उत्तर प्रदेश

कूरियर के जरिए पहुंच रही थीं नकली दवाएं, जांच में सामने आया बड़ा नेटवर्क

nidhi
3 Oct 2026 10:38 AM IST
कूरियर के जरिए पहुंच रही थीं नकली दवाएं, जांच में सामने आया बड़ा नेटवर्क
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आगरा में नकली दवाओं का नेटवर्क उजागर
आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में नकली दवाओं की सप्लाई से जुड़ा बड़ा मामला सामने आया है। नकली दवाओं को कथित तौर पर बिल जारी करने के बाद कूरियर के जरिए अलग-अलग स्थानों पर भेजा जा रहा था। मामले का खुलासा होने के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। सिंडिकेट के कथित सरगना हिमांशु अग्रवाल से जुड़े गोदामों की भी जांच की जा रही है।
मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात नकली दवाओं की सप्लाई के तरीके को लेकर सामने आई है। कथित तौर पर दवाओं के लिए बाकायदा बिल तैयार किए जाते थे और इसके बाद पैकेट बनाकर उन्हें कूरियर के माध्यम से भेजा जाता था। इससे दवाओं की आवाजाही सामान्य कारोबारी सप्लाई जैसी दिखाई देती थी। अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि दवाएं किन-किन स्थानों पर भेजी गईं और इस नेटवर्क से कितने लोग जुड़े हुए थे। कूरियर से भेजे गए पैकेट, उनसे जुड़े बिल और अन्य दस्तावेज पूरे नेटवर्क तक पहुंचने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
जांच के केंद्र में सिंडिकेट के कथित सरगना हिमांशु अग्रवाल के गोदाम भी हैं। गोदामों में रखे स्टॉक और दस्तावेजों की जांच से यह पता लगाया जा सकता है कि वहां किस तरह की दवाएं रखी गई थीं और उनकी खरीद-बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड क्या बताते हैं। इसके अलावा दवाओं के बैच नंबर और अन्य विवरणों की भी जांच महत्वपूर्ण होगी। नकली दवाओं का कारोबार केवल आर्थिक अपराध का मामला नहीं है, बल्कि यह सीधे लोगों की सेहत और जीवन से जुड़ा गंभीर विषय है। मरीज बीमारी से राहत पाने के लिए डॉक्टर की सलाह पर दवाओं का सेवन करते हैं। यदि उन्हें असली दवा के स्थान पर नकली या मानकों पर खरी नहीं उतरने वाली दवा मिल जाए तो इलाज प्रभावित हो सकता है।
यही कारण है कि नकली दवाओं से जुड़े मामलों में सप्लाई चेन की जांच बेहद महत्वपूर्ण होती है। दवा कहां तैयार हुई, किसके जरिए गोदाम तक पहुंची और इसके बाद किन दुकानों या दूसरे स्थानों पर भेजी गई, इन सभी कड़ियों को जोड़कर पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सकता है। बिल जारी कर दवाएं भेजे जाने की बात सामने आने के बाद जांच में कारोबारी दस्तावेजों की भूमिका भी अहम हो गई है। बिलों पर दर्ज फर्म, पता, मात्रा और अन्य जानकारियों का मिलान किया जा सकता है। इससे यह पता चल सकता है कि कागजों पर दिखाई गई खरीद-बिक्री और वास्तविक सप्लाई के बीच कोई अंतर था या नहीं।
कूरियर कंपनियों से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। पैकेट कहां से बुक किए गए, उन्हें किस पते पर भेजा गया और किसने प्राप्त किया, जैसी जानकारियां नेटवर्क की अगली कड़ी तक पहुंचने में मदद कर सकती हैं। हिमांशु अग्रवाल से जुड़े बताए जा रहे गोदामों की जांच के दौरान वहां मिलने वाली दवाओं के नमूने भी अहम होंगे। दवाओं की वास्तविकता और गुणवत्ता की पुष्टि संबंधित जांच के बाद ही हो सकेगी। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि सप्लाई का दायरा कितना बड़ा था।
आगरा में सामने आए इस मामले ने दवा कारोबार की निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। अगर नकली दवाएं बिल और कूरियर जैसी सामान्य कारोबारी व्यवस्था का इस्तेमाल करके भेजी जा रही थीं तो यह नेटवर्क लंबे समय तक पकड़ से बच सकता था। फिलहाल पूरे मामले की जांच आगे बढ़ रही है। गोदामों, बिलों और कूरियर के जरिए हुई सप्लाई से जुड़े रिकॉर्ड के आधार पर नेटवर्क की परतें खोलने की कोशिश की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही नकली दवाओं की मात्रा, सप्लाई के दायरे और सिंडिकेट से जुड़े अन्य लोगों की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
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