उत्तर प्रदेश

UP बार काउंसिल की जांच में खुला फर्जी डिग्री मामला

Ratna Netam
10 Aug 2026 2:25 PM IST
UP  बार काउंसिल की जांच में खुला फर्जी डिग्री मामला
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प्रयागराज : उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में फर्जी शैक्षिक दस्तावेजों के आधार पर अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराने का गंभीर मामला सामने आया है। बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर सिविल लाइंस थाने में 26 अधिवक्ताओं के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि इन अधिवक्ताओं ने अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराने के लिए जिन शैक्षिक दस्तावेजों का इस्तेमाल किया, सत्यापन के दौरान उनकी डिग्री और अंकपत्र संबंधित विश्वविद्यालयों के रिकॉर्ड में फर्जी या गलत पाए गए। पुलिस ने एफआईआर दर्ज करने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश की ओर से दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया के दौरान कई अधिवक्ताओं की शैक्षिक योग्यता से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कराई गई थी। विश्वविद्यालयों से प्राप्त सत्यापन रिपोर्ट में कुछ दस्तावेजों के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद संबंधित अधिवक्ताओं को बार काउंसिल की सत्यापन समिति की ओर से अलग-अलग तारीखों में नोटिस जारी किए गए। नोटिस के जरिए उनसे दस्तावेजों और उनकी शैक्षिक योग्यता को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया था।
सूत्रों के मुताबिक, बार काउंसिल की ओर से 50 से अधिक अधिवक्ताओं के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी गई है। फिलहाल 26 अधिवक्ताओं के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में नामजद मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। बाकी मामलों में भी पुलिस की ओर से रिपोर्ट दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि, पूरे मामले में आरोपों की वास्तविकता पुलिस जांच और विवेचना पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित फर्जी डिग्री और अंकपत्र किस स्तर पर तैयार किए गए थे और उन्हें अधिवक्ता पंजीकरण के दौरान किस तरह इस्तेमाल किया गया। विवेचना के दौरान संबंधित विश्वविद्यालयों से दस्तावेजों की दोबारा पुष्टि कराई जा सकती है। इसके अलावा आरोपित अधिवक्ताओं से भी पूछताछ किए जाने की संभावना है। जांच में यह भी सामने लाया जाएगा कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने या उनका इस्तेमाल करने में अन्य किसी व्यक्ति या संस्था की भूमिका थी या नहीं।
इस मामले ने अधिवक्ताओं के पंजीकरण और शैक्षिक दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। बार काउंसिल की ओर से किए जा रहे सत्यापन को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दस्तावेजों की जांच के दौरान सामने आई विसंगतियों के आधार पर अब कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है।
इसी बीच इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ के एक कांस्टेबल से जुड़े पुराने मामले में भी महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कांस्टेबल देवेंद्र मिश्रा की याचिका खारिज करते हुए उनकी सेवा से बर्खास्तगी और छह महीने के सश्रम कारावास की सजा को बरकरार रखा है। मामला वर्ष 2001 का है। उस समय देवेंद्र मिश्रा बीएसएफ में कांस्टेबल के पद पर तैनात थे।
10 मई 2001 को उनकी प्लाटून के लांस नायक पवन कुमार ने उन्हें बीओपी सावना पर ड्यूटी सौंपी थी। इसी दौरान कांस्टेबल ने अपनी राइफल लांस नायक की ओर तान दी और कथित तौर पर जान से मारने की धमकी दी। घटना के बाद उनके खिलाफ समरी कोर्ट मार्शल की कार्रवाई शुरू की गई। 18 मई 2001 को कोर्ट मार्शल की कार्यवाही के दौरान उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था। उन्होंने गवाह पेश करने का अवसर भी स्वेच्छा से छोड़ दिया था। इसके बाद उन्हें छह महीने के सश्रम कारावास और सेवा से बर्खास्तगी की सजा दी गई थी। हाईकोर्ट ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी और सजा को बरकरार रखा।
वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक अन्य मामले में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड के कर्मचारी गुलाब को राहत दी है। अदालत ने उनके स्थानांतरण आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। याची प्रयागराज के करैलाबाग डिवीजन, करेली सर्किल-1 में टेक्नीशियन ग्रेड-2 यानी सब-स्टेशन ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने प्रबंध निदेशक, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड, वाराणसी की ओर से 14 जुलाई 2026 को जारी स्थानांतरण आदेश को चुनौती दी थी।
हाईकोर्ट ने मामले में प्रबंध निदेशक वाराणसी को निर्देश दिया है कि वह कर्मचारी की ओर से दिए गए प्रत्यावेदन पर तीन महीने के भीतर निर्णय लें। अदालत ने स्पष्ट किया है कि तब तक 14 जुलाई 2026 का स्थानांतरण आदेश प्रभावी नहीं होगा। इस तरह प्रयागराज से जुड़े इन मामलों में जहां फर्जी शैक्षिक दस्तावेजों के आधार पर अधिवक्ता पंजीकरण के मामले में पुलिस जांच आगे बढ़ रही है, वहीं हाईकोर्ट के अलग-अलग फैसलों में बीएसएफ कर्मचारी की बर्खास्तगी बरकरार रखने और विद्युतकर्मी के स्थानांतरण पर रोक लगाने के आदेश भी सामने आए हैं।
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