उत्तर प्रदेश

पीएम आवास दिलाने के नाम पर छह हजार की रिश्वत, कर्मचारी गिरफ्तार

Kavita2
15 Sept 2026 3:01 PM IST
पीएम आवास दिलाने के नाम पर छह हजार की रिश्वत, कर्मचारी गिरफ्तार
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मेरठ। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान का आवंटन कराने के नाम पर कथित रूप से छह हजार रुपये की रिश्वत मांगना आवास विकास विभाग के एक आउटसोर्सिंग कर्मचारी को भारी पड़ गया। मेरठ एंटीकरप्शन यूनिट की टीम ने शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए कर्मचारी अभिनव शर्मा को छह हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित प्रावधानों के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अभिनव शर्मा आवास विकास विभाग में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत है। उस पर आरोप है कि उसने प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत मकान का आवंटन कराने के बदले एक व्यक्ति से छह हजार रुपये की मांग की थी। संबंधित व्यक्ति ने रुपये देने के बजाय इसकी शिकायत मेरठ एंटीकरप्शन यूनिट से कर दी। शिकायत में बताया गया कि कर्मचारी मकान आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के बदले रुपये मांग रहा है।

शिकायत मिलने के बाद एंटीकरप्शन यूनिट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपों का प्रारंभिक सत्यापन किया। बताया जा रहा है कि सत्यापन के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोपों के संबंध में आवश्यक जानकारी एकत्र की गई। आरोप प्रथमदृष्टया सही मिलने के बाद टीम ने कर्मचारी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए योजना तैयार की। इसके तहत शिकायतकर्ता को आवश्यक निर्देश दिए गए और पूरी कार्रवाई की निगरानी के लिए टीम लगाई गई।

निर्धारित योजना के अनुसार जब आरोपी कर्मचारी ने शिकायतकर्ता से कथित रिश्वत की रकम ली, तभी मौके पर मौजूद एंटीकरप्शन यूनिट की टीम ने उसे पकड़ लिया। टीम ने उसके पास से रिश्वत के रूप में लिए गए छह हजार रुपये बरामद करने का दावा किया है। इसके बाद उसे हिरासत में लेकर आवश्यक पूछताछ की गई और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए गिरफ्तार कर लिया गया।

एंटीकरप्शन टीम की इस कार्रवाई के बाद आवास विकास विभाग के कर्मचारियों में हलचल मच गई। प्रधानमंत्री आवास योजना आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों को आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही है। ऐसे में योजना के लाभार्थियों से मकान आवंटन के बदले कथित रूप से रिश्वत मांगने का मामला गंभीर माना जा रहा है।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि अभिनव शर्मा मकान आवंटन की प्रक्रिया में किस स्तर पर काम करता था और आवंटन से संबंधित निर्णयों पर उसका कितना प्रभाव था। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि आरोपी ने शिकायतकर्ता से स्वयं रुपये मांगे थे या इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका थी। यह भी जांच का विषय होगा कि इससे पहले किसी अन्य आवेदक या लाभार्थी से भी इसी तरह रकम की मांग की गई थी या नहीं।

आउटसोर्सिंग कर्मचारी होने के बावजूद आरोपी पर सरकारी योजना के लाभार्थी से रिश्वत मांगने का आरोप सामने आने से विभागीय कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे हैं। जांच एजेंसी आरोपी के कार्य, जिम्मेदारियों और मकान आवंटन प्रक्रिया से उसके संबंध की जानकारी जुटा सकती है। इसके साथ ही उससे जुड़े दस्तावेजों और अन्य आवश्यक तथ्यों की भी पड़ताल किए जाने की संभावना है।

प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पात्र लोगों को निर्धारित नियमों के आधार पर आवास उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए आवेदन, दस्तावेजों की जांच और पात्रता की पुष्टि जैसी प्रक्रियाएं पूरी की जाती हैं। इस पूरी प्रक्रिया में यदि कोई कर्मचारी अतिरिक्त धनराशि मांगता है, तो आवेदक इसकी शिकायत संबंधित विभाग या भ्रष्टाचार निरोधक इकाई से कर सकता है। मेरठ में सामने आया यह मामला भी शिकायत के बाद की गई कार्रवाई से जुड़ा बताया गया है।

एंटीकरप्शन यूनिट की ओर से आरोपी की गिरफ्तारी के बाद मामले में आवश्यक दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। शिकायतकर्ता के बयान और कार्रवाई के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों को भी केस का हिस्सा बनाया जाएगा। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित रिश्वत की मांग कब और किन परिस्थितियों में की गई थी।

इस मामले में अभिनव शर्मा पर लगाए गए आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। गिरफ्तारी मात्र से किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। आरोपों की सत्यता उपलब्ध साक्ष्यों, जांच और अदालत में होने वाली सुनवाई के आधार पर तय होगी। फिलहाल एंटीकरप्शन यूनिट मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है।

घटना ने एक बार फिर सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर अवैध रकम मांगे जाने की शिकायतों को लेकर सतर्क रहने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। किसी भी योजना का लाभ दिलाने के बदले यदि कोई कर्मचारी रुपये की मांग करता है, तो आवेदक को भुगतान करने के बजाय संबंधित सक्षम प्राधिकरण के समक्ष शिकायत दर्ज करानी चाहिए। इस मामले में भी शिकायत के बाद सत्यापन और योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई किए जाने का दावा किया गया है।

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