उत्तर प्रदेश

Operation साइबर वज्र का असर: नोएडा में फर्जी कॉल सेंटर पकड़ा, नौकरी के नाम पर करते थे ठगी

Ratna Netam
12 July 2026 5:47 PM IST
Operation साइबर वज्र का असर: नोएडा में फर्जी कॉल सेंटर पकड़ा, नौकरी के नाम पर करते थे ठगी
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Noida नोएडा : गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट की थाना फेस-1 पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया है। पुलिस ने 'ऑपरेशन साइबर वज्र' के तहत कार्रवाई करते हुए स्पाइसजेट कंपनी में नौकरी दिलाने का झांसा देकर लोगों से पैसे ऐंठने वाले गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से पुलिस ने मोबाइल फोन, लैपटॉप, डेबिट कार्ड, सिम कार्ड, बैंक पासबुक और यूपीआई साउंड बॉक्स समेत कई अहम सामान बरामद किए हैं।

एडीसीपी नोएडा मनीषा सिंह ने बताया कि थाना फेस-1 पुलिस को मैनुअल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के माध्यम से सूचना मिली थी कि सेक्टर-2 में एक फर्जी कॉल सेंटर संचालित किया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने रविवार को छापेमारी कर कॉल सेंटर से चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुदेश सिंह, बृजेश भदौरिया, अर्जुन और संदीप कुमार तिवारी के रूप में हुई है।

ऑपरेशन साइबर वज्र के तहत हुई कार्रवाई

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन साइबर वज्र के तहत संदिग्ध बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच की जा रही थी। इसी दौरान पुलिस ने 159 संदिग्ध बैंक खातों और 19 रेड जोन की पहचान की। इसके अलावा नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज शिकायतों और करीब 2500 मोबाइल नंबरों की जांच के बाद इस फर्जी कॉल सेंटर तक पुलिस पहुंची।

नौकरी का झांसा देकर ऐसे करते थे ठगी

पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि वे नौकरी तलाशने वाले लोगों का डाटा ऑनलाइन वेबसाइटों से जुटाते थे। इसके बाद लोगों को फोन कर स्पाइसजेट जैसी प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी दिलाने का झांसा देते थे। भरोसा जीतने के लिए आरोपियों द्वारा फर्जी जॉब ऑफर लेटर भी भेजे जाते थे।

इसके बाद रजिस्ट्रेशन फीस, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर उम्मीदवारों से हजारों रुपये वसूले जाते थे। ठगी की रकम फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर कराई जाती थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से इस तरह की साइबर ठगी कर रहे थे और कई राज्यों के लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं।

म्यूल खातों और फर्जी सिम का करते थे इस्तेमाल

पुलिस के मुताबिक, आरोपी ठगी के लिए फर्जी बैंक खातों और म्यूल खातों का इस्तेमाल करते थे। वारदात में प्रयोग किए गए सिम कार्डों को बाद में नष्ट कर दिया जाता था। नए सिम कार्ड लेने के लिए आरोपी गरीब और अनजान लोगों को पैसों का लालच देकर उनके दस्तावेजों का इस्तेमाल करते थे।

पुलिस ने बताया कि इस गिरोह के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों से एनसीआरपी पोर्टल पर 20 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं। प्रारंभिक जांच में गिरोह द्वारा करोड़ों रुपये की साइबर ठगी किए जाने की बात सामने आई है।

बरामद हुआ यह सामान

पुलिस ने आरोपियों के पास से आठ मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, नौ डेबिट कार्ड, 13 सिम कार्ड, तीन बैंक पासबुक और चार यूपीआई साउंड बॉक्स बरामद किए हैं। बरामद सामान की जांच कर पुलिस गिरोह के अन्य सदस्यों और ठगी के नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है।

थाना फेस-1 पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), 336(3), 340(2) और आईटी एक्ट की धारा 66-डी के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और ठगी से जुड़े अन्य लोगों पर भी जल्द कार्रवाई की जाएगी।

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