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उत्तर प्रदेश
मुस्कान की बेटी की जिम्मेदारी लेने आगे आए फैजान अंसारी, अदालत में दी अर्जी
nidhi
22 Oct 2026 7:39 AM IST

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मासूम राधा की मदद के लिए आगे आए फैजान
मेरठ: सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी को मौत की सजा सुनाए जाने के बाद उसकी छोटी बेटी की देखभाल को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मुंबई के सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर फैजान अंसारी ने बच्ची के पालन-पोषण की जिम्मेदारी उठाने की पेशकश की है। बुधवार को मेरठ पहुंचे फैजान ने जिला जज की अदालत में प्रार्थना पत्र देकर बच्ची की शिक्षा, इलाज और अन्य जरूरतों का खर्च वहन करने की अनुमति मांगी। उन्होंने विवाह तक उसकी आर्थिक जिम्मेदारी निभाने की इच्छा जताई है। हालांकि, उनकी पेशकश को मंजूरी मिलने या बच्ची की अभिरक्षा बदलने का कोई आदेश सामने नहीं आया है। खबरों में बच्ची की उम्र लगभग दस महीने और नाम मन्नत उर्फ राधा बताया गया है। वह फिलहाल अपनी मां के साथ मेरठ जिला जेल में रह रही है। फैजान का कहना है कि मुस्कान और उसकी बेटी से संबंधित जानकारी सामने आने के बाद उन्होंने बच्ची की मदद करने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने अपनी कानूनी टीम से चर्चा की और फिर मेरठ आकर आवेदन दिया। उनकी पहल अभी एक प्रस्ताव है, जिस पर आगे की कार्रवाई संबंधित प्रक्रिया के अनुसार ही हो सकती है।
पढ़ाई, इलाज और परवरिश का खर्च उठाने की इच्छा
फैजान ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वह बच्ची के भविष्य को सुरक्षित बनाने में सहयोग करना चाहते हैं। उन्होंने पालन-पोषण के साथ शिक्षा और विवाह तक खर्च उठाने की बात कही। उनके मुताबिक, अपनी आर्थिक स्थिति से जुड़े विवरण भी कानूनी टीम के माध्यम से प्रस्तुत किए जा रहे हैं। वह चाहते हैं कि उनकी आर्थिक क्षमता की जांच की जाए, ताकि जिम्मेदारी निभाने की उनकी योग्यता स्पष्ट हो सके। यह दावा फैजान की ओर से किया गया है; आर्थिक क्षमता पर किसी आधिकारिक निष्कर्ष की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
उनकी पेशकश के दो पहलुओं को अलग समझना जरूरी है। पहला, बच्ची की जरूरतों के लिए आर्थिक सहायता देना और दूसरा, उसकी अभिरक्षा अथवा अभिभावक की जिम्मेदारी प्राप्त करना। किसी व्यक्ति का खर्च उठाने के लिए तैयार होना अपने आप उसे बच्ची को साथ रखने का अधिकार नहीं देता। इस मामले में अभी सहायता की इच्छा और अदालत में आवेदन दिए जाने की जानकारी है। बच्ची उन्हें सौंप दी गई है या गोद लेने की प्रक्रिया पूरी हो गई है, ऐसा कोई पुष्ट विवरण सामने नहीं आया है।
अर्जी पर निर्णय की पुष्टि नहीं
मेरठ पहुंचने के बाद फैजान ने स्थानीय वकीलों से संपर्क किया। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने बच्ची की जिम्मेदारी लेने के संबंध में न्यायालय में अर्जी दाखिल की है और आवश्यक औपचारिकताओं पर जानकारी जुटाई है। उन्होंने प्रशासन के सामने भी अपनी बात रखने की इच्छा जताई। फिलहाल किसी सुनवाई की निश्चित तारीख, आवेदन स्वीकार किए जाने के विस्तृत आदेश या अभिरक्षा संबंधी बदलाव की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस घटनाक्रम को मदद की पेशकश और अनुमति मांगने के स्तर पर ही देखा जाना चाहिए।
फैजान ने अपनी बातचीत में बच्ची को जेल के वातावरण से बाहर बेहतर परवरिश मिलने की इच्छा व्यक्त की। यह उनका व्यक्तिगत मत है। बच्ची के रहने की वर्तमान व्यवस्था बदलने का निर्णय केवल इसी इच्छा के आधार पर नहीं माना जा सकता। प्रस्ताव पर विचार करते समय संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध तथ्यों और लागू प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लेना होगा। आर्थिक सहयोग की पेशकश सामने आने से बच्ची की जरूरतों पर ध्यान गया है, लेकिन उसके भविष्य की व्यवस्था को लेकर अभी कोई अंतिम स्थिति घोषित नहीं हुई है।
मां की इच्छा और निर्धारित प्रक्रिया महत्वपूर्ण
जिला शासकीय अधिवक्ता के.के. चौबे ने इस मामले में प्रक्रिया संबंधी सीमाओं का उल्लेख किया है। उनके अनुसार, मां की इच्छा के बिना बच्ची को किसी दूसरे व्यक्ति के सुपुर्द करने की प्रक्रिया फिलहाल संभव नहीं है। उन्होंने निर्धारित आयु तक बच्चे के मां के साथ रहने से जुड़े प्रावधानों की भी बात कही। प्रशासन के माध्यम से आर्थिक सहायता के प्रस्ताव पर भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार विचार किए जाने का उल्लेख किया गया है। यह उनकी कानूनी राय है; इसे फैजान की अर्जी पर अदालत का फैसला नहीं माना जाना चाहिए।
इस घटनाक्रम में बच्ची की देखभाल से जुड़े प्रत्येक दावे को सावधानी से प्रस्तुत करना आवश्यक है। परिवार के किसी सदस्य का बयान, किसी मददगार की घोषणा और न्यायालय का आदेश अलग-अलग महत्व रखते हैं। जब तक अधिकृत निर्णय सामने नहीं आता, तब तक स्थायी अभिभावक तय हो जाने की बात कहना जल्दबाजी होगी। इसी तरह आवेदन का उद्देश्य आर्थिक सहायता है, अभिरक्षा है या किसी अन्य व्यवस्था की अनुमति—इसकी सटीक स्थिति आवेदन और आगे के आधिकारिक आदेश से ही स्पष्ट होगी।
सौरभ राजपूत हत्याकांड की पृष्ठभूमि
मार्च 2025 में सामने आए सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को गिरफ्तार किया गया था। यह मामला नीला ड्रम हत्याकांड के नाम से चर्चित हुआ। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने दोनों को दोषी ठहराने के बाद 14 अक्टूबर 2026 को मौत की सजा सुनाई। बच्ची की परवरिश को लेकर मौजूदा चर्चा इसी फैसले के बाद बढ़ी है। मौत की सजा सुनाए जाने और सजा का क्रियान्वयन होने को एक घटना नहीं माना जा सकता; यहां खबर अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने की है। फैजान का कहना है कि अपराध के लिए दोषियों की जवाबदेही अपनी जगह है, लेकिन उसका असर बच्ची के भविष्य पर नहीं पड़ना चाहिए। इसी आधार पर उन्होंने मदद की पेशकश की है। उनकी घोषणा ने मामले में बच्ची की शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षित परवरिश से जुड़े प्रश्नों को सामने रखा है। आगे यह देखना होगा कि प्रस्ताव को लेकर प्रशासन या अदालत की ओर से क्या अधिकृत जानकारी जारी होती है। फिलहाल पुष्ट स्थिति यही है कि फैजान ने जिम्मेदारी उठाने की इच्छा जताई है और अनुमति मांगी है।
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