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लखीमपुर खीरी में हाथियों का उत्पात, तीन एकड़ फसल रौंदी; किसानों ने मांगा मुआवजा

लखीमपुर : उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में जंगली हाथियों के झुंड ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। रात के समय जंगल से निकले हाथियों के झुंड ने खेतों में घुसकर करीब तीन एकड़ क्षेत्र में खड़ी गन्ने और धान की फसल को रौंद दिया। अचानक हुए इस नुकसान से किसानों में चिंता और आक्रोश का माहौल है। पीड़ित किसानों ने वन विभाग और जिला प्रशासन से नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा देने की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार, देर रात जंगल की ओर से हाथियों का झुंड गांव के नजदीक पहुंचा। हाथियों ने खेतों में प्रवेश कर वहां खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया। देखते ही देखते कई किसानों की गन्ने और धान की फसल बर्बाद हो गई। सुबह जब किसान खेतों पर पहुंचे तो फसलों की हालत देखकर उनके होश उड़ गए।
किसानों ने बताया कि उन्होंने महीनों की मेहनत और बड़ी लागत लगाकर फसल तैयार की थी। गन्ने और धान की फसल उनके परिवार की आजीविका का प्रमुख साधन है। हाथियों द्वारा फसल रौंदे जाने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा। किसानों का कहना है कि पहले भी कई बार जंगली जानवरों के कारण उन्हें नुकसान झेलना पड़ा है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है।
हाथियों के झुंड के खेतों में पहुंचने की खबर फैलते ही आसपास के ग्रामीणों में दहशत फैल गई। लोगों को डर है कि यदि हाथियों की आवाजाही इसी तरह जारी रही तो आने वाले दिनों में और अधिक नुकसान हो सकता है। ग्रामीणों ने रात के समय खेतों की रखवाली करने में भी खतरा बताया है।
स्थानीय लोगों ने वन विभाग से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल से निकलकर हाथी आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं, जिससे इंसानों और वन्यजीवों के बीच संघर्ष की स्थिति बन रही है। उन्होंने प्रशासन से हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने और ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की अपील की है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया है। अधिकारियों ने किसानों को नुकसान का सर्वे कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। विभाग की टीम द्वारा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर फसल नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, जंगलों के आसपास रहने वाले क्षेत्रों में अक्सर हाथियों की आवाजाही देखी जाती है। भोजन और पानी की तलाश में कई बार हाथी जंगल से बाहर निकलकर खेतों और गांवों की ओर आ जाते हैं। ऐसे में लोगों को सतर्क रहने और हाथियों के करीब जाने से बचने की सलाह दी जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। जंगलों में भोजन और पानी की उपलब्धता में कमी, जंगल क्षेत्र में बदलाव और हाथियों के पारंपरिक रास्तों में बाधा जैसी वजहों से हाथी अक्सर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख करते हैं।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि नुकसान का जल्द सर्वे कराया जाए और प्रभावित किसानों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। उनका कहना है कि फसल बर्बाद होने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। समय पर मदद मिलने से उन्हें राहत मिल सकती है।
ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि हाथियों को गांव और खेतों से दूर रखने के लिए वन विभाग ठोस योजना बनाए। इसके लिए नियमित निगरानी, चेतावनी व्यवस्था और ग्रामीणों को जागरूक करने की जरूरत है।
लखीमपुर खीरी जैसे वन क्षेत्र से जुड़े जिलों में वन्यजीवों की मौजूदगी आम बात है, लेकिन जब जंगली जानवर खेतों और आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंचते हैं तो लोगों की सुरक्षा और आजीविका दोनों प्रभावित होती हैं।
फिलहाल वन विभाग ने किसानों को हर संभव मदद का भरोसा दिया है। अब ग्रामीणों को नुकसान के आकलन और मुआवजे की प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार है। वहीं, हाथियों के दोबारा खेतों में आने की आशंका को देखते हुए ग्रामीण सतर्क हैं और प्रशासन से जल्द प्रभावी कदम उठाने की उम्मीद कर रहे हैं।





