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यूपी में नदी की जमीन पर बसा दी पूरी कॉलोनी, 400 परिवारों पर संकट, बिल्डर समेत 7 पर FIR

सीतापुर। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में केशव ग्रीन सिटी कॉलोनी को लेकर बड़ा जमीन घोटाला सामने आने का आरोप है। लक्ष्मणपुर क्षेत्र में विकसित इस कॉलोनी का निर्माण कथित तौर पर नदी और ग्राम समाज की करीब 14 बीघा से अधिक जमीन पर किया गया। हाल ही में पिरई नदी में आई बाढ़ के कारण पूरी कॉलोनी जलमग्न हो गई थी, जिसके बाद जिला प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कराई। जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर. के निर्देश पर गठित तीन सदस्यीय समिति की जांच रिपोर्ट में जमीन के उपयोग, भवन निर्माण और कॉलोनी विकसित करने की प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। रिपोर्ट के आधार पर बिल्डर मुकेश अग्रवाल समेत सात नामजद और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ रामकोट थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों में मुकदमा दर्ज किया गया है।
14 बीघा से ज्यादा नदी और ग्राम समाज की जमीन पर बसाई कॉलोनी
प्रशासनिक जांच में सामने आया कि केशव ग्रीन सिटी का निर्माण ऐसे क्षेत्र में किया गया, जिसका एक हिस्सा नदी के बहाव क्षेत्र और ग्राम समाज की जमीन से संबंधित है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, करीब 14 बीघा से अधिक जमीन के उपयोग में निर्धारित नियमों की अनदेखी की गई। जमीन का विधिवत विभाजन और स्वीकृत लेआउट तैयार किए बिना कॉलोनी विकसित करने के आरोप भी सामने आए हैं।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि नदी के प्राकृतिक बहाव क्षेत्र में आवासीय निर्माण की अनुमति कैसे मिली और संबंधित अधिकारियों ने निर्माण शुरू होने के समय इसकी जांच क्यों नहीं की।
प्रशासन अब जमीन के अभिलेखों, भू-उपयोग परिवर्तन और निर्माण स्वीकृति से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रहा है।
पिरई नदी में बाढ़ आई तो डूब गई पूरी कॉलोनी
केशव ग्रीन सिटी में कथित अनियमितताओं का मामला तब सामने आया, जब हाल ही में पिरई नदी का पानी कॉलोनी में भर गया।
बाढ़ का पानी घरों की निचली मंजिलों तक पहुंच गया, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
रिपोर्टों के अनुसार, कॉलोनी में रहने वाले करीब 400 परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा।
जलभराव से कई परिवारों का घरेलू सामान खराब हो गया। घरों में रखे फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य जरूरी वस्तुओं को नुकसान पहुंचा।
इसके अलावा एक दर्जन से अधिक कारों और कई दोपहिया वाहनों के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी भी सामने आई।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी कई परिवार अपने घरों की सफाई और बचा हुआ सामान सुरक्षित करने में जुटे रहे।
कॉलोनी में 20 करोड़ से अधिक के नुकसान का अनुमान
बाढ़ के कारण केशव ग्रीन सिटी में बड़े पैमाने पर आर्थिक नुकसान हुआ।
प्रारंभिक रिपोर्टों में कॉलोनी के निवासियों को करीब 20 करोड़ रुपये से अधिक की क्षति होने का अनुमान लगाया गया है।
कई घरों में पानी भरने से फर्नीचर, घरेलू सामान और अन्य उपकरण खराब हो गए।
निचले हिस्सों में बने मकानों में जलभराव की समस्या ज्यादा गंभीर रही। जिन परिवारों ने अपनी जमा पूंजी लगाकर मकान खरीदे थे, उनके सामने अब संपत्ति की सुरक्षा को लेकर चिंता खड़ी हो गई है।
बाढ़ की पुनरावृत्ति की आशंका के कारण कुछ किराएदारों ने दूसरे स्थानों पर रहने की व्यवस्था तलाशनी शुरू कर दी है।
डीएम ने गठित की थी तीन सदस्यीय जांच समिति
कॉलोनी में भारी जलभराव और निर्माण संबंधी शिकायतों के बाद जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर. ने जांच के निर्देश दिए थे।
इसके लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की गई थी, जिसमें अपर जिलाधिकारी न्यायिक, सिटी मजिस्ट्रेट और उपजिलाधिकारी सदर शामिल थे।
समिति ने जमीन के अभिलेख, निर्माण से जुड़ी अनुमतियां और कॉलोनी की वास्तविक स्थिति का परीक्षण किया।
जांच रिपोर्ट में नदी तथा ग्राम समाज की जमीन के उपयोग और निर्धारित नियमों का पालन नहीं किए जाने संबंधी गंभीर तथ्य सामने आए।
इसके बाद जिला प्रशासन ने संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू करने का निर्णय लिया।
बिल्डर मुकेश अग्रवाल समेत कई लोगों पर मुकदमा
प्रशासनिक रिपोर्ट के आधार पर विनियमित क्षेत्र के अवर अभियंता की ओर से रामकोट थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई।
मुकदमे में बिल्डर मुकेश अग्रवाल के अलावा उनकी पत्नी श्वेता, पिता प्रह्लाद, भाई विकास और रोली श्रीवास्तव सहित अन्य लोगों के नाम सामने आए हैं।
आरोप है कि कॉलोनी विकसित करने के दौरान सरकारी जमीन और प्राकृतिक जलधारा से संबंधित तथ्यों को नजरअंदाज किया गया।
पुलिस ने धोखाधड़ी, षड्यंत्र करके जालसाजी करने और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने संबंधी आरोपों की जांच शुरू कर दी है।
हालांकि, किसी आरोपी के खिलाफ अपराध सिद्ध होना अभी बाकी है। पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी।
व्यावसायिक नक्शे पर आवासीय मकान बनाने का आरोप
जांच के दौरान भवन निर्माण स्वीकृति से जुड़ी अनियमितताएं भी सामने आई हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, जिस जमीन के लिए व्यावसायिक निर्माण संबंधी नक्शे की स्वीकृति थी, वहां आवासीय मकान तैयार कर बेचे जाने का आरोप है।
कॉलोनी का स्वीकृत लेआउट और भू-उपयोग परिवर्तन भी जांच के दायरे में है।
प्रशासन यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि संबंधित विभागों से कौन-कौन सी अनुमति प्राप्त की गई थी और निर्माण के दौरान किन शर्तों का पालन नहीं हुआ।
इस मामले में जमीन की खरीद-बिक्री तथा रजिस्ट्री से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
तत्कालीन अधिकारियों पर भी गिर सकती है कार्रवाई की गाज
केशव ग्रीन सिटी मामले में कार्रवाई केवल बिल्डर और कॉलोनी विकसित करने वालों तक सीमित नहीं रहने वाली है।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि निर्माण और जमीन से जुड़े मामलों में जिन अधिकारियों या कर्मचारियों ने नियमों की अनदेखी की होगी, उनकी जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
वर्ष 2016 से 2022 के बीच संबंधित पदों पर तैनात सिटी मजिस्ट्रेट, उपजिलाधिकारी, विनियमित क्षेत्र के अवर अभियंता, सिंचाई विभाग के अधिकारी और राजस्व कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जा रही है।
प्रशासन यह पता लगाने का प्रयास कर रहा है कि प्राकृतिक जलधारा के क्षेत्र में निर्माण की अनुमति किन परिस्थितियों में दी गई थी।
बाढ़ से परेशान लोगों ने किया था प्रदर्शन
केशव ग्रीन सिटी में जलभराव के बाद प्रभावित परिवारों ने प्रशासन के सामने अपनी समस्याएं रखी थीं।
रिपोर्ट के मुताबिक, 29 सितंबर को कॉलोनी के निवासियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर प्रदर्शन कर विरोध जताया था।
लोगों की शिकायत थी कि कॉलोनी में रहने के बावजूद उन्हें बाढ़ और जलभराव जैसी गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
प्रदर्शन और शिकायतों के बाद प्रशासन ने जमीन तथा निर्माण से संबंधित मामलों की विस्तृत जांच कराई।
पुलिस जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
केशव ग्रीन सिटी प्रकरण ने नदी के बहाव क्षेत्र में आवासीय निर्माण और सरकारी जमीन के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तीन सदस्यीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज एफआईआर के बाद अब पुलिस संबंधित दस्तावेजों, जमीन की खरीद-बिक्री और निर्माण स्वीकृतियों की जांच कर रही है।
जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर. ने कहा है कि नियमों की अनदेखी करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल बिल्डर समेत आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज है। जांच में सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।





