रहे। अतिथियों ने विभाजन की त्रासदी से प्रभावित परिवारों के सदस्यों को शॉल ओढ़ाकर और माला पहनाकर सम्मानित किया।
सम्मान प्राप्त करते समय कई परिवारों के सदस्य भावुक हो गए। उन्होंने वर्ष 1947 में अपने परिवारों के साथ हुई घटनाओं और विस्थापन के दर्द को याद किया। कुछ सदस्यों ने मंच से बताया कि विभाजन के समय उनके पूर्वजों को अपना घर जमीन कारोबार और वर्षों से जुड़ी यादें छोड़कर पलायन करना पड़ा था। अनिश्चितता और हिंसा के उस दौर में अनेक परिवार बिछड़ गए और बड़ी संख्या में लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया।
पीड़ित परिवारों के सदस्यों ने बताया कि नए स्थान पर पहुंचने के बाद उनके पूर्वजों के सामने जीवन को दोबारा शुरू करने की बड़ी चुनौती थी। रहने के लिए घर और आजीविका के साधन नहीं होने के बावजूद उन्होंने मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से अपने परिवारों को संभाला। उनके अनुभव सुनकर सभागार में मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। उपस्थित लोगों ने विभाजन के दौरान मारे गए नागरिकों की स्मृति में श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि भारत का विभाजन केवल इतिहास की एक घटना नहीं है। यह लाखों परिवारों की पीड़ा विस्थापन और संघर्ष से जुड़ी ऐसी स्मृति है जिसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है। विभाजन के समय हुए पलायन ने लोगों से उनके घर संपत्ति और परिवार छीन लिए थे लेकिन तमाम कठिनाइयों के बावजूद विस्थापित परिवारों ने नए जीवन की शुरुआत की और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
वक्ताओं ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उद्देश्य उस त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि देना और विस्थापन का दर्द झेलने वाले परिवारों के संघर्ष को सम्मान प्रदान करना है। इतिहास की ऐसी घटनाएं समाज को हिंसा और नफरत के दुष्परिणामों से परिचित कराती हैं। साथ ही वे सामाजिक सौहार्द राष्ट्रीय एकता और भाईचारे को मजबूत बनाने की प्रेरणा देती हैं।
जिलाधिकारी जसजीत कौर ने कहा कि विभाजन की त्रासदी झेलने वाले परिवारों का साहस और संघर्ष नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी है। इन परिवारों ने विषम परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी। उन्होंने अपने परिश्रम और दृढ़ संकल्प के आधार पर जीवन को फिर से खड़ा किया। साथ ही शिक्षा कारोबार कृषि और अन्य क्षेत्रों में काम करते हुए राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दिया।
जिलाधिकारी ने सम्मानित परिवारों के प्रति आदर और कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि उनके अनुभवों को संरक्षित किया जाना चाहिए। नई पीढ़ी को यह जानना जरूरी है कि देश की आजादी के साथ लाखों लोगों ने विस्थापन और बिछड़ने का दर्द भी सहा था। परिवारों की आपबीती इतिहास को मानवीय दृष्टिकोण से समझने का अवसर प्रदान करती है।
कार्यक्रम के अंत में विभाजन की त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों और पीड़ित परिवारों के प्रति भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उपस्थित जनप्रतिनिधियों अधिकारियों और नागरिकों ने समाज में सौहार्द बनाए रखने तथा देश की एकता और अखंडता को मजबूत करने का संकल्प लिया।
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