उत्तर प्रदेश

धोती-पीताम्बरी में सेवा करेंगे कर्मचारी

Kavita2
7 Oct 2026 9:19 AM IST
धोती-पीताम्बरी में सेवा करेंगे कर्मचारी
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अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर की सीता रसोई में सेवा व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब यहां कार्यरत कोठारी, भंडारी और सेवकों को भी निर्धारित ड्रेस कोड का पालन करना होगा। रसोई में प्रवेश के दौरान सभी कर्मचारियों को पुजारियों की तरह धोती के साथ पीताम्बरी धारण करनी होगी। नई व्यवस्था का अनुपालन शुरू कर दिया गया है। इससे पहले सीता रसोई में कार्यरत कर्मचारी धोती-कुर्ता पहनकर सेवा करते थे।

जानकारी के मुताबिक, सीता रसोई में अब आठों कर्मचारियों के लिए निर्धारित वेशभूषा में प्रवेश अनिवार्य किया गया है। कर्मचारी अपने घर से मंदिर परिसर तक सामान्य या अपनी पसंद के वस्त्रों में आ सकते हैं, लेकिन सीता रसोई में प्रवेश करने से पहले उन्हें धोती और पीताम्बरी धारण करनी होगी। इसके साथ ही रसोई में सेवा के दौरान शुद्धता और धार्मिक मर्यादा का पालन करने पर भी जोर दिया गया है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य मंदिर की धार्मिक परंपरा के अनुरूप सेवा से जुड़े सभी लोगों की वेशभूषा में एकरूपता लाना बताया जा रहा है। राम मंदिर में पहले पुजारियों के लिए भी पारंपरिक वेशभूषा निर्धारित की जा चुकी है। अगस्त 2026 से अर्चकों के लिए पीले रंग की धोती और पीताम्बरी उत्तरीय पहनने की व्यवस्था लागू की गई थी। धार्मिक समिति की राय के बाद बिना सिले पारंपरिक वस्त्रों को प्राथमिकता दी गई थी।

अब इसी व्यवस्था का विस्तार सीता रसोई तक किया गया है। यहां भोजन और प्रसाद से संबंधित सेवा करने वाले कोठारी, भंडारी तथा अन्य सेवक भी एक समान पारंपरिक वेशभूषा में दिखाई देंगे। मंदिर प्रबंधन की ओर से पिछले कुछ समय में अलग-अलग विभागों के कर्मचारियों के लिए उनके काम के अनुसार ड्रेस कोड और मानक संचालन प्रक्रिया तय की जा रही है। पुजारी, भंडारी और कोठारी के लिए पीताम्बरी तथा रेशमी धोती की व्यवस्था इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।

सीता रसोई का राम मंदिर की धार्मिक व्यवस्था में विशेष महत्व माना जाता है। यहां भोजन और प्रसाद तैयार करने से जुड़े कार्य किए जाते हैं। ऐसे में रसोई में स्वच्छता और पवित्रता के नियमों का पालन पहले से ही महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। नई व्यवस्था में कर्मचारियों की पोशाक को भी धार्मिक अनुशासन से जोड़ा गया है।

अब तक सीता रसोई में कर्मचारी धोती-कुर्ता पहनकर सेवा करते थे। नई व्यवस्था के बाद कुर्ते के स्थान पर पीताम्बरी धारण करनी होगी। इससे पुजारियों और रसोई सेवा से जुड़े कर्मचारियों की वेशभूषा में काफी हद तक समानता नजर आएगी। हालांकि यह ड्रेस कोड केवल ड्यूटी और रसोई में प्रवेश के दौरान लागू रहेगा। कर्मचारियों को मंदिर आने-जाने के दौरान यही वस्त्र पहनने की बाध्यता नहीं है।

राम मंदिर में पिछले कुछ महीनों में प्रशासनिक व्यवस्था और अनुशासन को लेकर कई बदलाव किए गए हैं। कर्मचारियों के सत्यापन, अलग-अलग विभागों के लिए एसओपी, निगरानी व्यवस्था और ड्रेस कोड जैसी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। मंदिर परिसर में सेवा से जुड़े कर्मचारियों के लिए विभाग के अनुसार अलग-अलग पोशाक भी निर्धारित की गई है।

इससे पहले रामलला के अर्चकों के ड्रेस कोड में भी बदलाव किया गया था। धर्म समिति की बैठक में पारंपरिक वैष्णव व्यवस्था के अनुरूप बिना सिले वस्त्रों को अपनाने पर सहमति बनी थी। इसके बाद अर्चकों के लिए पीले रंग की धोती और पीताम्बरी उत्तरीय निर्धारित किया गया। मंदिर ट्रस्ट की ओर से पुजारियों को निर्धारित पोशाक उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई थी।

राम मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए भी पारंपरिक भारतीय परिधान को लेकर पहले सलाह जारी की जा चुकी है। हालांकि श्रद्धालुओं के लिए पारंपरिक पोशाक की व्यवस्था सलाह के रूप में रही है, जबकि मंदिर में सेवा करने वाले कर्मचारियों और पुजारियों के लिए उनके काम के अनुसार निर्धारित ड्रेस कोड लागू किया जा रहा है।

सीता रसोई में लागू हुई नई व्यवस्था के बाद कोठारी, भंडारी और सेवक अब सेवा शुरू करने से पहले निर्धारित वस्त्र धारण करेंगे। इसके बाद ही उन्हें रसोई में प्रवेश मिलेगा। माना जा रहा है कि इससे रसोई की व्यवस्था में अनुशासन और पारंपरिक स्वरूप दोनों को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

राम मंदिर परिसर में अलग-अलग सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने के साथ ही उनकी पोशाक भी तय की जा रही है। इस बदलाव के बाद सीता रसोई में कार्यरत कर्मचारियों की पहचान भी उनकी निर्धारित वेशभूषा से आसानी से हो सकेगी।

फिलहाल सीता रसोई में नया ड्रेस कोड लागू हो चुका है और कर्मचारी धोती-पीताम्बरी पहनकर सेवा दे रहे हैं। मंदिर प्रबंधन का जोर इस बात पर है कि धार्मिक गतिविधियों और सेवा से जुड़े सभी कार्य निर्धारित परंपरा, पवित्रता और अनुशासन के साथ संचालित किए जाएं।

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