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उत्तर प्रदेश
एलिवेटेड कॉरिडोर ने घटाया खतरा वन्यजीवों की आवाजाही हुई बेहतर
nidhi
29 Aug 2026 8:00 AM IST

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एलिवेटेड कॉरिडोर ने घटाया खतरा
छुटमलपुर : दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का एलिवेटेड कॉरिडोर अब सिर्फ इंसानों के सफर को आसान नहीं बना रहा, बल्कि वन्यजीवों के लिए भी सुरक्षित मार्ग साबित हो रहा है। राजाजी टाइगर रिजर्व और शिवालिक क्षेत्र से गुजरने वाले इस कॉरिडोर में बने अंडरपास और ग्रीन कॉरिडोर के जरिए 18 वन्यजीव प्रजातियों की आवाजाही दर्ज की गई है।
भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), एनएचएआई और सड़क परिवहन मंत्रालय के अध्ययन में सामने आया है कि गणेशपुर से आशारोड़ी के बीच करीब 18 किलोमीटर क्षेत्र में लगाए गए कैमरा ट्रैप से हजारों वन्यजीव गतिविधियां रिकॉर्ड की गईं। इस दौरान 18 अलग-अलग प्रजातियों की 40,444 तस्वीरें कैद हुईं, जिससे साबित हुआ कि वन्यजीव इन सुरक्षित मार्गों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
हाथी से लेकर तेंदुए तक कर रहे सुरक्षित सफर
अध्ययन में हाथी, चीतल, सांभर, नीलगाय, जंगली सूअर, गोल्डन जैकाल, तेंदुआ, लंगूर, मोर और अन्य वन्यजीवों की आवाजाही दर्ज की गई। खास बात यह रही कि हाथियों ने भी इन कॉरिडोर का इस्तेमाल किया। अध्ययन में हाथियों की सुरक्षित आवाजाही के कई उदाहरण मिले हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े जानवरों का किसी नए मार्ग को अपनाना इस बात का संकेत है कि संरचना उनके प्राकृतिक व्यवहार के अनुकूल है।
12 किलोमीटर का ग्रीन एलिवेटेड कॉरिडोर
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष एलिवेटेड कॉरिडोर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य जंगलों को दो हिस्सों में बंटने से रोकना और जानवरों की प्राकृतिक आवाजाही बनाए रखना है। इस परियोजना में अंडरपास और एलिवेटेड मार्गों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि हाथी जैसे बड़े जानवर भी आसानी से गुजर सकें। कई हिस्सों में शोर और रोशनी को नियंत्रित करने के लिए विशेष उपाय भी किए गए हैं।
कैमरों से हुई निगरानी
वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 150 कैमरा ट्रैप और 29 ऑडियो रिकॉर्डर लगाए गए थे। 40 दिनों तक चली निगरानी में वन्यजीवों की गतिविधियों का वैज्ञानिक अध्ययन किया गया। इस निगरानी से यह पता चला कि अलग-अलग प्रजातियां अपनी जरूरत और व्यवहार के अनुसार इन मार्गों का इस्तेमाल कर रही हैं। कुछ संवेदनशील प्रजातियां कम शोर वाले हिस्सों से गुजरना पसंद करती हैं, जबकि अन्य प्रजातियां यातायात के शोर के प्रति ज्यादा अनुकूल दिखीं।
मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी की उम्मीद
अक्सर सड़क और रेल परियोजनाओं के कारण जंगलों में रहने वाले जानवरों के रास्ते बाधित हो जाते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ता है। दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर बनाए गए सुरक्षित मार्ग इस समस्या को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, विकास परियोजनाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण को जोड़ना भविष्य के लिए जरूरी है। यह परियोजना इस बात का उदाहरण है कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और वन्यजीव संरक्षण दोनों को साथ लेकर चला जा सकता है।
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