उत्तर प्रदेश

सरयू के कटान से जैतपुर गांव पर मंडराया खतरा घरों से सामान हटाने लगे ग्रामीण

Kavita2
2 Sept 2026 12:10 PM IST
सरयू के कटान से जैतपुर गांव पर मंडराया खतरा घरों से सामान हटाने लगे ग्रामीण
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बड़हलगंज। पूर्वी कछार क्षेत्र में सरयू नदी का कटान अब जैतपुर गांव के लिए गंभीर खतरा बन गया है। नदी तेजी से उपजाऊ जमीन को काटते हुए आबादी की ओर बढ़ रही है। कटान की रफ्तार देखकर ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। कई परिवारों ने अपने घरों से जरूरी और कीमती सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि नदी लगातार जमीन को अपने आगोश में ले रही है, लेकिन अभी तक बचाव कार्य शुरू नहीं हुआ है। इससे लोगों में नाराजगी भी बढ़ रही है। उन्हें आशंका है कि यदि कटान इसी गति से जारी रहा तो कई मकान जल्द ही इसकी जद में आ सकते हैं।

आबादी के करीब पहुंची नदी

जैतपुर गांव में करीब 70 घर हैं। सरयू के लगातार कटान के कारण गांव की आबादी पर सीधा खतरा मंडराने लगा है। ग्रामीणों के मुताबिक, नदी पहले खेतों की जमीन काट रही थी, लेकिन अब कटान का दायरा मकानों के आसपास तक पहुंच गया है।

गांव के शिवचंद, नंदकुमार और सत्यदेव समेत कई लोगों के मकान कटान की जद में बताए जा रहे हैं। खतरे को देखते हुए इन परिवारों ने घरों से जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है।

ग्रामीणों का कहना है कि नदी का कटान अचानक तेज हुआ है। यदि समय रहते इसे रोकने के उपाय नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।

उपजाऊ जमीन नदी में समाई

कटान से जैतपुर के किसानों की बड़ी मात्रा में उपजाऊ भूमि पहले ही नदी में समा चुकी है। ग्रामीणों के अनुसार, सत्यदेव, मनोज, सिद्धू, बैजू यादव, परमा यादव, दलसिंगार, सूरत, कैलाश, शिवचंद, रमेश, नंदकुमार, नंदलाल, राजा, लल्लन, हरिकेश, गिरिजेश, श्रीभागवत और राजेश समेत कई लोगों की कृषि भूमि कटकर नदी में बह गई है।

किसानों के लिए यह नुकसान केवल जमीन जाने तक सीमित नहीं है। खेती उनकी आजीविका का प्रमुख आधार है। खेतों के नदी में समाने से कई परिवारों के सामने अब रोजीरोटी का संकट खड़ा हो गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि जिन लोगों की पूरी या अधिकांश कृषि भूमि कट चुकी है, वे अब भूमिहीन होने की स्थिति में पहुंच गए हैं।

किसानों के सामने बढ़ा संकट

कृषि भूमि के लगातार कटने से गांव के किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। खेती के लिए जमीन नहीं बचने पर परिवारों के सामने आय का स्थायी साधन खत्म होने का खतरा है।

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों की मेहनत से तैयार की गई जमीन कुछ ही समय में नदी में समा रही है। फसल उगाने और परिवार चलाने के लिए जिन खेतों पर निर्भरता थी, अब वही जमीन तेजी से खत्म हो रही है।

कटान नहीं रुका तो और परिवारों की कृषि भूमि प्रभावित होने की आशंका है।

मकान खाली करने की तैयारी

कटान आबादी के करीब पहुंचने के बाद ग्रामीण अब संभावित नुकसान से बचने की तैयारी में जुट गए हैं। जिन घरों पर खतरा मंडरा रहा है, वहां से लोग धीरे-धीरे सामान निकाल रहे हैं।

शिवचंद, नंदकुमार और सत्यदेव के मकान कटान की चपेट में आने की स्थिति में बताए जा रहे हैं। परिवारों ने जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है, ताकि अचानक कटान बढ़ने की स्थिति में उन्हें परेशानी न हो।

ग्रामीणों के लिए यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। घर छोड़ने की तैयारी उनके लिए केवल सामान सुरक्षित करने का मामला नहीं बल्कि वर्षों से बसे आशियाने को खोने का डर भी है।

बचाव कार्य शुरू नहीं होने से नाराजगी

कटान की स्थिति गंभीर होने के बावजूद ग्रामीणों का कहना है कि अभी तक प्रभावी बचाव कार्य शुरू नहीं किया गया है। लोगों में इसे लेकर नाराजगी बढ़ रही है।

ग्रामीण चाहते हैं कि प्रशासन मौके का निरीक्षण कर कटान रोकने के लिए तत्काल जरूरी कदम उठाए। उनका कहना है कि यदि नदी के बहाव को नियंत्रित करने और संवेदनशील हिस्से को सुरक्षित करने का काम समय रहते शुरू नहीं हुआ तो नुकसान काफी बढ़ सकता है।

कटान प्रभावित क्षेत्र में समय पर राहत और सुरक्षा व्यवस्था की मांग भी उठ रही है।

गांव के अस्तित्व पर खतरा

जैतपुर में करीब 70 घर होने के कारण कटान बढ़ने की स्थिति में बड़ी आबादी प्रभावित हो सकती है। फिलहाल नदी खेतों को काटते हुए गांव की ओर बढ़ रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस गति से जमीन नदी में समा रही है, उससे आने वाले समय में कई और मकानों पर खतरा मंडरा सकता है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि कटान को रोकने के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे।

गांव के लोगों को डर है कि यदि नदी का रुख नहीं बदला तो उनके घर भी सुरक्षित नहीं रहेंगे।

ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार

प्रभावित ग्रामीण प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। उनकी मांग है कि कटान प्रभावित हिस्सों का निरीक्षण कर सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।

इसके साथ ही जिन किसानों की जमीन नदी में समा चुकी है, उनके नुकसान का आकलन कराने और उचित सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी सामने आ सकती है।

ग्रामीणों का कहना है कि जमीन जाने से उनकी आजीविका प्रभावित हुई है। ऐसे परिवारों के लिए राहत और पुनर्वास की व्यवस्था जरूरी होगी।

बढ़ सकता है नुकसान

सरयू नदी का कटान लगातार जारी रहने से नुकसान का दायरा बढ़ने की आशंका है। यदि नदी आबादी के और करीब पहुंचती है तो घरों के साथ गांव के रास्ते और अन्य स्थानीय सुविधाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।

कटान की रफ्तार को देखते हुए ग्रामीणों ने पहले ही जरूरी सामान हटाना शुरू कर दिया है। यह स्थिति प्रशासन के लिए भी चेतावनी है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो राहत और बचाव कार्य और कठिन हो सकता है।

खेत गए अब घरों की बारी?

जैतपुर के ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चिंता यही है कि पहले उनकी उपजाऊ जमीन नदी में समाई और अब कटान आबादी तक पहुंच गया है। कई किसान अपनी जमीन गंवा चुके हैं और कुछ परिवारों के मकान भी खतरे की जद में बताए जा रहे हैं।

सत्यदेव, मनोज, सिद्धू, बैजू यादव, परमा यादव, दलसिंगार, सूरत, कैलाश, शिवचंद, रमेश, नंदकुमार, नंदलाल, राजा, लल्लन, हरिकेश, गिरिजेश, श्रीभागवत और राजेश समेत कई ग्रामीणों की जमीन कट चुकी है।

अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। यदि सरयू के कटान को जल्द नियंत्रित करने के उपाय नहीं किए गए तो जैतपुर में जमीन के बाद घरों पर भी संकट गहरा सकता है। ग्रामीणों के लिए यह केवल प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि आजीविका और आशियाने दोनों को बचाने की लड़ाई बन गई है।

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