उत्तर प्रदेश

हिन्दी साहित्य में आदिकाल का समझाया महत्व

Admin Delhi 1
10 Feb 2023 11:30 AM GMT
हिन्दी साहित्य में आदिकाल का समझाया महत्व
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मथुरा न्यूज़: आरसीए कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिंदी विभाग तथा साहित्यिक क्लब के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अतिथि व्याख्यान में जहां छात्राओं की तमाम जिज्ञासाओं का समाधान किया गया, वहीं हिन्दी साहित्य में आदिकाल का महत्व समझाया गया.

हिंदी साहित्य का आदिकाल पुनर्विचार विषयक अतिथि व्याख्यान मुख्यवक्ता के रूप में अलीगढ़ मुस्लिम विवि की सहायक प्राध्यापक डॉ. दीप शिखा सिंह ने कहा कि आदिकाल हिंदी साहित्य की नींव है. आधुनिक सभी उत्तर भारतीय भाषाओं का जन्म अपभ्रंश से हुआ है. इसी अपभ्रंश और लोक बोलियों का साहित्य आदिकाल में रचा गया. लोक बोलियों के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक काल से पूर्व हिंदी काव्य की सबसे बड़ी भाषा ब्रजभाषा रही है. आदिकालीन साहित्य के विषय में बताते हुए उन्होंने कहा कि आदिकाल में सिद्ध, नाथ जैन और विशेष रूप से रासो काव्य लिखा गया. आदिकालीन कवियों में ही उत्तर भारत के सभी अंचल के लोग अपनी भाषा और साहित्य के पूर्वज को तलाशते हैं. आदिकाल के नामकरण संबंधी समस्याओं पर भी उन्होंने प्रकाश डाला. साहित्य में राजनीति के हस्तक्षेप पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अनेक साम्राज्यवादी शक्तियों ने जब भारत पर अधिकार किया तो अपने साम्राज्य को बनाए रखने के लिए व भारतीय जीवन को समझने के लिए अंग्रेजों द्वारा यहाँ के साहित्य, कला, धर्म, संस्कृति आदि पर विचार प्रस्तुत किए गए.

व्याख्यान के अंत में छात्राओं ने उनसे अपभ्रंश, आदिकालीन लौकिक साहित्य, आदिकालीन गद्य रचनाओं आदि से सम्बंधित महत्वपूर्ण प्रश्न किए, जिनका उत्तर देकर उन्होंने छात्राओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया. प्रारंभ में प्राचार्य डॉ. प्रीति जौहरी ने पटुका ओढ़ाकर मुख्य वक्ता का स्वागत किया. डॉ. अर्चना पाल द्वारा मुख्य वक्ता को स्मृति चिन्ह के रूप में नवांकुर भेंट किया गया. संचालन हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. पूजा राय ने किया. हिंदी विभाग से प्रतिभा का विशेष सहयोग रहा.

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