उत्तर प्रदेश

चार दशक तक पुलिस को देता रहा चकमा, वोटर आईडी अपडेट करते ही चढ़ा हत्थे

Ratna Netam
7 Aug 2026 2:38 PM IST
चार दशक तक पुलिस को देता रहा चकमा, वोटर आईडी अपडेट करते ही चढ़ा हत्थे
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कानपुर : उत्तर प्रदेश के कानपुर में करीब चार दशक पुराने एक मामले में फरार चल रहे सजायाफ्ता अपराधी को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। तीन नाबालिग किशोरियों को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने के मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी को जूही थाना पुलिस ने हाईकोर्ट में जवाब दाखिल किए जाने से ठीक एक दिन पहले दबोच लिया। आरोपी पिछले लगभग 40 वर्षों से लगातार अपना हुलिया बदलकर और ठिकाने बदलते हुए पुलिस से बचता रहा। पुलिस ने आधुनिक तकनीक, वोटर आईडी रिकॉर्ड, बीएलओ की मदद और मुखबिर तंत्र की सहायता से उसकी तलाश पूरी कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान जूही थाना क्षेत्र के साईंपुरवा कच्ची मड़ैया निवासी प्रदीप कुमार के रूप में हुई है। उसके खिलाफ वर्ष 1984 में तीन नाबालिग लड़कियों को बहला-फुसलाकर ले जाने का मामला दर्ज किया गया था। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया, जिसके बाद सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी को दोषी मानते हुए सजा सुनाई थी।
सजा के खिलाफ प्रदीप कुमार ने वर्ष 1987 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपील दाखिल की थी। अपील पर उसे राहत मिलने के बाद उसने अदालत में पेश होना बंद कर दिया और फरार हो गया। इसके बाद अदालत द्वारा उसके खिलाफ वारंट जारी किया गया, लेकिन वह लगातार अपना ठिकाना बदलकर और पहचान छिपाकर पुलिस को चकमा देता रहा। कभी वह लंबे बाल और दाढ़ी रखकर रहता था, तो कभी सिर मुंडवाकर अपनी पहचान बदल लेता था। इसी वजह से कई वर्षों तक पुलिस उसे पकड़ने में सफल नहीं हो सकी।
हाल ही में हाईकोर्ट ने इस पुराने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कानपुर पुलिस आयुक्त से जवाब मांगा था। अदालत में 7 अगस्त को जवाब दाखिल किया जाना था। इसके बाद दक्षिण जोन पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान शुरू किया। जूही थाना प्रभारी केके पटेल के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई और करीब दो महीने पहले उसकी तलाश दोबारा तेज कर दी गई।
पुलिस ने आरोपी तक पहुंचने के लिए तकनीकी और पारंपरिक दोनों तरीकों का इस्तेमाल किया। अधिकारियों ने आरोपी के पुराने वोटर आईडी कार्ड का रिकॉर्ड खंगाला और उसका ईपिक (EPIC) नंबर हासिल किया। इसके बाद यह नंबर संबंधित बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ) को उपलब्ध कराया गया। जांच में पता चला कि इसी ईपिक नंबर के आधार पर वोटर आईडी का रिकॉर्ड किदवई नगर थाना क्षेत्र की अंबेडकर बस्ती के एक पते पर अपडेट कराया गया था।
इस महत्वपूर्ण सुराग के बाद पुलिस ने स्थानीय स्तर पर मुखबिर तंत्र सक्रिय किया और आरोपी की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। पर्याप्त पुष्टि होने के बाद पुलिस ने किदवई नगर की अंबेडकर बस्ती में छापा मारकर प्रदीप कुमार को गिरफ्तार कर लिया। पहचान की पुष्टि होने के बाद उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि इस मामले में प्रदीप कुमार के अलावा उसकी पत्नी फगुनी उर्फ राजकुमारी और एक अन्य महिला भी आरोपी थीं। हालांकि, प्रदीप की पत्नी का अप्रैल 2024 में निधन हो चुका है। पूछताछ के दौरान प्रदीप ने पुलिस को अपनी पत्नी का मृत्यु प्रमाण पत्र भी सौंपा। दूसरी ओर, इस मामले की तीन पीड़िताओं में से एक की भी मृत्यु हो चुकी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इतने पुराने मामलों में भी अपराधियों को कानून के दायरे में लाना पुलिस की जिम्मेदारी है। आधुनिक तकनीक, डिजिटल रिकॉर्ड और स्थानीय सूचना तंत्र के बेहतर समन्वय से वर्षों से फरार अपराधियों तक पहुंचना अब पहले की तुलना में आसान हुआ है। इस कार्रवाई को कानपुर पुलिस की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
यह मामला इस बात का भी उदाहरण है कि कानून से लंबे समय तक बच निकलना संभव नहीं है। चार दशक तक फरार रहने और लगातार पहचान बदलने के बावजूद आरोपी आखिरकार पुलिस की गिरफ्त में आ गया। अब उसके खिलाफ लंबित कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और अदालत के निर्देशों के अनुसार मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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