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नोएडा। उत्तर प्रदेश के हरनंदी किनारे छिजारसी के डूब क्षेत्र में बिजली चोरी के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। आरोप है कि यहां बिना वैध बिजली कनेक्शन के हजारों घरों में बिजली का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे हर महीने करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है।
मामले का खुलासा स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन (STC) के सीईओ मनोज कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के चेयरमैन आशीष गोयल को फटकार लगाई और पूरे मामले पर जवाब मांगा।
20 हजार घरों में अवैध बिजली इस्तेमाल का आरोप
जानकारी के अनुसार, हरनंदी नदी के किनारे छिजारसी के डूब क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से बिजली का उपयोग किया जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 20 हजार घरों में बिना वैध कनेक्शन के बिजली पहुंचाई जा रही है। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क को एक संगठित सिंडिकेट संचालित कर रहा है।
यह सिंडिकेट लोगों से पैसे लेकर अवैध बिजली आपूर्ति कर रहा था।
हर महीने 1.5 से 1.8 करोड़ रुपये की चोरी का दावा
स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि इस क्षेत्र में हर महीने करीब 1.5 करोड़ रुपये से 1.8 करोड़ रुपये तक की बिजली चोरी हो रही है।
बताया गया कि बिजली चोरी से होने वाला आर्थिक नुकसान सरकारी बिजली कंपनियों को उठाना पड़ रहा है, जबकि अवैध वसूली की रकम कथित रूप से सिंडिकेट से जुड़े लोगों तक पहुंच रही है।
मुख्यमंत्री ने मांगा जवाब
मामले की जानकारी मिलने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाराजगी जताई।
उन्होंने UPPCL चेयरमैन आशीष गोयल से पूरे मामले की जानकारी मांगी और अधिकारियों से जवाब तलब किया।
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि बिजली चोरी जैसे मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस खुलासे के बाद बिजली विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं।
लोगों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर लंबे समय तक बिजली चोरी का नेटवर्क चलना विभागीय निगरानी की कमी को दर्शाता है।
अब विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि इस अवैध नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं और इसे संरक्षण कैसे मिल रहा था।
सिंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी
मामले के सामने आने के बाद बिजली विभाग और प्रशासन की ओर से कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
अधिकारियों की टीम क्षेत्र में जांच कर सकती है और अवैध कनेक्शनों को चिन्हित कर कार्रवाई की जा सकती है।
इसके अलावा यह भी जांच की जाएगी कि अवैध बिजली आपूर्ति के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
अवैध कनेक्शन हटाने की चुनौती
हरनंदी किनारे डूब क्षेत्र में बड़ी संख्या में आबादी रहती है। ऐसे में अवैध बिजली कनेक्शन हटाना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती भी हो सकता है।
हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
बिजली चोरी रोकने पर सरकार का जोर
उत्तर प्रदेश सरकार लगातार बिजली चोरी रोकने और बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर दे रही है।
सरकार का कहना है कि बिजली चोरी से न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि वैध उपभोक्ताओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
इसी क्रम में बड़े बिजली चोरी मामलों की जांच और कार्रवाई पर ध्यान दिया जा रहा है।
आगे की जांच पर टिकी नजर
फिलहाल हरनंदी किनारे बिजली चोरी के इस मामले में आगे की कार्रवाई का इंतजार है।
अब देखना होगा कि जांच में किन लोगों के नाम सामने आते हैं और बिजली चोरी के इस कथित सिंडिकेट पर किस तरह की कार्रवाई की जाती है।
मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद बिजली विभाग पर भी जल्द और प्रभावी कदम उठाने का दबाव बढ़ गया है।





