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यूपी चुनाव 2027 में नए मोर्चों की एंट्री, दिव्या मित्तल से नागेश्वर राव तक बढ़ी सियासी हलचल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में अब करीब छह महीने का समय रह गया है। चुनाव नजदीक आने के साथ ही प्रदेश का राजनीतिक माहौल तेजी से बदलने लगा है। भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी जैसे स्थापित राजनीतिक दल अपनी रणनीति और संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं। इसी बीच कुछ नए चेहरे और नए राजनीतिक मंच भी सामने आने लगे हैं। पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री, रोहिणी घावरी की बढ़ती सक्रियता और पूर्व सीबीआई निदेशक एम नागेश्वर राव द्वारा नई पार्टी बनाए जाने से उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है।
सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल की राजनीतिक पारी को लेकर हो रही है। दिव्या मित्तल ने सितंबर 2026 में राजनीति में उतरने की घोषणा करते हुए उत्तर प्रदेश को अपनी राजनीतिक कर्मभूमि बताया था। उन्होंने साफ किया था कि फिलहाल वह किसी मौजूदा राजनीतिक दल में शामिल नहीं हो रही हैं और जनता के बीच जाकर नई तरह की राजनीति करना चाहती हैं। हालांकि उनकी ओर से अभी अलग राजनीतिक पार्टी बनाने की औपचारिक घोषणा नहीं की गई है।
दिव्या मित्तल उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की आईएएस अधिकारी रही हैं। प्रशासनिक सेवा में करीब 13 वर्षों तक काम करने के बाद उन्होंने इस्तीफा दिया। राजनीति में आने का ऐलान करते समय उन्होंने सरकारी व्यवस्था, जनसमस्याओं, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठाने की बात कही थी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उनका राजनीतिक अभियान आम लोगों की भागीदारी के आधार पर आगे बढ़ेगा। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उनके अगले कदम पर राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।
दूसरी तरफ रोहिणी घावरी भी प्रदेश की राजनीति में सक्रिय होती दिखाई दे रही हैं। स्विट्जरलैंड से भारत लौटने के बाद वह लगातार उत्तर प्रदेश में सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले रही हैं। रिपोर्टों के मुताबिक वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर लखनऊ तक अपनी सक्रियता बढ़ा रही हैं। रोहिणी घावरी नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद पर लगाए गए आरोपों को लेकर भी काफी चर्चा में रही हैं।
चंद्रशेखर आजाद के खिलाफ रोहिणी घावरी की ओर से लगाए गए आरोप फिलहाल विवाद और कानूनी प्रक्रिया का विषय हैं। रोहिणी ने एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर अदालत का रुख भी किया है। इन आरोपों को अंतिम रूप से साबित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता। राजनीतिक स्तर पर हालांकि उनकी सक्रियता ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या वह 2027 के विधानसभा चुनाव में किसी पार्टी या नए राजनीतिक मंच के साथ उतरेंगी।
रोहिणी घावरी की सक्रियता को खासतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की दलित राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। प्रदेश में पहले से बहुजन समाज पार्टी दलित राजनीति की प्रमुख ताकत रही है, जबकि हाल के वर्षों में चंद्रशेखर आजाद और उनकी आजाद समाज पार्टी ने भी अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाई है। ऐसे में यदि रोहिणी घावरी चुनावी राजनीति में औपचारिक रूप से उतरती हैं तो प्रदेश की दलित राजनीति में एक और नया चेहरा सामने आ सकता है। हालांकि उन्होंने अभी किसी दल से चुनाव लड़ने या अलग पार्टी बनाने की औपचारिक घोषणा नहीं की है।
इसी बीच पूर्व सीबीआई निदेशक एम नागेश्वर राव ने भी राजनीतिक मैदान में उतरते हुए सर्वजन सनातन पार्टी का गठन किया है। उनके नए राजनीतिक दल की घोषणा ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक और नया मोर्चा जोड़ दिया है। नागेश्वर राव भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी रह चुके हैं और सीबीआई में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। अब प्रशासनिक और पुलिस सेवा के लंबे अनुभव के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति की राह चुनी है।
नागेश्वर राव की पार्टी के चुनावी कार्यक्रम, उम्मीदवारों और उत्तर प्रदेश में संगठनात्मक विस्तार की तस्वीर आने वाले समय में और स्पष्ट होगी। फिलहाल उनकी पार्टी का गठन यह संकेत जरूर देता है कि विधानसभा चुनाव में मुकाबला केवल परंपरागत बड़े दलों तक सीमित नहीं रहेगा। नई पार्टियां और नए राजनीतिक चेहरे भी अपनी जगह बनाने की कोशिश करेंगे।
दूसरी ओर स्थापित दल भी चुनाव की तैयारियों में तेजी ला चुके हैं। भाजपा ने संगठन और सामाजिक समीकरणों पर अपना फोकस बढ़ाया है, जबकि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच विधानसभा चुनाव में सीट बंटवारे और चुनावी तालमेल को लेकर चर्चा चल रही है। कांग्रेस ने भी उत्तर प्रदेश संगठन में बदलाव किए हैं।
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में नए राजनीतिक दलों के लिए मजबूत संगठन खड़ा करना आसान नहीं होता। चुनाव जीतने के लिए बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं की टीम, उम्मीदवार, संसाधन और लगातार जनसंपर्क की जरूरत होती है। इसके बावजूद नए चेहरों की मौजूदगी कई सीटों पर राजनीतिक मुकाबले को बहुकोणीय बना सकती है।
फिलहाल दिव्या मित्तल, रोहिणी घावरी और एम नागेश्वर राव तीन अलग-अलग राजनीतिक धाराओं के रूप में चर्चा में हैं। इनमें से किसका संगठन कितना मजबूत होता है और कौन चुनावी मैदान में किस रूप में उतरता है, इसकी तस्वीर आने वाले महीनों में साफ होगी। इतना तय है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की सियासत में नए राजनीतिक प्रयोग और नए मोर्चों की गतिविधियां लगातार बढ़ती दिखाई दे रही हैं।





