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धमकी 7 दिन तक रखा डिजिटल अरेस्ट
गाजियाबाद : उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में साइबर ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। साइबर अपराधियों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर एक बुजुर्ग को करीब सात दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा और आतंकी गतिविधियों में शामिल होने का डर दिखाकर उनसे 10 लाख रुपये ठग लिए।
ठगों ने बुजुर्ग को इस तरह डराया कि वह लगातार उनके निर्देशों का पालन करते रहे। आरोपियों ने दावा किया कि उनके नाम से जुड़े किसी मामले की जांच चल रही है और अगर उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। डर और दबाव में आकर पीड़ित ने ठगों के बताए खातों में रकम ट्रांसफर कर दी।
फर्जी पुलिस अधिकारी बनकर किया संपर्क
जानकारी के अनुसार, साइबर ठगों ने बुजुर्ग को फोन कर खुद को गाजियाबाद पुलिस का अधिकारी बताया। इसके बाद उन्हें कथित तौर पर जांच और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाया गया। ठगों ने पीड़ित को बताया कि उनके नाम का इस्तेमाल किसी आपराधिक गतिविधि में हुआ है। उन्होंने आतंकी कनेक्शन और गंभीर मामलों का डर दिखाकर मानसिक दबाव बनाया।
सात दिन तक रखा डिजिटल अरेस्ट
डिजिटल अरेस्ट के दौरान ठगों ने पीड़ित को किसी से संपर्क करने से रोका और लगातार निगरानी में रखा। वीडियो कॉल और फोन कॉल के जरिए आरोपी बुजुर्ग पर दबाव बनाते रहे। साइबर अपराधियों का यह तरीका अब तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें वे पुलिस, सीबीआई, ईडी या अन्य जांच एजेंसियों के अधिकारी बनकर लोगों को डराते हैं। कई मामलों में बुजुर्ग और ज्यादा संवेदनशील लोग आसानी से इनके जाल में फंस जाते हैं।
जांच में जुटी पुलिस
मामले की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। साइबर टीम ठगों के मोबाइल नंबर, बैंक खातों और पैसे के लेनदेन की जानकारी जुटा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस वारदात के पीछे कौन सा साइबर गिरोह सक्रिय है और ठगी की रकम कहां-कहां ट्रांसफर की गई।
लोगों को सतर्क रहने की अपील
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर अपनी व्यक्तिगत जानकारी, बैंक डिटेल या OTP साझा न करें। कोई भी पुलिस या सरकारी अधिकारी फोन पर डराकर पैसे जमा करने के लिए नहीं कहता। अगर कोई व्यक्ति डिजिटल अरेस्ट, गिरफ्तारी या जांच के नाम पर दबाव बनाए तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए।
लगातार बढ़ रहे डिजिटल अरेस्ट के मामले
देशभर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ठग अब नई-नई कहानियां बनाकर लोगों को डराते हैं और कुछ ही घंटों में लाखों रुपये की ठगी कर लेते हैं। गाजियाबाद का यह मामला एक बार फिर बताता है कि साइबर अपराधियों से बचने के लिए जागरूकता और सतर्कता सबसे बड़ा हथियार है।
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