उत्तर प्रदेश

कॉलोनियों के पार्कों में कब्जा, जान सेनगंज का मोती पार्क बन गया पार्किंग

Admin Delhi 1
6 April 2023 9:25 AM GMT
कॉलोनियों के पार्कों में कब्जा, जान सेनगंज का मोती पार्क बन गया पार्किंग
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इलाहाबाद न्यूज़: साउथ मलाका और बहादुरगंज की तरह शहर के दर्जनों पार्कों में अब बच्चे दौड़-भाग करते दिखाई नहीं पड़ते. लोगों ने पार्कों को पार्किंग और तबेले में तब्दील कर दिया है. शिकायत पर पार्कों को अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाता है, लेकिन पार्किंग हटाने में नगर निगम नाकाम है. पार्क में गाड़ियों की धरपकड़ होती है तो लोग पार्किंग उपलब्ध कराने की मांग करने लगते हैं.

इससे भी बड़ी मुश्किल पार्कों में सरकारी ढांचे खड़े होने से है. लगभग डेढ़ दशक पहले जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीकरण योजना के तहत नलकूप और ओवरहेड, अंडरग्राउंड पानी के टैंक के लिए जगह नहीं मिली तो प्रदेश सरकार की एजेंसियों ने पार्कों पर कब्जा करना शुरू कर दिया. शहर के दो दर्जन पार्कों में पानी के टैंक बनने से बच्चों की खेल गतिविधियां बंद हो गईं.

सौंदर्यीकरण के बाद पार्कों में बच्चों के खेलने पर रोक नगर निगम शहर के 200 से अधिक पार्कों का सौंदर्यीकरण कर रहा है. इसके अंतर्गत पार्कों में लाइट लगाई जा रही है. टहलने के लिए पाथवे बनाया जा रहा है. सौंदर्यीकरण के बाद पार्कों में बच्चों के खेलने पर रोक लगा दी गई है. इस संबंध में पार्कों में बोर्ड भी लगाया जा रहा है. बोर्ड पर साफ लिखा है कि खेलकूद से पार्क की हरियाली प्रभावित होगी.

साउथ मलाका के एक पार्क में वर्षों पहले सुबह-शाम बच्चों की चहल-पहल रहती थी. मोहल्ले के परिवार छोटे पार्क में टहलने आते थे. अब पार्क में ओवरहेड पानी की टंकी बन गई. मिनी नलकूप भी बन गया. अब बच्चे पार्क में नहीं खेलते. मोहल्ले के लोग भी पार्क में टहलने नहीं जाते.

बहादुरगंज का मोती पार्क कभी बच्चों और मोहल्ले के लोगों से गुलजार रहता था. घनी आबादी वाले पार्क के आसपास व्यावसायिक कॉम्पलेक्स बनने के बाद चहल-पहल गायब हो गई. व्यावसायिक भवनों में पार्किंग नहीं होने से खरीदारी करने आने वाले लोग और दुकानदार पार्क में ही गाड़ी खड़ी करते हैं.

अवैध कॉलोनियों के बच्चे जाते हैं आसपास मोहल्लों में

कॉलोनी में निर्माण, पार्किंग और अवैध कब्जे से सिर्फ आसपास के बच्चों के खेलकूद पर अंकुश नहीं लगा. इन्हीं पार्कों में अवैध कॉलोनियों के बच्चे भी खेलने आते थे, क्योंकि उनके घरों के आसपास पार्क नहीं है. बच्चों की टोली शाम को खेलकूद करते दिखाई पड़ती थी. अब अवैध कॉलोनियों के बच्चे भी खेलकूद से दूर अपने घरों तक सीमित रहते हैं.

शहर में सड़कों के किनारे ओपन एयर जिम और योग केंद्र तेजी से बढ़ रहे हैं. बच्चों को व्यायाम करने की सुविधा बढ़ी है. लेकिन बच्चों के विकास के लिए जिम और योग केंद्र पर्याप्त नहीं हैं. पार्क में बच्चे खेल नहीं पा रहे हैं. इससे कई बच्चों के सपने टूट रहे हैं. हर बच्चा मदन मोहन मालवीय स्टेडियम और मेयोहाल नहीं जा सकता.

- डॉ. कमलेश कुमार, प्रधानाध्यापक मनोविज्ञानशाला

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